पश्चिम एशिया की लड़ाई अब तीसरे हफ्ते में है. इसके साथ जुड़े भारत के गहरे हित नज़र आने लगे हैं. वहाँ रहने वाले एक करोड़ भारतीयों के अलावा ऊर्जा आवश्यकताओं, पूँजी निवेश और रक्षा-तकनीक से जुड़े मसलों के कारण भी हमारी दिलचस्पी इस इलाके में रही है और रहेगी.
हमारी विदेश-नीति, सामाजिक-सांस्कृतिक
संवेदनशीलता और नैतिकता के अलावा सकल राष्ट्रीय हितों से निर्धारित होती है. यह
गणित यानी ‘कैलकुलेशन’ है, जो दीर्घकालीन हितों पर आधारित होता
है.
इस गणित का सहारा सभी देश लेते हैं, और इसी गणित
का परिणाम है कि जबर्दस्त ‘फायर वर्क्स’ के बीच से पेट्रोलियम और एलपीजी के कुछ
टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार करते हुए भारत आने में कामयाब हुए हैं. यही गणित
हमें मुखर होने और कई बार खामोश रहने का सुझाव देता है.
हाल में अमेरिकी प्रशासन ने रूसी तेल पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को 30 दिन के लिए निलंबित करने का निर्णय ऐसे ही गणित के तहत ही किया है. ट्रंप के इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार को आकार देने में तेल समृद्ध रूस के महत्त्व के प्रति वाशिंगटन की व्यावहारिक समझ व्यक्त होती है.
