Sunday, January 29, 2023

अर्थव्यवस्था के निर्णायक दौर का बजट


इसबार का सालाना बजट बड़े निर्णायक दौर का बजट होगा। हर साल बजट से पहले कई तरह की उम्मीदें लगाई जाती हैं। ये उम्मीदें, उद्योगपतियों, कारोबारियों, किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों, गृहणियों, उच्च वर्ग, मध्य वर्ग, निम्न वर्ग यानी कि भिखारियों को छोड़ हरेक वर्ग की होती हैं। सरकार के सामने कीवर्ड है संवृद्धि। उसके लिए जरूरी है आर्थिक सुधार। मुद्रास्फीति और बाजार के मौजूदा हालात को देखते हुए बजट में बड़े लोकलुभावन घोषणाओं उम्मीद नहीं है, अलबत्ता एक वर्ग कुछ बड़े सुधारों की उम्मीद कर रहा है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने हाल में एक रिपोर्ट कहा है कि अगले साल चुनाव होने हैं। ऐसे में बजट में सरकार पूंजीगत व्यय 8.5 से नौ लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा सकती है जो मौजूदा वित्त वर्ष में 7.5 लाख करोड़ रुपये है। खाद्य और उर्वरक सब्सिडी में कमी के जरिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 5.8 प्रतिशत रख सकती है। रेलवे के बजट में काफी इजाफा होगा। 500 वंदे भारत और 35 हाइड्रोजन ट्रेनों की घोषणा हो सकती है। इनके अलावा 5000 एलएचबी कोच और 58000 वैगन हासिल करने की घोषणा भी की जा सकती है। रेल योजना-2030 का विस्तार भी इस बजट में हो सकता है। 7,000 किलो मीटर ब्रॉड गेज लाइन के विद्युतीकरण की भी घोषणा हो सकती है। वरिष्ठ नागरिकों को छूट की घोषणा भी हो सकती है।

मध्यवर्ग की मनोकामना

मध्यवर्ग की दिलचस्पी जीवन निर्वाह, आवास और आयकर से जुड़ी होती है। सरकार ने अभी तक आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं की है, जो 2014 में तत्कालीन वित्तमंत्री अरुण जेटली ने उस सरकार के पहले बजट में तय की थी। 2019 से मानक कटौती 50,000 रुपये बनी हुई है। वेतनभोगी मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए आयकर छूट सीमा और मानक कटौती बढ़ाने की जरूरत है। बजट पूर्व मंत्रणा बैठकों में टैक्स स्लैब में बदलाव और करों में छूट का दायरा बढ़ाने की सरकार से अपील की गई है। इन बैठकों में पीपीएफ के दायरे को डेढ़ लाख से बढ़ाकर तीन लाख करने की माँग की गई। 80सी के तहत मिलने वाली छूट के दायरे को बढ़ाया जा सकता है। स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के लिए भुगतान पर भी विचार किया जा रहा है। वित्तमंत्री के हाल के एक बयान ने मध्यम वर्ग में उम्मीद बढ़ा दी है कि आगामी बजट में उन्हें कुछ राहत मिल सकती है। वित्त मंत्री ने कहा था,मैं भी मध्यम वर्ग से हूं इसलिए मैं इस वर्ग पर दबाव को समझती हूं।”

राजकोषीय घाटा

महामारी के दौरान सरकार ने गरीबों को मुफ्त अनाज और दूसरे कई तरीके से मदद पहुँचाने की कोशिश की। अब उसका हिसाब देना है। सब्सिडी में कमी और बजट का आकार बढ़ाने की जरूरत होगी। राजकोषीय घाटे को कम करने की भी। पिछले साल के बजट में सब्सिडी करीब 3.56 लाख करोड़ रुपये और राजकोषीय घाटा जीडीपी का 6.4 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई थी। लक्ष्य है कि वित्त वर्ष 2024-25 तक इसे 4.5 फीसदी तक होना चाहिए। 2015 से 2018 के बीच अंतरराष्ट्रीय खनिज तेल की कीमतों में गिरावट आने से राजस्व घाटा 2013-14 के स्तर 4.5 प्रतिशत से नीचे आ गया था। 2016-17 में यह 3.5 प्रतिशत हो गया। इसके बाद सरकार ने इसे 3 पर लाने का लक्ष्य रखा। महामारी ने राजस्व घाटे के सारे गणित को बिगाड़ कर रख दिया है। मार्च 2014 में केंद्र सरकार पर सार्वजनिक कर्ज जीडीपी का 52.2 प्रतिशत था, जो मार्च 2019 में 48.7 प्रतिशत पर आ गया था। पर महामारी के दो वर्षों ने इसे चालू वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 59 प्रतिशत पर पहुँचा दिया है। केंद्र और राज्य सरकारों का सकल कर्ज 84 फीसदी है। बढ़ते ब्याज बिल (जीडीपी के 3 प्रतिशत से अधिक) को देखते हुए, मध्यम अवधि में राजकोषीय मजबूती न केवल व्यापक स्तर की स्थिरता के लिए आवश्यक है, बल्कि इसके बिना निजी निवेश में सुधार भी संभव नहीं है जो अर्थव्यवस्था में तेज वृद्धि की कुंजी है। कर्ज का मतलब है, ज्यादा ब्याज। जो धनराशि विकास और सामाजिक कल्याण पर लगनी चाहिए, वह ब्याज में चली जाती है। सरकार के पास संसाधन बढ़ाने का एक रास्ता विनिवेश का है, जिसका लक्ष्य कभी पूरा नहीं होता।  

Friday, January 27, 2023

महत्वपूर्ण साबित होगा अल-सीसी का भारत आगमन


इस साल गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्तह अल-सीसी का आगमन भारत की ‘लुक-वैस्ट पॉलिसी’ को रेखांकित करता है, साथ ही एक लंबे अरसे बाद सबसे बड़े अरब देश के साथ पुराने-संपर्कों को ताज़ा करने का प्रयास भी लगता है. इस वर्ष भारत की जी-20 की अध्यक्षता के दौरान मिस्र को 'अतिथि देश' के रूप में आमंत्रित किया गया है.

