Wednesday, July 22, 2026

पाकिस्तान फिर से टूटने का खतरा

बलोच हमलों में महिला आत्मघातियों की संख्या बढ़ रही है। यह है सुमैया कलंदरानी बलोच जिसने 24 जून 2023 को तुरबत में एक सैन्य काफिले पर आत्मघाती हमला किया। हमले के पहले बलोच लिबरेशन आर्मी के ध्वज के सामने खड़े होकर उसने फोटो खिंचवाया।

अशांत बलोचिस्तान में मस्तुंग के पास गुरुवार 16 जुलाई को सुरक्षा काफिले पर हुए हमले में 45 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबर है. बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जो दो सप्ताह से भी कम समय में सुरक्षा-कर्मियों पर तीसरा बड़ा हमला है.

उपरोक्त जानकारी बलोचिस्तान पोस्ट ने दी है, हालाँकि पाकिस्तानी सेना ने हमले की पुष्टि की, लेकिन मरने वालों की संख्या नहीं बताई. बीएलए के प्र
वक्ता जियंद बलोच ने बताया कि मीडिया को बयान जारी करते समय भी बीएलए के लड़ाकों और पाकिस्तानी सेना के बीच लड़ाई जारी थी, और हताहतों की संख्या बढ़ सकती है.

आर्थिक-गिरावट और आंतरिक-संघर्षों के कारण पाकिस्तान, गंभीर अस्थिरता का सामना कर रहा है. बलोचिस्तान में विद्रोह और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में हो रहे प्रदर्शनों से देश की अखंडता को खतरा पैदा हो गया है. सवाल है कि क्या पाकिस्तान फिर से टूटेगा?

Sunday, July 19, 2026

मेक्सिको का पूरा नाम

उत्तरी और मध्य अमेरिका को जोड़ने वाले इस देश को मानचित्र पर आने के बाद से ही इसे किसी न किसी रूप में ‘मेक्सिको’ के नाम से जाना जाता रहा है। यह शब्द विश्व के पहले आधुनिक एटलस, थियोट्रम ऑर्बिस टेरारम के 1603 के अंग्रेजी संस्करण में भी मिलता है, लेकिन दो सदी से अधिक वर्षों के अपने इतिहास में, इस देश का आधिकारिक नाम कभी मेक्सिको नहीं रहा। इसके बजाय, अमेरिकी क्रांति से प्रेरित होकर, 1824 के देश के संविधान ने हिस्पानी भाषा में एस्टाडोस यूनिडोस मेक्सिकानोस, या संयुक्त मेक्सिकन राज्य (यूनाइटेड मेक्सिकन स्टेट्स) की स्थापना की। दो शताब्दियों के बाद भी, यही देश का आधिकारिक नाम है।

हाल के वर्षों में, देश के सरल नाम को अधिक प्रचलित और प्रचारित करने के प्रयास किए गए हैं। 2012 में, मैक्सिको के तत्कालीन राष्ट्रपति फेलिप काल्डेरोन ने देश के आधिकारिक नाम के रूप में ‘मेक्सिको’ को अपनाने का प्रस्ताव रखा। उस समय काल्डेरोन ने कहा था, ‘अब समय आ गया है कि हम मेक्सिकन अपनी मातृभूमि के नाम की सुंदरता और सरलता को पुनः प्राप्त करें: मेक्सिको, एक ऐसा नाम जिसका उपयोग हम गीत गाते समय करते हैं, एक ऐसा नाम जो हमें पूरी दुनिया में पहचान देता है और जिस पर हमें गर्व है।’ हालांकि, काल्डेरोन के इस प्रयास का कोई परिणाम नहीं निकला। वर्तमान में, राष्ट्रीय नाम, जो हर मेक्सिकन पासपोर्ट पर अंकित है, Mexico के साथ ‘Estados Unidos Mexicanos’ ही है।

इंटरेस्टिंग फैक्ट्स


गांधी के उपवास


देश में माँगें मनवाने के लिए अनशन करने की परंपरा है। आमतौर पर इसे गांधी की परंपरा माना जाता है। बेशक गांधी ने उपवास की परंपरा चलाई, पर इस बात की पड़ताल करें कि क्या गांधी जी ने भारत की आज़ादी के लिए अंग्रेजों पर दबाव बनाने के लिए क्या कोई अनशन किया था? बेशक उन्होंने लंबे स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया और कुछ उपवासों के मार्फत उन्होंने ब्रिटिश-सरकार के प्रति विरोध भी दर्ज कराया। उस दौरान कम से कम 18 उपवास रखे, जिन्हें वे आत्मशुद्धि और अहिंसक प्रतिरोध (सत्याग्रह) का सबसे शक्तिशाली हथियार मानते थे।

Wednesday, July 15, 2026

भारत की ‘एक्ट-ईस्ट पॉलिसी’ में नई ऊर्जा का संचार


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले शनिवार को ऑकलैंड से रवाना होते हुए इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के अपने तीन देशों के दौरे का समापन किया. यह एक ऐतिहासिक दौरा था जिसने इस इलाके के देशों के साथ भारत के संबंधों को दीर्घकालिक-साझेदारी के स्तर तक पहुँचाया.

