![]() |
| कार्टून साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट से साभार |
वैश्विक-राजनीति का पहिया अचानक उल्टी दिशा में घूमने लगा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश पर दस्तखत करके रूसी अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने वाले प्रतिबंधों के पैकेज को रोक दिया.
इस फैसले के पहले
ट्रंप की रूस और चीन के राष्ट्रपतियों के साथ हुई वार्ताओं से वैश्विक-संबंधों में
आ रहे बदलाव का संकेत मिलने लगा था. अब इस फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे. इसका भारत-अमेरिका
रिश्तों पर भी असर पड़ेगा.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को रूस ने को कहा कि
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अमेरिकी
राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग अगले महीने चीन में होने
वाले एपेक शिखर सम्मेलन के दौरान एक त्रिपक्षीय बैठक कर सकते हैं.
क्रेमलिन के
प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने वॉलस्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बारे
में पूछे जाने पर टिप्पणी की, जिसमें कहा गया था कि पुतिन ने यूक्रेन में संघर्ष को समाप्त करने के तरीकों
पर चर्चा करने के लिए ऐसी बैठक का प्रस्ताव रखा था.
ट्रंप की
राजनीति
राष्ट्रपति ट्रंप ने
जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ लंबी फोन बातचीत के बाद डीजल समझौते की
घोषणा की, तो इसे अमेरिका के मध्यावधि
चुनावों से पहले पेट्रोलियम की कीमतों को कीमतों में वृद्धि रोकने का एक प्रयास
मानकर नज़रंदाज़ किया जा सकता था. पर बात इतनी ही नहीं है.
यह चुनाव परिणाम
आने के बाद की राजनीति का संकेत भी है. ट्रंप ने यह फैसला ऐसे समय में किया है, जब
यूक्रेन के शहरों पर रूसी हमले तेज़ हो रहे हैं. स्पष्ट है कि ट्रंप को यूरोप और
यूक्रेन से दोस्ती की परवाह नहीं है.
रूस से डीज़ल आयात की घोषणा के एक दिन बाद, ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की को पद से हटाने की माँग शुरू कर दी. वे सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि युद्ध समाप्त करने में ज़ेलेंस्की मुख्य बाधा हैं, पुतिन ही वास्तव में शांति चाहते हैं.