अल-सीसी गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के तौर पर आने वाले मिस्र के पहले नेता होंगे. महामारी के कारण बीते दो साल ये समारोह बगैर मुख्य अतिथि के मनाए गए. इस बार समारोह के मेहमान बनकर आ रहे अल-सीसी देश के लिए भी खास है. वे एक ऐसे देश के शासक हैं, जो कट्टरपंथ और आधुनिकता के अंतर्विरोधों से जूझ रहा है.

कौन हैं अल-सीसी?

पहले नासर फिर अनवर सादात और फिर हुस्नी मुबारक। तीनों नेता लोकप्रिय रहे, पर मिस्र में लोकतांत्रिक संस्थाओं का विकास भारतीय लोकतंत्र की तरह नहीं हुआ. 2010-11 में अरब देशों में लोकतांत्रिक-आंदोलनों की आँधी आई हुई थी. इसे अरब स्प्रिंग या बहार-ए-अरब कहते हैं. इस दौरान ट्यूनीशिया, मिस्र, यमन और लीबिया में सत्ता परिवर्तन हुए.

11 फरवरी, 2011 को हुस्नी मुबारक के हटने की घोषणा होने के बाद अगला सवाल था कि अब क्या होगा? इसके बाद जनमत-संग्रह और संविधान-संशोधन की एक प्रक्रिया चली. अंततः 2012 में हुए चुनाव में मुस्लिम-ब्रदरहुड के नेता मुहम्मद मुर्सी राष्ट्रपति चुने गए. मुर्सी के शासन से भी जनता नाराज़ थी और देशभर में आंदोलन चल रहा था.

फौजी से राजनेता

संकट के उस दौर में अल-सीसी का उदय हुआ. वे चुने हुए लोकतांत्रिक नेता को फौजी बगावत के माध्यम से हटाकर राष्ट्रपति बने थे, पर जनता ने भी बाद में उन्हें राष्ट्रपति के रूप में चुना. 19 नवंबर, 1954 को जन्मे अब्देल फत्तह अल-सीसी सैनिक अफसर थे. जुलाई 2013 को उन्होंने चुने हुए राष्ट्रपति मुहम्मद मुर्सी को हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली.

Wednesday, January 25, 2023

पाकिस्तान की सेहत के लिए अच्छे नहीं ऐसे यू-टर्न


 देस-परदेश

भारत-पाकिस्तान रिश्तों में किस कदर तेजी से उतार-चढ़ाव आता है, इसका पता पिछले एक हफ्ते के घटनाक्रम में देखा जा सकता है. पहले खबर आई कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने यूएई के चैनल अल अरबिया के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि हम कश्मीर समेत सभी मुद्दों पर पीएम नरेंद्र मोदी के साथ गंभीर बातचीत करना चाहते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के साथ तीन-तीन युद्ध लड़कर पाकिस्तान ने सबक सीख लिया है. इससे गरीबी, बेरोजगारी और परेशानी के सिवा हमें कुछ नहीं मिला. अब हम शांति चाहते हैं. मंगलवार 17 जनवरी को पाकिस्तान के सरकारी टीवी चैनल पर साक्षात्कार के प्रसारण के फौरन बाद प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि पीएम के बयान को गलत संदर्भ में लिया गया. बातचीत तभी हो सकती है, जब भारत अगस्त 2019 के फैसले को वापस ले.

ईमानदार बातचीत

शरीफ ने अरब चैनल पर सोमवार 16 जनवरी को प्रसारित बातचीत में कहा था कि दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू कराने में संयुक्त अरब अमीरात महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिसके भारत के साथ बेहतर संबंध हैं. शरीफ ने कहा, भारतीय नेतृत्व व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मेरा संदेश है कि आइए हम टेबल पर बैठें और कश्मीर जैसे ज्वलंत मुद्दों को सुलझाने के लिए गंभीर व ईमानदार बातचीत करें.

शहबाज़ शरीफ हाल में यूएई की यात्रा पर गए थे और वहाँ उन्होंने 12 जनवरी को राष्ट्रपति मुहम्मद बिन ज़ायेद अल-नाह्यान के साथ मुलाकात की थी. उस मुलाकात का ही ज़िक्र उन्होंने अल अरबिया के इंटरव्यू में किया. इस इंटरव्यू में उन्होंने कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन और अगस्त, 2019 का ज़िक्र भी किया था.

Tuesday, January 24, 2023

मुसलमानों के करीब जाने के भाजपा-प्रयास


करीब दो दशक तक मुसलमानों की नाराजगी का केंद्र बने नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी बीजेपी ने मुसलमानों के साथ जुड़ने की कोशिशें शुरू की हैं। इंडियन एक्सप्रेस की संवाददाता लिज़ मैथ्यूस ने खबर दी है कि पार्टी ने 60 ऐसी लोकसभा सीटों को छाँटा है, जहाँ 2024 के चुनाव में मुसलमान-प्रत्याशियों को आजमाया जा सकता है। ऐसी खबरें काफी पहले से हवा में हैं कि बीजेपी ने पसमांदा मुसलमानों को आकर्षित करने का फैसला किया है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक केवल पसमांदा ही नहीं मुसलमानों के कुछ दूसरे वर्गों को पार्टी ने अपने साथ जोड़ने का प्रयास शुरू किया है। पार्टी फिलहाल इसके सहारे बड़ी संख्या में वोट पाने या सफलता पाने की उम्मीद नहीं कर रही है, बल्कि यह मुसलमानों के बीच भरोसा पैदा करने और अपने हमदर्दों को तैयार करने का प्रयास है।

नरेंद्र मोदी ने हाल में दिल्ली में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कहा कि पार्टी के नेताओं को मुसलमानों के प्रति अभद्र टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में कई समुदाय भाजपा को वोट नहीं देते हैं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें (भाजपा कार्यकर्ताओं को) उनके प्रति नफरत नहीं दिखानी चाहिए, बल्कि बेहतर तालमेल स्थापित कर बेहतर व्यवहार बनाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने मुसलमानों में पसमांदा और बोहरा समुदाय के लोगों के ज्यादा करीब जाने की बात भी कही।

पर्यवेक्षक मानते हैं कि बीजेपी अब स्थायी ताकत के रूप में उभर रही है। उसका प्रयास अब अपने सामाजिक आधार को बढ़ाने का है। इसके पहले प्रधानमंत्री ने हैदराबाद कार्यकारिणी में भी कुछ इसी तरह की बात कही थी। यह सवाल अपनी जगह है कि नरेंद्र मोदी को इस तरह का बयान क्यों देना पड़ा, और क्या उनके इन बयानों के बाद मुसलमानों के प्रति भाजपा नेताओं के नफरती बयानों में कमी आएगी?

