Monday, April 27, 2026

Fruit benefits फलों के फायदे


 
The fruit with the most fat is coconut.

The fruit with the most sugar is dates.

The fruit with the most protein is jackfruit.

The fruit with the most vitamin C is guava.

The fruit with the most vitamin A is mango.

The fruit with the most fiber is raspberries.

The fruit with the most antioxidants is blueberries. 

The fruit with the most calcium is figs. 

Friday, April 24, 2026

पाकिस्तान में ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के पहले सफे से शिया-आक्रोश की खबर हटाई गई

न्यूयॉर्क टाइम्स का अंतरराष्ट्रीय संस्करण

हालाँकि अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान मध्यस्थता
कर रहा है, पर उसे अपने देश में शिया समुदाय की भावनाओं पर नियंत्रण पाने की कोशिशें भी करनी पड़ रही हैं। न्यूयॉर्क टाइम्सके पाकिस्तानी संस्करण के पहले सफे से से एक लेख गायब हो गया है। यह लेख शिया समुदाय की आवाज़ को दबाने के बारे में था। पाकिस्तान के रक्षा बलों के प्रमुख आसिम मुनीर ने पिछले महीने रावलपिंडी में एक इफ्तार सभा में शिया धर्मगुरुओं से कहा: 'अगर आपको ईरान से इतना प्यार है, तो ईरान चले जाइए।'

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच पाकिस्तान में शिया समुदाय के गुस्से से संबंधित एक लेख को शुक्रवार को पाकिस्तान में इंटरनेशनल न्यूयॉर्क टाइम्स के पहले पृष्ठ से हटा दिया गया। बताया जाता है कि इस खबर को द ट्रिब्यून ने हटाया है, जिसकी टाइम्स के वितरण के लिए पाकिस्तान में साझेदारी है। पृष्ठ पर खाली जगह के निचले भाग में एक छोटा सा अस्वीकरण लिखा है, ‘पाकिस्तान में हमारे प्रकाशन गठबंधन द्वारा इस लेख को मुद्रण के लिए हटा दिया गया था। न्यूयॉर्क टाइम्स उसके संपादकीय कर्मचारियों की इसे हटाने में कोई भूमिका नहीं है।’

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब न्यूयॉर्क टाइम्स को  देश में सेंसर किया गया है। 2014 में, पाकिस्तान ने अल कायदा से पाकिस्तान के संबंधों और ओसामा बिन लादेन के आखिरी ठिकाने की जानकारी पर टाइम्स के एक लेख को सेंसर कर दिया था। उसी महीने, चीन में वेश्यावृत्ति और अन्य यौन व्यवसायों के बारे में एक लेख के कुछ हिस्सों को हटा दिया गया था।

जियाउर रहमान के शुक्रवार के लेख में इस बात का विश्लेषण किया गया कि कैसे देश, जो अब शांतिदूत की भूमिका निभा रहा है, अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर बातचीत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है, वहीं वह ‘घर पर संघर्ष के नतीजों को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहा है।’ ऑनलाइन उपलब्ध लेख में लिखा है, ‘हालांकि पाकिस्तान की डिप्लोमेसी को राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य नेताओं से प्रशंसा मिली है, लेकिन पाकिस्तान के अनुमानित 3.5 करोड़ शियों के बीच असंतोष की भावना और गहरी हो गई है, जो एक अल्पसंख्यक समूह है और अक्सर उग्रवादी हिंसा का निशाना बनता है।’

इस लेख में युद्ध को एक प्रमुख घरेलू मुद्दा बताया गया है, जो ‘ईंधन की आसमान छूती कीमतों और लंबे समय तक बिजली कटौती के बाद दूसरे स्थान पर है’। इसमें यह संभावना भी जताई गई है कि युद्ध सांप्रदायिक हिंसा को फिर से भड़का सकता है।

 न्यूयॉर्क टाइम्स के पाकिस्तान संस्करण के पहले
पेज पर प्रकाशित सेंसर किया गया लेख।  