इस यात्रा के महत्व और प्रभाव को समझने के लिए हमें इन तीन देशों के अलावा दक्षिण, दक्षिण पूर्व और सुदूर एशिया के बारे में भी विचार करना होगा.  यह दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र के भू-राजनीतिक और आर्थिक भविष्य में भारत की उभरती आकांक्षाओं को उजागर करता है. इसलिए भी कि यह क्षेत्र वैश्विक-स्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है.

प्रधानमंत्री की यह यात्रा कोरिया और जापान के नेताओं के साथ उनकी हालिया मुलाकातों के बाद हुई हैं. ये सभी मुलाकातें भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी में नई ऊर्जा का संचार करती हैं और इस बात की मान्यता को दर्शाती हैं कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की मध्यम शक्तियों के बीच गहरा सहयोग पारस्परिक आर्थिक और रणनीतिक लाभ संभव है.

तीन देशों की इस यात्रा ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, शिक्षा, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिणाम दिए, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उससे परे एक प्रमुख भागीदार के रूप में भारत की भूमिका मजबूत हुई.

Thursday, July 9, 2026

हिंद-प्रशांत क्षेत्र के बदलते समीकरणों के बीच मोदी की इंडोनेशिया समेत तीन देशों की यात्रा


वैश्विक-राजनीति में आते बदलाव की रोशनी में पिछले हफ्ते जापानी प्रधानमंत्री की भारत-यात्रा और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड-यात्रा के दूरगामी अर्थ हैं. यह यात्रा 11 जुलाई तक चलेगी.

पिछले साल से अमेरिकी-नीतियों में आए बदलाव के कारण एशिया के देशों ने अपनी भावी नीतियों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है. यह विचार केवल सामरिक-दृष्टि से ही नहीं है, बल्कि इसका काफी बड़ा हिस्सा आर्थिक-सामाजिक सहयोग से जुड़ा है.

पिछले हफ्ते जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची और पिछले अप्रैल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की दिल्ली यात्राओं ने अमेरिका के दो प्रमुख एशियाई सहयोगियों, तोक्यो और सोल में अपने एशियाई संबंधों को व्यापक बनाने की तात्कालिकता को रेखांकित किया था.

प्रधानमंत्री की इंडोनेशिया-यात्रा और इस दौरान चर्चाओं और समझौतों से भारत और इंडोनेशिया का एक दूरदर्शी एजेंडा झलकता है, जिसमें समुद्री सहयोग, रक्षा उद्योग में साझेदारी, आर्थिक विस्तार, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा पर जोर दिया गया है. इस यात्रा ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार के रूप में दोनों देशों के साझा दृष्टिकोण को और पुष्ट किया है.

सामरिक-महत्त्व

भारत का लगभग 40 फीसदी समुद्री व्यापार दुनिया के सबसे व्यस्त जलमार्गों में से एक, मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. और इस रणनीतिक मार्ग के प्रवेश द्वार पर स्थित देश इंडोनेशिया है.

भौगोलिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से इंडोनेशिया की इसमें बेहद महत्त्वपूर्ण भूमिका है. हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के संगम पर स्थित, यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थानों में से एक है.

प्रधानमंत्री की यह यात्रा, 2018 के बाद उनकी इंडोनेशिया की पहली द्विपक्षीय यात्रा है. यह भारत के समुद्री हितों को सुरक्षित करने, आर्थिक साझेदारी का विस्तार करने और तेजी से प्रतिस्पर्धी होते हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी स्थिति को मजबूत करने से जुड़ी है.

उनकी 2018 की यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने एक साझा समुद्री दृष्टिकोण का अनावरण किया था, और हालिया चर्चाओं का उद्देश्य उस ढाँचे को आगे बढ़ाना है. वार्ता में आपसी समुद्री क्षेत्र जागरूकता, संपर्क और दोनों देशों के तटरक्षक बलों के बीच सहयोग बढ़ाने जैसे विषय शामिल है.