मुसलमानों से सहानुभूति पूर्ण व्यवहार की इस नसीहत के पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि हिंदू समाज हजारों साल से गुलाम रहा है, अब उसमें जागृति आ रही है। इस वजह से कभी-कभी हिंदू समुदाय की ओर से आक्रामक व्यवहार दिखाई पड़ता है। उन्होंने इसे ठीक तो नहीं बताया, लेकिन परोक्ष रूप से इस बात का समर्थन किया कि हिंदू समुदाय का यह आक्रोश इतिहास को देखते हुए सही है। कुछ लोग इन दोनों बातों को एक-दूसरे के विपरीत मान रहे हैं।

Monday, January 23, 2023

नेताजी के रहस्य पर से परदा क्यों नहीं उठता?

भारत सरकार ने पिछले साल फैसला किया था कि अब से हर साल नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के साथ गणतंत्र दिवस समारोहों का सिलसिला शुरू होगा। आज उनकी 126 वीं जयंती है। हम उनकी जयंती मनाते हैं, पर इस बात को निश्चित रूप से नहीं जानते कि 18 अगस्त, 1945 के बाद उनका क्या हुआ। उनके जीवन का अंतिम-अध्याय आधुनिक भारत के सबसे अनसुलझे रहस्यों में एक है। इस सिलसिले में भारत सरकार के तीन जाँच आयोगों की पड़ताल के बाद भी रहस्य बना हुआ है। देश-विदेश की दस से ज्यादा जाँचों और पत्रकारों-लेखकों के सैकड़ों विवरणों के बाद भी रहस्य पर पड़ा परदा उठ नहीं पाया है।

रहस्य बना रहना शायद व्यवस्था और राजनीति के अनुकूल बैठता है। ज्यादातर जाँचों का निष्कर्ष है कि नेताजी का निधन विमान-दुर्घटना के बाद 18 अगस्त, 1945 को हो गया, पर किसी भी सरकार ने पूरे विश्वास के साथ घोषित नहीं किया कि ऐसा ही हुआ था। सरकारी गोपनीय-फाइलों में दर्ज विवरणों को शोधकर्ताओं ने छान मारा। अब एक महत्वपूर्ण साक्ष्य शेष रह गया है। वह है तोक्यो के रेंकोजी मंदिर में रखी नेताजी की अस्थियाँ। इन अस्थियों के डीएनए परीक्षण से पहचान हो सकती है। सवाल है कि क्या ऐसा होगा? इसमे दिक्कत क्या है?

माना जाता है कि इस सिलसिले में सभी गोपनीय फाइलें खोली जा चुकी हैं, पर जिन्हें संदेह है, वे मानते हैं कि आज भी कहीं कुछ छिपा है। 1997 में ब्रिटिश सरकार ने भारत की पोलिटिकल इंटेलिजेंस से जुड़ी सभी फाइलें सार्वजनिक अध्ययन के लिए ब्रिटिश लाइब्रेरी में रखवा दीं। उसमें फिग्स रिपोर्ट नहीं थी, जो ब्रिटिश सरकार की पहली पड़ताल थी। अलबत्ता उस रिपोर्ट का पूरा विवरण अस्सी के दशक से आम जानकारी में है।

‘गंगा-विलास’ यानी क्रूज़-क्रांति और उसके खतरे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार 13 जनवरी को जिस एमवी गंगा-विलास को हरी झंडी दिखाकर दुनिया के सबसे लंबी नदी-क्रूज यात्रा की शुरुआत की थी, उसे अपनी यात्रा के तीसरे दिन ही नकारात्मक खबरों का सामना करना पड़ा। 16 जनवरी को दिनभर इस आशय की खबरें छाई रहीं कि वाराणसी से चला क्रूज बिहार के छपरा में पानी उथला होने के कारण फँस गया। पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उसे वहां किनारे लगना था। सैलानियों को छपरा से 11 किमी दूर डोरीगंज बाजार के पास चिरांद के पुरातात्विक स्थलों का दौरा करना था।

यह खबर पूरी तरह सच साबित नहीं हुई। वास्तव में छपरा में किसी समस्या का सामना हुआ भी होगा, तो वह अल्पकालिक थी, क्योंकि यह पोत अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ गया। सरकार की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया कि यात्रा के दौरान जलस्तर बनाए रखा गया और यात्रा अपने कार्यक्रम के अनुसार चली। अलबत्ता डोरीगंज में पोत को किनारे लगाने के बजाय जब यात्रियों को नावों की मदद से उतारकर किनारे लाया गया, तो पोत के फँसने की खबर किसी ने दौड़ा दी। संभव है कि पोत के चालक दल को लगा हो कि किनारे पर पानी ज्यादा नहीं है, इसलिए धारा के बीच में ही पोत को बनाए रखा जाए। पर इसे फँसना तो नहीं कहा जा सकता है।

पर्यटन-संस्कृति

यात्रा में यह अप्रत्याशित व्यवधान था या नहीं, इसे लेकर कई प्रकार की राय हो सकती हैं, पर उसके पहले ही पर्यावरण, पर्यटन के सांस्कृतिक-दुष्प्रभाव और इसके कारोबार को लेकर तमाम सवाल उठाए जा रहे थे। दुनिया के सबसे लंबे रिवर-क्रूज़ के रूप में प्रचारित इस यात्रा के साथ देश की प्रतिष्ठा भी जुड़ी हुई है। देश के नदी जलमार्गों को विकसित करने की योजना से जुड़ी यह एक लंबी छलाँग है। पर इसे स्वीकृति दिलाने में समय लगेगा।  

