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Tuesday, September 22, 2026

ट्रंप की ‘ग्राहम लिंडसे तलवार’?


अमेरिकी संसद से हाल में पास हुए ग्राहम लिंडसे विधेयक की गाज भारत पर गिरेगी या नहीं गिरेगी, इसे लेकर अटकलें ही हैं, पर इतना साफ है कि दुनिया पर अमेरिकी वर्चस्व को बनाए रखने की यह एक और कोशिश है.

डॉनल्ड ट्रंप मानते हैं कि यूक्रेन की लड़ाई रोकने के लिए रूस को कमज़ोर करना ज़रूरी है और इसके लिए सबसे बड़ा हथियार आर्थिक पाबंदियाँ हैं.

पिछले साल शुरू हुए अपने टैरिफ-संग्राम में ट्रंप ने भारत को रूसी पेट्रोलियम की खरीद के नाम पर घसीटा. अब वे ग्राहम लिंडसे की तलवार घुमाएँगे.  

हालाँकि भारत की तुलना में चीन ने रूस से ज्यादा मात्रा में पेट्रोलियम का आयात किया है, पर ट्रंप की तलवारबाज़ी चीन के खिलाफ उतनी चपल नहीं होती है, जितनी तेजी से भारत के खिलाफ चलती है.

वजह भी साफ है. चीन के पास भी अमेरिका को अर्दब में लेने के आर्थिक और तकनीकी औजार हैं. वह भारत से बेहतर स्थिति में है. इस वजह से दोनों एक-दूसरे से सीधे पंगा लेने में सतर्कता बरत रहे हैं.

इस हफ्ते 24 सितंबर को ट्रंप और सी चिनफिंग की वार्ता में स्पष्ट हो जाएगा कि अमेरिका-चीन टकराव वास्तव में होगा, या ‘नूरा-कुश्ती’ चलती रहेगी.

Friday, September 18, 2026

लिंडसे ग्राहम बिल की भारत-अमेरिका रिश्तों पर छाया

गत 16 सितंबर को अमेरिकी संसद ने एक व्यापक विधेयक पारित किया जिसका उद्देश्य यूक्रेन के खिलाफ रूसी युद्ध को मदद देने वाली वित्तीय-व्यवस्था को तोड़ना है। एक साल से अधिक समय से चल रहे विरोध को पार करते हुए, संसद ने राष्ट्रपति ट्रंप को एक ऐसा विधेयक भेजा है, जिसके आधार पर वे मॉस्को पर कड़े नए प्रतिबंध लगा सकते हैं।

'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशा एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' अमेरिकी राष्ट्रपति को मॉस्को से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की अभूतपूर्व शक्तियाँ प्रदान करता है। वे चीन और भारत सहित उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं, जो रूसी तेल या गैस के शीर्ष पाँच खरीदारों में शामिल हैं, और तथाकथित 'अवैध जहाजों के बेड़े' के प्रमुख सूत्रधार हैं, जिनका उपयोग रूस के तेल निर्यात पर प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है।

भारत पर असर

हालाँकि विधेयक पारित हो जाने के बाद यह टैरिफ अपने आप नहीं लग जाएगा, बल्कि अब यह ट्रंप पर निर्भर करेगा कि वे किसपर, कितना और कब टैरिफ लगाएँगे। अलबत्ता भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है, ‘भारत अपनी 1.4 अरब आबादी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।’ इसके साथ ही भारत ने अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर संभावित प्रभावों की चेतावनी भी दी। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में इस बात पर जोर दिया है कि इस मुद्दे पर हाल के महीनों में विभिन्न अमेरिकी वार्ताकारों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा की गई है।