‘चीन-पाकिस्तान सीमा’ का तमाशा और पोतों का टकराव
भारत और पाकिस्तान के बीच दो दिन में लगातार दो ऐसी घटनाएँ हुई हैं, जिनसे रिश्तों में कड़वाहट बढ़ती हुई नज़र आ रही है। इसमें एक घटना में चीन की भूमिका भी है। इनमें पहली घटना है गत 15 सितंबर को उत्तरी अरब सागर में भारत और पाकिस्तान के युद्धपोतों का टकराव। और दूसरी घटना है उसके अगले ही दिन 16 सितंबर को ‘पाकिस्तान और चीन के सीमा-आयोग को सक्रिय’ करने का फैसला।
गत 12-13 सितंबर
को नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के हाशिए पर चीन के राष्ट्रपति शी
चिनफिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संवाद से पर्यवेक्षकों नें
अनुमान लगाया था कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया को
गति मिलने वाली है। हालाँकि पर्यवेक्षकों ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को
लेकर भी संदेह व्यक्त किया था।
भारत ने पाक-चीन सीमा-आयोग को खारिज करते हुए, उसे ‘नाटक’ करार दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में पाकिस्तान और चीन के बीच सीमा के अस्तित्व से स्पष्ट रूप से इनकार किया और कहा कि आयोग ‘बिना किसी कानूनी आधार के बना लिया गया है। भारत ने इस बात को दोहराया कि जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश भारत के ‘अविभाज्य’ अंग हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे। पाकिस्तान को अपने अवैध और जबरन कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र से संबंधित किसी भी समझौते में प्रवेश करने का कोई अधिकार नहीं है’।