Sunday, January 22, 2023

अर्थव्यवस्था की परीक्षा का समय


जनवरी का महीना आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है।
इस महीने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम का दावोस में समारोह होता है। इसके ठीक पहले ऑक्सफ़ैम की विषमता से जुड़ी रिपोर्ट आती है, जो परोक्ष रूप से इकोनॉमिक फोरम की विसंगतियों को रेखांकित करती है। विश्वबैंक का ग्लोबल आउटलुक जारी होता है। ये तीनों परिघटनाएं भारत से भी जुड़ी हैं। महीना खत्म होते ही भारत का बजट आता है, जिसमें अब केवल दस दिन बाकी हैं। यह वक्त है अर्थव्यवस्था की सेहत पर नजर डालने का और समझने का कि सामने क्या आने वाला है। दावोस में इकोनॉमिक फोरम के संस्थापक और कार्यकारी चेयरमैन क्लॉस श्वाब ने विभाजित दुनिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ की है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक संकट के बीच भारत एक ब्राइट स्पॉट है। भारत की जीडीपी वृद्धि दर साढ़े छह से सात प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो दुनिया के दूसरे देशों के लिए सपने जैसा है, फिर भी भारत को 4,256 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय की रेखा को पार करने में आठ-नौ साल लगेंगे जो विश्व बैंक की ऊपरी-मध्य आमदनी श्रेणी है। इसपर आज चीन, ब्राजील, मॉरिशस, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देश हैं। इतनी बड़ी जनसंख्या को देखते हुए फिर भी इसे संतोषजनक आर्थिक-स्तर मानेंगे। वैश्विक स्तर पर इस साल भी पिछले साल जैसी अनिश्चितताएं और जोखिम जारी हैं, जो हमारी अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रही हैं।

सबसे तेज अर्थव्यवस्था

विश्व बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपने ताजा अनुमान में कहा है कि  भारत सात सबसे बड़े उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा। चालू वित्त वर्ष 2022-23 में जीडीपी की संवृद्धि 6.9 फीसदी रहने का अनुमान है, जो अगले वित्त वर्ष (2023-24) में 6.6 और 2024-25 में 6.1 फीसदी रह सकती है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने जनवरी के पहले सप्ताह में चालू वित्त वर्ष के लिए राष्ट्रीय आय का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया। यह अत्यधिक महत्त्वपूर्ण आंकड़ा है क्योंकि इसी के आधार पर केंद्रीय बजट का प्रारूप तैयार करने की शुरुआत होती है। अग्रिम अनुमान इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे अगले वित्तीय वर्ष के बजट के लिए आवश्यक इनपुट के रूप में कार्य करते हैं। इस अनुमान के अनुसार वास्तविक संवृद्धि दर 7 प्रतिशत रह सकती है। क्षेत्र-वार विश्लेषण करें, तो सेवा क्षेत्र में तेज सुधार नजर आता है। उच्च इनपुट कीमतों और कमजोर बाहरी मांग के कारण विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में गिरावट नज़र आ रही है। आने वाले महीनों में जिंसों की कीमतों में कमी से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सहायता मिलने की संभावना है, लेकिन कमजोर बाहरी मांग लगातार दबाव बनाए रखेगी।

Thursday, January 19, 2023

विरोधी-एकता का एक और मोर्चा


तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) अब भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) है। गत बुधवार को तेलंगाना के खम्मम में हुई बीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव की रैली कई वजह से चर्चा में है। केसीआर ने राष्ट्रीय शक्ति के रूप में उभरने के अपने लक्ष्य के तहत पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में महत्वपूर्ण चुनावी उपस्थिति बनाने के लिए इसके सीमावर्ती शहर खम्मम को चुना। बीआरएस, तत्कालीन तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) 2018 में संयुक्त खम्मम जिले की 10 में से केवल एक विधानसभा सीट ही जीत सकी। बाद में कांग्रेस के छह और तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के दो विधायक बीआरएस में शामिल हो गए थे। चंद्रशेखर राव यहां अपना आधार बनाना चाहते हैं, ताकि पड़ोसी आंध्र प्रदेश में उनके कदम मजबूत करने में मदद देगा। साथ ही उनकी महत्वाकांक्षा राष्ट्रीय नेता बनने की भी है। दिल्ली के चैनलों पर आप आजकल तेलंगाना से जुड़े पेड कार्यक्रम देख रहे होंगे।

बुधवार को खम्मम में हुई रैली में के चंद्रशेखर राव के अलावा पिनाराई विजयन, अरविंद केजरीवाल, भगवंत, अखिलेश यादव और कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा शामिल हुए। एक तरह से 2024 के चुनाव के पहले विरोधी एकता का यह एक प्रयास है। रैली में समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा कि मोदी सरकार अब जाने वाली है। अब उसके पास केवल 399 दिन बचे हैं। अखिलेश ने बीजेपी पर विरोधी दलों को परेशान करने और किसानों के साथ छल करने का आरोप लगाया।

उन्होंने यह भी कहा कि बीआरएस अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव ने खम्मम की इस ऐतिहासिक धरती पर इतनी भारी भीड़ इकट्ठी की है और पूरे देश को एक संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश की जनता द्वारा भी अंततः सत्तारूढ़ भाजपा को खारिज किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘आज हम इतनी बड़ी संख्या में एकत्र हुए हैं। इस सभा के सामने, मैं कह सकता हूं कि अगर तेलंगाना में भाजपा को खारिज किया जा रहा है, तो उत्तर प्रदेश भी पीछे नहीं रहेगा।’

के चंद्रशेखर राव ने देश की जनता को आगाह किया कि हमें धार्मिक उन्माद से बचना होगा। देश भर में सभी सेक्युलर ताकतों को मिलकर भाजपा को सत्ता से हटाना होगा। बीआरएस के सत्ता में आने पर देशभर के किसानों को फ्री बिजली दिया जाएगा। प्रत्येक घर में शुद्ध पेय जल सुविधा दी जाएगी। इसके बाद देश में रायतुबंधु योजना लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत प्रत्येक किसान को दस हजार रुपए प्रति एकड़ प्रति वर्ष फ्री सहायता राशि दी जाएगी। केंद्र में सत्ता परिवर्तन होने पर अग्निपथ भर्ती योजना को समाप्त कर दिया जाएगा। साथ ही देश में प्रत्येक वर्ष पच्चीस लाख परिवारों को दलित बंधु सुविधा दी जाएगी। इस योजना में दलित युवा को दस लाख रुपए स्वरोजगार के लिए दिया जाएगा। कोई राशि सरकार को लौटानी नहीं होगी।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पहली बार कई मुख्यमंत्री इकट्ठा होकर काम कर रहे हैं, हम सब एक साथ बैठकर राजनीति की बातें नहीं करते हैं बल्कि देश में किसानों और मजदूरों के हालत को बेहतर बनाने पर विचार करते हैं। अगले वर्ष सभी को मिलकर भाजपा को उखाड़ फेंकना है। केजरीवाल ने कहा कि तेलंगाना के राज्यपाल यहां के मुख्यमंत्री केसीआर को तंग करते हैं, पंजाब के राज्यपाल भी मुख्यमंत्री भगवंत मान को तंग करते हैं, दिल्ली के एलजी मुझे तंग करते हैं, तमिलनाडु के राज्यपाल मुख्यमंत्री को तंग करते हैं, ये सभी राज्यपाल तंग नहीं कर रहे हैं, मोदी साहब तंग कर रहे हैं।