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट

न्यूयॉर्क टाइम्स के अमेरिकी संस्करण में यह खबर 20 अप्रेल प्रकाशित हुई थी। आज 24 अप्रेल को जब इसके अंतरराष्ट्रीय संस्करण में यह पहले पेज पर लगाई गई, तब उसे हटा दिया गया। इसमें जो शीर्षक लगाया गया था, वह उस प्रकार है: पाकिस्तान के नेता ईरान युद्ध को लेकर देश में बढ़ते आक्रोश को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं।

जियाउर-रहमान की रिपोर्ट में लिखा गया है कि ईरान के साथ गहरे आध्यात्मिक संबंध रखने वाले पाकिस्तान के अल्पसंख्यक शिया, अमेरिकी-इसराइली  हमलों में ईरान के शीर्ष धर्मगुरुओं की हत्या से नाराज हैं, जिससे मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका जटिल हो गई है।

18 मार्च को, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य वार्ताकार के रूप में उभरने से कुछ ही दिन पहले, उन्होंने पाकिस्तान के प्रमुख शिया धर्मगुरुओं को एक बैठक के लिए बुलाया था। ईरान के सर्वोच्च नेता की, हत्या की खबर ने पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में अशांति फैला दी थी, और इस बैठक को व्यापक रूप से हिंसा को और फैलने से रोकने के प्रयास के रूप में देखा गया।

Wednesday, April 22, 2026

पाकिस्तान का ‘डिप्लोमैटिक-वज़न’ बढ़ने के मायने


अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ समझौता हुआ, तो उसपर दस्तखत करने मैं ख़ुद इस्लामाबाद जा सकता हूँ. उनकी इस बात से युद्ध को लेकर उनके दृष्टिकोण के अलावा पाकिस्तान के प्रति उनका झुकाव भी नज़र आता है.

मंगलवार को इस्लामाबाद में बातचीत का दूसरा दौर होने जा रहा है, जिसमें कम से कम ट्रंप नहीं आ रहे हैं. इसका मतलब है कि प्रगति तो हुई है, पर अभी समझौते की स्थिति नहीं है.

ब्रिटिश साप्ताहिक इकोनॉमिस्ट ने लिखा है कि ईरानी नेतृत्व के भीतर मतभेद उभर कर सामने आ रहे हैं. पिछले 10-11 अप्रेल को हुई बातचीत में अमेरिकी प्रतिनिधियों से बहस करने के बजाय ईरानी प्रतिनिधियों ने आपस में ही बहस कर डाली. उसे रोकने में ही पाकिस्तानी मध्यस्थों का समय लग गया.

मुनीर-शहबाज़ की तारीफ

जो ध्यान देने वाली बात है, वह यह कि ट्रंप पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की बार-बार तारीफ़ कर रहे हैं. उनकी इस तारीफ़ में भी प्रधानमंत्री के मुकाबले आसिम मुनीर की तारीफ़ का पुट ज्यादा है.

ऐसा क्यों है, इसे समझने के लिए हमें पाकिस्तान के वर्तमान नेतृत्व की संरचना को समझना होगा. आप इतना समझ लें कि ट्रंप की नज़रों में आसिम मुनीर काम के आदमी हैं. वे ट्रंप के फ़ेवरेट हैं. वे पहले भी कह चुके हैं कि मुनीर ईरान को 'ज़्यादातर लोगों से बेहतर' जानते हैं.

इस बात से मुनीर और शरीफ़ साहब और पाकिस्तानी विदेश-नीति के कर्णधार खुश ज़रूर हो सकते हैं, पर पाकिस्तान की राज्य-शक्ति का वज़न नहीं बढ़ेगा. बेशक उसकी डिप्लोमेसी की विज़िबिलिटी बढ़ी है, वज़न नहीं. वज़न तभी बढ़ेगा, जब उसके अपने पड़ोसी देशों से रिश्ते सुधरेंगे.

