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Thursday, November 28, 2019

भारत के लिए क्या संदेश है श्रीलंका के राजनीतिक बदलाव का?


श्रीलंका पोडुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) के उम्मीदवार गोटाबेया राजपक्षे ने राष्ट्रपति चुनावों में जीत दर्ज की है। सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल गोटाबेया अपने देश में टर्मिनेटर के नाम से मशहूर हैं, क्योंकि लम्बे समय तक चले तमिल आतंकवाद को कुचलने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। अब उनके चुनाव के बाद भारत के नजरिए से दो बड़े सवाल हैं। अलबत्ता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परिणाम आते ही गोटाबेया राजपक्षे को बधाई दी है, जिसके जवाब में उन्हें शुक्रिया का संदेश भी मिला है।  
पहला सवाल है कि श्रीलंका के तमिल नागरिकों के प्रति उनका नजरिया क्या होगा? उनके नजरिए से साथ-साथ यह भी कि तमिल नागरिक उन्हें किस नजरिए से देखते हैं। इसके साथ ही जुड़ा है वह सवाल कि देश के उत्तरी तमिल इलाके का स्वायत्तता के सवाल पर उनकी भूमिका क्या होगी? इस तमिल-प्रश्न के अलावा दूसरा सवाल है कि चीन के साथ उनके रिश्ते कैसे रहेंगे? भारत सरकार की निगाहें हिंद महासागर में चीन की आवाजाही पर रहती हैं और राजपक्षे परिवार को चीन-समर्थक माना जाता है।

Sunday, November 4, 2018

श्रीलंका में तख्ता-पलट और भारतीय दुविधा


श्रीलंका में शुक्रवार 26 अक्तूबर को अचानक हुए राजनीतिक घटनाक्रम से भारत में विस्मय जरूर है, पर ऐसा होने का अंदेशा पहले से था। पिछले कुछ महीनों से संकेत मिल रहे थे कि वहाँ के शिखर नेतृत्व में विचार-साम्य नहीं है। सम्भवतः दोनों नेताओं ने भारतीय नेतृत्व से इस विषय पर चर्चा भी की होगी। बहरहाल अचानक वहाँ के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को बर्खास्त करके चौंकाया जरूर है। अमेरिका और युरोपियन यूनियन ने प्रधानमंत्री को इस तरीके से बर्खास्त किए जाने पर फौरन चिंता तत्काल व्यक्त की और कहा कि जो भी हो, संविधान के दायरे में होना चाहिए। वहीं भारत ने प्रतिक्रिया व्यक्त करने में कुछ देर की। शुक्रवार की घटना पर रविवार को भारतीय प्रतिक्रिया सामने आई।

रानिल विक्रमासिंघे को प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने पर भारत ने आशा व्यक्त की है कि श्रीलंका में संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों का आदर होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, 'श्रीलंका में हाल ही में बदल रहे राजनीतिक हलचल पर भारत पूरे ध्यान से नजर रख रहा है। एक लोकतंत्र और पड़ोसी मित्र देश होने के नाते हम आशा करते हैं कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान होगा।' भारत को ऐसे मामलों में काफी सोचना पड़ता है। खासतौर से हिंद महासागर के पड़ोसी देशों के संदर्भ में। पहले से ही आरोप हैं कि उसके अपने पड़ोसी देशों से रिश्ते अच्छे नहीं हैं।

Friday, August 13, 2010

ग्लोबल अपडेट

श्रीलंका से दो रोचक खबरें मिली हैं। एक तो लिट्टे के आतंक के खिलाफ लड़ी सेना के नायक जनरल सनत फोनसेका को वहाँ की फौजी अदालत ने अपने सेवाकाल में ही राजनीति में शामिल होने का दोषी पाया है। अब इस फैसले की पुष्टि सरकार कर देगी तो जनरल के पद और सारे अलंकरण छिन जाएंगे।

जनरल फोनसेका ने जनवरी में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा था, जिसमें वे महीन्द्रा राजपक्षे से हार गए थे। न्हें इसके बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। उनपर नागरिक सरकार का तख्ता पलटने की साज़िश का आरोप भी है।

सनकी मंत्री हटाया गया
श्रीलंका के एक उप राजमार्ग मंत्री मर्विन सिल्वा को पार्टी और पद से हटा दिया गया है। उन्होंने एक अफसर को रस्सी के सहारे पेड़ से बँधवा दिया था। अफसर पर आरोप था कि वह कुछ सरकारी बैठकों में शामिल नहीं हुआ।
लोकतंत्र का यह प्रयोग राष्ट्रपति महीन्द्र राजपक्षे को समझ में नहीं आया।