जिस देश का प्रधानमंत्री दिनभर यह सोचे कि किसे तंग करना है तो देश तरक्की कैसे करेगा। प्रधानमंत्री सोचते हैं कि कहां सीबीआई भेजनी है और कहां ईडी भेजना है, किस पार्टी का विधायक खरीदना है। इससे देश तरक्की नहीं कर सकता है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि भाजपा जुमला पार्टी है। दो करोड़ रोजगार का वादा, महंगाई हटाने का वादा, किसान की आय दोगुना करने का वादा जुमला साबित हुआ है।

केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार राज्य के अंतर्गत आने वाले विषयों पर भी बिना राज्य सरकार से सलाह लिए कानून में परिवर्तन कर रही है। अब केन्द्र सरकार ही कानून व्यवस्था, कृषि और बिजली जैसे राज्य सरकार के विषयों पर बिना राज्य सरकार की सलाह लिए कानून बना रही है। यह संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार है। राज्य सरकार के विधायी शक्ति को छीना जा रहा है। अब समय आ गया है कि हम सभी एकजुट होकर केन्द्र के इस रवैये का विरोध करें।

Wednesday, January 18, 2023

वैश्विक-घटनाक्रम में भारत की उत्साहवर्धक शुरुआत


 देस-परदेश

भारत की विदेश-नीति के लिहाज से साल की शुरुआत काफी उत्साहवर्धक है. जी-20 और शंघाई सहयोग संगठन की अध्यक्षता के कारण इस साल ऐसी गतिविधियाँ चलेंगी, जिनसे देश का महत्व रेखांकित होगा. इसकी शुरुआत वॉयस ऑफ ग्लोबल-साउथ समिट से हुई है, जिससे आने वाले समय की दिशा का पता लगता है.

यह भी सच है कि पिछले तीन-चार दशक के तेज विकास के बावजूद भारत अभी आर्थिक रूप से अमेरिका या चीन जैसा साधन-संपन्न नहीं है, फिर भी विकसित और विकासशील देशों के बीच सेतु के रूप में उसकी परंपरागत छवि काफी अच्छी है. सीमा पर तनाव के बावजूद भारत और चीन के बीच व्यापार 2022 में बढ़कर 135.98 अरब डॉलर के अबतक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. इसमें भारत 100 अरब डॉलर से ज्यादा के घाटे में है.

चीन का विकल्प

यह घाटा फौरन दूर हो भी नहीं सकता, क्योंकि वैकल्पिक सप्लाई-चेन अभी तैयार नहीं हैं. कारोबारों को चलाए रखने के लिए हमें इस आयात की जरूरत है. पिछले चार दशक में विश्व की सप्लाई चेन का केंद्र चीन बना है. इसे बदलने में समय लगेगा. अब भारत समेत कुछ देश विकल्प बनने का प्रयास कर रहे हैं. देखते ही देखते दुनिया में मोबाइल फोन का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादन भारत में होने लगा है.

पहले अमेरिका और अब जापान ने चीन को सेमीकंडक्टर सप्लाई पर पाबंदी लगाई है. जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा की पिछले हफ्ते अमेरिका-यात्रा के दौरान चीन को घेरने की रणनीति दिखाई पड़ने लगी है. स्पेस, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक वेहिकल्स, ऑटोमोबाइल्स, मेडिकल-उपकरणों, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर शस्त्र-प्रणालियों तक में सेमीकंडक्टर महत्त्वपूर्ण हैं.

Tuesday, January 17, 2023

राहुल की यात्रा से कांग्रेस को क्या मिलेगा?


महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर ध्वजारोहण के साथ इस महीने की 30 तारीख को राहुल गांधी की भारत-जोड़ो यात्रा का समापन हो जाएगा। इस यात्रा ने बेशक कांग्रेस-कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर पैदा की है। खासतौर से राहुल गांधी की पप्पू की जगह एक परिपक्व राजनेता की छवि बनाई है। उनके विरोधी भी मानते हैं कि जिस रास्ते से भी यात्रा गुजरी है, वहाँ के नागरिकों के मन में राहुल के प्रति सम्मान बढ़ा है। पर असल सवाल यह है कि क्या यह यात्रा कांग्रेस को चुनाव में सफलता दिला सकेगी? हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि यात्रा का उद्देश्य सत्ता-प्राप्ति नहीं है, पर इसमें दो राय नहीं कि जबतक चुनावी सफलता नहीं मिलेगी, सामाजिक-सामंजस्य की स्थापना संभव नहीं। कांग्रेस देश का  सबसे प्रमुख विरोधी दल है। 2019 में पार्टी ने 403 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे, जिनमें से केवल 52 को जीत मिली। 196 सीटों पर पार्टी दूसरे स्थान पर रही। उसे कुल 19.5 प्रतिशत वोट मिले। पार्टी 12 राज्यों में मुख्य विरोधी दल है। ये राज्य हैं पंजाब, असम, कर्नाटक, केरल, हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, गोवा, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और नगालैंड। इसका जिन सात राज्यों में बीजेपी से सीधा मुकाबला है, उनके नाम हैं-अरुणाचल, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड। इन सातों राज्यों में लोकसभा की 102 सीटें हैं। क्षेत्रीय दलों की राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपस्थिति नहीं है। वे 2024 में भी बीजेपी को नुकसान पहुँचाने की स्थिति में नहीं हैं। इस बात में संदेह है कि कांग्रेस 2024 में विरोधी एकता का केंद्र बन पाएगी। इसका ह्रास अस्सी के दशक में शुरू हो गया था। इसके सामने तीन समस्याएं हैं: उच्चतम स्तर पर निर्णय-प्रक्रिया और शक्ति का केंद्रीयकरण, संगठनात्मक कमजोरी और तीसरे, एकता की कमी। एक गैर-गांधी अध्यक्ष के चुनाव के बावजूद हाईकमान संस्कृति और गांधी परिवार की उपस्थिति बदस्तूर है। इसकी वजह से फैसले सबसे ऊँचे स्तर पर ही होते हैं। इस यात्रा से पार्टी में सुधार नहीं हो जाएगा। इंडियन एक्सप्रेस में पढ़ें सुधा पाई का लेख