शैलियों का अंतर

इस दौरान भारत और पाकिस्तान की डिप्लोमेसी का अंतर स्पष्ट हुआ है. पाकिस्तानी शैली में मौकापरस्ती और जोखिम उठाने का जज़्बाहै. भारत ने इस विवाद के दूरगामी परिणामों को देखते हुए सतर्कता का परिचय दिया है.

इस लड़ाई और उसके बाद की सामरिक-भौगोलिक स्थिति अभी अनिश्चित है. फिलहाल पाकिस्तान प्रासंगिक लग रहा है, सिर्फ वार्ता-स्थल के कारण. वह दोनों पक्षों में से किसी को प्रभावित नहीं कर सकता. उनसे अनुनय-विनय ही कर सकता है. आने वाले समय के आर्थिक और भू-राजनीतिक हालात में वह कहाँ खड़ा होगा, अभी कहना मुश्किल है.

Tuesday, April 21, 2026

स्त्रियों के साथ राजनीतिक-छल ज्यादा चलेगा नहीं


भारत में महिला आरक्षण को लेकर एक साथ कई सवाल हैं। संसद में संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो पाया, या उसे पास कराने में किसी की दिलचस्पी नहीं थी? ऐसा लगता है कि बीजेपी का इरादा इस मसले को उठाना और विरोधियों को उत्तेजित करना था, ताकि वे शोर मचाएँ। सरकार जानती थी कि उसके साथ दो तिहाई सदस्य नहीं हैं और आज के राजनीतिक हालात में उसे कत्तई आशा नहीं करनी चाहिए थी कि विरोधी राजनीति का कोई धड़ा उसके समर्थन में आता। तब फिर क्यों बिल पेश किया?

भारतीय राजनीति विश्वसनीय नहीं है। इसमें जो कहा जाता है, ज़रूरी नहीं कि वैसा ही हो। फौरी तौर पर यह राजनीतिक तीर था, जो नारी-शक्ति का लाभ उठाने के लिए चलाया गया था। संसद में जब बातें होती हैं, तब उन्हें गाँव-गाँव में सुना जाता है। विरोध में जितना शोर होगा, फायदा उतना ज्यादा होगा। उद्देश्य माहौल बनाने, नैरेटिव रचने या इसे जो भी कहें, उतना ही था। विरोधियों की दिलचस्पी भी कम से कम महिला आरक्षण में नहीं थी। परिसीमन को लेकर भी उनके तर्क विचित्र थे। इससे ज्यादा उनका इरादा भी कुछ नहीं था। बहरहाल इसका विपरीत-प्रभाव भी होगा, जो समूची राजनीति को अपनी चपेट में लेगा।

क्या महिलाओं को समझ में नहीं आ रहा है कि उन्हें छला जा रहा है? यह दीगर सवाल है कि इस विधेयक के परास्त होने का लाभ बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव में मिलेगा या नहीं। असल बात यह है कि देश की राजनीति ने पिछले तीन दशक से नारी-शक्ति को छला है। उसे बहुत ज्यादा छला नहीं जा सकेगा। स्त्रियों की राजनीतिक अभिलाषाएँ आज उस सुप्तावस्था में नहीं हैं, जो नब्बे के दशक में थीं। साफ है कि यह विधेयक राजनीतिक-गतिविधि मात्र थी। जिस तरह से बिल के गिरते ही पोस्टर छपकर आ गए, और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की योजना बन गई, वह बताता है कि बीजेपी इसकी तैयारी के साथ आई थी।

सबसे पहले एचडी देवेगौड़ा सरकार ने 81वें संविधान संशोधन विधेयक, 1996 के रूप में 12 सितंबर 1996 को महिला आरक्षण विधेयक, पेश किया था। विधेयक पेश तो हुआ, लेकिन राजनीतिक आम सहमति न बनने और गठबंधन सरकार के भीतर विरोध के कारण इसे संयुक्त संसदीय समिति को भेजना पड़ा और 11वीं लोकसभा भंग होने के साथ ही लैप्स हो गया। देश की राजनीति चाहती, तो देवेगौड़ा का बिल ही पास हो जाता।