विदेशी विश्वविद्यालयों का विरोध गलत

कुछ लोग विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में प्रवेश की अनुमति देने के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के प्रस्ताव से खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि विदेशी विश्वविद्यालयों को बहुत आसान और फायदा पहुंचाने वाली शर्तों पर बुलाया जा रहा है। इसका विरोध करने वाले लोग एकदम गलत हैं क्योंकि विश्वविद्यालय वही बेच रहे हैं, जिसकी लोगों को ज्यादा दरकार है – शिक्षा। छात्र अपने मां-बाप से पैसे लेकर या बैंक से कर्ज लेकर या दोनों लेकर इसे खरीदते हैं। इस अलग दिखने को ही स्थायी बौद्धिक श्रेष्ठता बताकर ब्रांडिंग की जाती है। लेकिन अलग दिखने यानी ज्यादा अंक लाने वाले लाखों लोग ही आगे जाकर जीनियस या प्रतिभाशाली बने हैं, इसके साक्ष्य नहीं के बराबर हैं। इसके बाद भी अगर आपने किसी विशेष विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल की है तो स्नातक में आपके अंक जो भी हों, आपको स्वत: ही बौद्धिक रूप से उन लोगों से बेहतर मान लिया जाता है, जो वहां से डिग्री नहीं ले सके हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड में टीसीए राघवन का लेख

भारत में बढ़ती विषमता

ऑक्सफ़ैम का अध्ययन संपत्ति कर को दोबारा शुरू करने का सुझाव देता है और इस बात को रेखांकित करता है कि ऐसे अवास्तविक लाभ से किस तरह का सामाजिक निवेश किया जा सकता है। अध्ययन बिना नाम लिए देश के सबसे अमीर व्यक्ति की संपत्ति का उल्लेख करता है और बताता है कि कैसे अगर 2017 से 2021 के बीच उनकी संपत्ति के केवल 20 फीसदी हिस्से पर कर लगाकर प्राथमिक शिक्षा को बहुत बड़ी मदद पहुंचाई जा सकती थी जिसके तमाम संभावित लाभ होते। यह उपाय तार्किक प्रतीत होता है लेकिन संपत्ति कर के साथ भारत के अनुभव बहुत अच्छे नहीं रहे हैं। पहली बार यह कर 1957 में लगाया गया था और बड़े पैमाने पर कर वंचना देखने को मिली थी। असमानता कम करने में इससे कोई खास मदद नहीं मिली थी। वर्ष 2016-17 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह कहते हुए इस कर को समाप्त कर दिया था कि इसे जुटाने की लागत इससे होने वाले हासिल से अधिक होती है। ऑक्सफ़ैम की रिपोर्ट पर बिजनेस स्टैंडर्ड का संपादकीय

आखिरकार अब्दुल रहमान मक्की पर भी संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध लगा


पाकिस्तानी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के  नायब अमीर अब्दुल रहमान मक्की का नाम संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकवादियों की सूची में शामिल कर लिया गया है। माना जाता है कि हाफ़िज़ सईद की ग़ैर मौजूदगी में अब्दुल रहमान मक्की ही लश्कर-ए-तैयबा का कामकाज देख रहा है। वह इस आतंकवादी संगठन में उप-प्रमुख है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 आईएसआईएस (दाएश) अल-क़ायदा प्रतिबंध कमेटी ने जिस सूची में मक्की का नाम शामिल किया है उसमें किसी व्यक्ति या संस्था के नाम को तब जोड़ा जाता है जब उसकी आतंक से जुड़ी गतिविधियों के पुख़्ता सबूत उपलब्ध हों। इस सूची में शामिल होने वाले की संपत्ति फ़्रीज़ कर दी जाती है, उन पर ट्रैवल बैन लगाया जाता है और किसी भी तरह से उन्हें हथियार मुहैया कराने पर रोक लगा दी जाती है।

16 जनवरी को मक्की का नाम इस सूची में शामिल करते हुए संयुक्त राष्ट्र की कमेटी ने सात आतंकवादी हमलों का हवाला दिया जिसमें साल 2000 में लाल क़िले पर हुआ हमला, 2008 में हुआ रामपुर हमला, 2008 में मुंबई मे हुआ 26/11 हमला और साल 2018 में गुरेज़ में हुए हमले को शामिल किया गया।

Sunday, January 15, 2023

‘ग्लोबल-साउथ’ की आवाज़ बनेगा भारत


गुजरे हफ्ते गुरुवार और शुक्रवार को हुए वॉयस ऑफ ग्लोबल-साउथ समिट ने दो बातों की तरफ ध्यान खींचा है। कुछ लोगों के लिए ग्लोबल-साउथ शब्द नया है। उन्हें इसकी पृष्ठभूमि को समझना होगा। भारत की विदेश-नीति के लिहाज से इसके महत्व को रेखांकित करने की जरूरत भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके उद्घाटन और समापन सत्रों को संबोधित किया। सम्मेलन में 120 से ज्यादा विकासशील देशों की शिरकत के साथ यह ग्लोबल-साउथकी सबसे बड़ी वर्चुअल सभा साबित हुई। इन देशों में दुनिया की करीब तीन-चौथाई आबादी निवास करती है। वस्तुतः पूरी दुनिया का दिल इन देशों में धड़कता है।

वैश्विक-संकट

यह सम्मेलन कोविड-19, जलवायु-परिवर्तन और वैश्विक-मंदी की पृष्ठभूमि के साथ आयोजित हुआ है। इन तीनों बातों की तपिश विकासशील देशों को झेलने पड़ी है, जबकि तीनों के लिए ग्लोबल साउथ के ये देश जिम्मेदार नहीं है। दूसरी तरफ वैश्विक-संकट गहरा रहा है। ऐसे में भारत समाधान देने और खासतौर से ग्लोबल साउथ यानी इन विकासशील देशों की आवाज़ बनने जा रहा है। इस वर्ष भारत जी-20 और शंघाई सहयोग संगठन का अध्यक्ष भी है, इस लिहाज से यह समय भी महत्वपूर्ण है। पिछले मंगलवार को इंदौर में संपन्न हुए 17वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक तरफ गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली और दूसरी तरफ सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी थे। यह पहल भारतवंशियों के मार्फत दुनिया से जुड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

विकासशील-आवाज़

शिखर सम्मेलन में विदेशमंत्री एस जयशंकर ने कहा कि विकासशील दुनिया की प्रमुख चिंताओं को जी-20 की चर्चाओं में शामिल नहीं किया जा रहा है। कोविड-19, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, कर्ज-संकट और रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान तलाशने में विकासशील देशों की जरूरतों को तवज्जोह नहीं दी गई। हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जी-20 में भारत की अध्यक्षता के दौरान विकासशील देशों की आवाज, मुद्दे, दृष्टिकोण और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताएं सामने आएं। इस पूरी परियोजना के साथ भू-राजनीति से जुड़े मसले हैं, जो यूक्रेन-युद्ध और दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के रूप में नजर आ रहे हैं।

व्यापक दायरा

सम्मेलन का फलक काफी व्यापक था। इसके व्यावहारिक-प्रतिफल भी सामने आए हैं। सम्मेलन में कुल दस सत्र हुए, जिनमें वित्तीय-परिस्थितियों, ऊर्जा, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े सत्र महत्वपूर्ण थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट के समापन सत्र में कहा कि नए साल की शुरूआत एक नई आशा का समय है। विकासशील देश ऐसा वैश्वीकरण चाहते हैं, जिससे जलवायु संकट या ऋण संकट उत्पन्न न हो, जिसमें वैक्सीन का असमान वितरण न हो, जिसमें समृद्धि और मानवता की भलाई हो। उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक 'ग्लोबल साउथ सेंटर ऑफ एक्सेलेंस' स्थापित करेगा। उन्होंने एक नए प्रोजेक्ट 'आरोग्य मैत्री' की जानकारी भी दी। इसके तहत भारत प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट का सामना कर रहे विकासशील देशों को मेडिकल सहायता उपलब्ध कराएगा। विकासशील देशों के छात्रों के लिए भारत में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए ग्लोबल साउथ स्कॉलरशिप भी शुरू होगी।

बदलती भूमिका

आर्थिक-विकास और कल्याणकारी-व्यवस्था की पहली शर्त है विश्व-शांति। इस परियोजना के साथ आर्थिक और डिप्लोमैटिक दोनों पहलू जुड़े हैं। संयुक्त राष्ट्र समेत सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भारत की भूमिका बढ़ रही है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा में हम केंद्रीय-भूमिका निभाने जा रहे हैं। शिखर-सम्मेलन में चीन की भागीदारी से जुड़े कुछ सवाल भी उठे हैं। चीन की प्रत्यक्ष भागीदारी इसमें नहीं थी, अलबत्ता चीनी विदेश-मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने गुरुवार को संवाददाताओं को बताया कि भारत ने हमें इस सम्मेलन के बारे में सूचना दी थी। भारत ने चीन को जानकारी क्यों दी, इसे भी विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत का जी-20 से जुड़े मसलों पर अन्य देशों के साथ मजबूत सहयोग है। यह उस विचार के तहत है कि हमने उस प्रत्येक देश से परामर्श किया, जिसके साथ हमारी मजबूत विकास साझेदारी है। बदलते वैश्विक-परिप्रेक्ष्य में भारत की इस भूमिका को विशेषज्ञों ने प्रशंसा की नज़रों से देखा है।

Saturday, January 14, 2023

चीन के साथ व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर के पार


भारत और चीन के बीच व्यापार 2022 में बढ़कर 135.98 अरब डॉलर के अबतक के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 100 अरब डॉलर के पार हो गया। चीन के सीमा शुल्क विभाग के शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार भारत-चीन व्यापार 2022 में 8.4 प्रतिशत बढ़कर 135.98 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार 2022 में देश ने कोविड-19 के कारण आई सारी बाधाओं को पार करते हुए 5.96 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार किया।

Friday, January 13, 2023

जोशीमठ : 2-3 जनवरी की रात आखिर क्या हुआ?


जोशीमठ में घर और जमीन धँसने का सिलसिला जारी है। 12 जनवरी को जोशीमठ के सिंहधार इलाके में एक नई जगह से जमीन से पानी फट पड़ा। यहां भय का माहौल बढ़ता जा रहा है, लेकिन इन सब के बीच लोगों के जहन में अभी भी यह सवाल बना हुआ है कि दो-तीन जनवरी की रात अचानक ऐसा क्या हुआ कि उनके घरों में आई हल्की दरारें न केवल चौड़ी हो गई, बल्कि दो होटल सहित कई घर झुक भी गए। डाउन टु अर्थ में पढ़ें राजू सजवान की पूरी रिपोर्ट

विफल क्यों रहती हैं भारत-पाक वार्ताएं?

इस हफ्ते की शुरुआत में, पाकिस्तानी स्तंभकार हामिद मीर और जावेद चौधरी ने बताया कि 2018 की गुप्त बैठकों ने इतिहास के पाठ्यक्रम को लगभग बदल दिया. अप्रैल 2021 में हिंगलाज माता मंदिर की तीर्थ यात्रा के बाद, उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ मिलना था और कश्मीर में यथास्थिति को बनाए रखने के लिए एक डील की घोषणा करनी थी. राजनीतिक प्रतिक्रिया के डर से खान के समझौते से पीछे हटने के बाद शिखर सम्मेलन की योजना ध्वस्त हो गई. इन नाटकीय खुलासों पर न तो इस्लामाबाद और न ही नई दिल्ली की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है. इसके अलावा, बताई गई बातों के बारे में संदेह होने के बहुत सारे कारण हैं, जो कि जनरल बाजवा द्वारा आयोजित ब्रीफिंग पर काफी हद तक निर्भर करते हैं. दिप्रिंट में पढ़ें प्रवीण स्वामी का रोचक आलेख। इसके साथ प्रवीण स्वामी का एक और लेख पढ़ें दिल्ली में अपना प्रतिनिधि रखना चाहते हैं तालिबान