सरकार ने इसबार जो विधेयक पेश किया था, वह संसदीय सीटों के परिसीमन पर केंद्रित था। उसके विरोधियों का कहना है कि परिसीमन देश को तोड़ देगा। वे कहते हैं कि 2023 के बिल को लागू करो। 2023 के महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, इसे परिसीमन के बगैर लागू नहीं किया जा सकता। यह कानून विशेष रूप से जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होने की शर्त से बँधा हुआ है। परिसीमन रुकेगा तो आरक्षण भी रुकेगा।

Monday, April 20, 2026

इस्लामाबाद-वार्ता के एक और दौर का मतलब, रास्ता अभी खुला है

स्वचालित राइफल के साथ हमास का एक सैनिक

 इस्लामाबाद में मंगलवार से अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत होने जा रही है। इस वार्ता का मतलब यह भी है कि दोनों पक्ष कुछ मसलों पर रियायतें देने को तैयार हैं। अभी यह निष्कर्ष निकाल लेना जल्दबाज़ी होगी कि कौन सा पक्ष पीछे हट रहा है, पर इतना साफ है कि लड़ाई रुकने के बावज़ूद अमेरिका लगातार अपना दबाव बढ़ा रहा है। यह दबाव मूलतः नाभिकीय सामग्री को लेकर है, पर अब होर्मुज़ पर नियंत्रण भी इस दबाव में शामिल हो गया है।

हाल के दिनों में, ट्रंप ने कहा था कि आमने-सामने की बातचीत का एक और दौर होगा और उन्होंने ईरान के साथ शांति समझौते के होने की गारंटी दी थी। लेकिन किसी भी समझौते की शर्तें अभी भी स्पष्ट नहीं हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान उनकी सभी माँगों पर सहमत हो गया है, जबकि ईरानी अधिकारी इस बात से पूरी तरह इनकार करते हैं। लेकिन इस सप्ताह आमने-सामने की बातचीत फिर से शुरू करने का निर्णय यह दर्शाता है कि दोनों पक्ष कम से कम समझौते की दिशा में कुछ प्रगति कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि रविवार को अमेरिकी नौसेना के एक विध्वंसक पोत ने ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन करने वाले एक ईरानी मालवाहक जहाज पर हमला कर उसे जब्त कर लिया, जिससे इस सप्ताह समाप्त होने वाले नाजुक युद्धविराम के लिए एक नया खतरा पैदा हो गया है। ट्रंप ने हमले की घोषणा वाइट हाउस के एक अधिकारी द्वारा यह कहे जाने के कुछ घंटों बाद की कि अमेरिका उपराष्ट्रपति जेडी वैंस सहित एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान में शांति वार्ता के लिए भेज रहा है, जबकि ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा कि तेहरान अभी तक बैठक के लिए सहमत नहीं हुआ है।

पिछले सप्ताह अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर अपनी नाकाबंदी को व्यापक विश्व के जलक्षेत्रों तक बढ़ा दिया, और घोषणा की कि वह खुले समुद्र में किसी भी स्थान या ध्वज की परवाह किए बिना ईरान की सहायता करने वाले किसी भी जहाज की घेराबंदी करेगी।

ईरानी अंतर्विरोध

ब्रिटिश साप्ताहिक इकोनॉमिस्ट ने इस बीच ईरानी नेतृत्व के बीच उभरते अंतर्विरोधों की जानकारी दी है। पता नहीं ये अंतर्विरोध वास्तव में हैं या प्लांट किए गए हैं। बहरहाल पत्रिका की वैबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि बीते कुछ दिनों में नेतृत्व की जानी-पहचानी उथल-पुथल देखने को मिली है। 17 अप्रैल को ट्रंप ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य यातायात के लिए खोल दिया गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने इसकी पुष्टि की। उसी दिन ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर ( आईआरजीसी ) से जुड़े मीडिया संस्थानों ने अराग़ची की इस बात के लिए आलोचना की कि उन्होंने जलडमरूमध्य खोलने की शर्तों का उल्लेख नहीं किया।