जीडीपी अनुमानों के आंकड़ों की खामियां

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) किसी भी एक वर्ष के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के वार्षिक आकार का अनुमान निकालने की प्रक्रिया छह बार दोहराता है। ये आंकड़े 36 महीने यानी तीन साल की अवधि में जारी किए जाते हैं। उसी वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) संख्या के अनुमान की पहली और अंतिम दोहराई गई प्रक्रिया के बीच की तुलना करने पर कई महत्त्वपूर्ण अंतर सामने दिखने लगते हैं। कुछ वर्षों में यह अंतर पहली बार में ही अधिक अनुमान के रूप में दिखता है जबकि अन्य दोहराई गई प्रक्रिया में अनुमानों का आंकड़ा कम हो जाता है। उदाहरण के तौर पर पहले अग्रिम अनुमान (एफएई) के अनुसार वर्ष 2016-17 में भारत के जीडीपी में वास्तविक वृद्धि 7.1 प्रतिशत थी। लेकिन तीसरे संशोधित अनुमान के माध्यम से उस संख्या की छठी और अंतिम पुनरावृत्ति के मुताबिक वर्ष 2016-17 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत थी। वर्ष 2017-18 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था, हालांकि संशोधित अनुमानों के अंतर का दायरा छोटा था और यह पहले अनुमान के 6.5 प्रतिशत से बढ़कर अंतिम चरण के दौरान 6.8 प्रतिशत तक हो गया। बिजनेस स्टैंडर्ड में एके भट्टाचार्य का लेख

 

Thursday, January 12, 2023

भारत में विश्वकप हॉकी प्रतियोगिता

बिरसा मुंडा हॉकी स्टेडियम

हालांकि भारतीय मीडिया की निगाहें अपने कथित राष्ट्रीय खेल हॉकी पर नहीं हैं, पर खबर यह है कि ओडिशा के राउरकेला और भुवनेश्वर में
13 से 29 जनवरी तक 15वें पुरुष हॉकी विश्वकप का आयोजन हो रहा है। प्रतियोगिता का औपचारिक उद्घाटन 11 जनवरी को हो भी गया है। इस विश्व कप के लिए स्टील सिटी के नाम से मशहूर राउरकेला में आदिवासी क्रांतिकारी बिरसा मुंडा के नाम पर स्टेडियम का खासतौर से निर्माण किया गया है, जो भारत का सबसे बड़ा हॉकी स्टेडियम है। इसके निर्माण के लिए सरकार ने 120 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था. इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन ने हॉकी विश्व कप के आयोजन के लिए दो स्टेडियम की अनिवार्यता रखी थी. जिसे देखते हुए बिरसा मुंडा इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम का निर्माण किया गया। बीबीसी हिंदी पर पढ़ें विशेष रिपोर्ट

कितना बदल गया हॉकी का खेल

2018 में भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में कट्टर प्रतिद्वंद्वियों और तीन बार के चैंपियन नीदरलैंड के खिलाफ खेलते हुए बेल्जियम ने अपना पहला हॉकी खिताब ‘पुरुष हॉकी विश्व कप’ जीता था। 2014 में फेडरेशन इंटरनेशनेल डी हॉकी (FIH) द्वारा अनिवार्य किए गए नए नियमों के लागू होने के बाद यह चौथा विश्व कप है। तब से यह भारत में होने वाला तीसरा टूर्नामेंट भी है। हॉकी के FIH नियम ओलिंपिक या विश्व कप के बाद हर दो साल में अपडेट किए जाते हैं। नीदरलैंड के हेग में 2014 विश्व कप से पहले संबंधित कमेटी ने उस साल के बाद लागू किए जाने वाले बदलावों की एक सूची की घोषणा की थी, जो यकीनन 1992 में ऑफसाइड नियम की समाप्ति के साथ-साथ 1970 के दशक में एस्ट्रोटर्फ पिचों के आगमन के प्रभाव को दर्शाता है। दिप्रिंट में नए नियमों के बारे में दी गई जानकारी को पढ़ें

चीनी-युक्त खाद्य-सामग्री रोकने का सुझाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनिया के देशों को मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें में सुझाया गया है कि स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने के लिए दुनिया के देश किस तरह राजकोषीय नीतियां तैयार कर सकते हैं। दिशानिर्देशों के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से पर फिलहाल मंत्रणा चल रही है। विकासशील देशों सहित पूरी दुनिया में आवश्यकता से अधिक चीनी का इस्तेमाल मधुमेह (टाइप 2 डायबिटीज) का एक प्रमुख कारण माना जाता है। कार्बन युक्त पेय पदार्थ (कार्बोनेटेड ड्रिंक्स), एनर्जी ड्रिंक्स़, फलों के रस ये सभी एसएसबी की श्रेणी में रखे गए हैं। मधुमेह जीवन-शैली से जुड़ा रोग है जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विशेषकर, उन देशों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है जहां मधुमेह की बीमारी तेजी से फैल रही है। डब्ल्यूएचओ के अनुमान के अनुसार खराब गुणवत्ता वाले, अति प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ पूरी दुनिया में धूम्रपान से भी अधिक संख्या में लोगों को लील रहे हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड में पढ़ें संपादकीय

 

Wednesday, January 11, 2023

क्रिकेट-विश्वकप-23 और भारत की कहानी

विश्वकप क्रिकेट-1987

 देस-परदेश

भारत में क्रिकेट राष्ट्रीय-भावनाओं के साथ जुड़ गया है. एक समय तक हम हॉकी को राष्ट्रीय खेल मानते थे. वह सम्मान अब भी अपनी जगह होगा, पर क्रिकेट ने कहानी बदली दी है. भारत में इस साल हॉकी और क्रिकेट दोनों की विश्वकप प्रतियोगिताएं होने वाली हैं. आप दोनों की कवरेज के फर्क से इस बात का अनुमान लगा लीजिएगा.  

हॉकी विश्वकप आज से तीन दिन बाद 13 जनवरी से शुरू हो रहा है. मीडिया ने कितनी जानकारी आपको दी? ऐसा तब है, जब हाल के वर्षों में भारतीय हॉकी टीम ने अपनी बिगड़ी कहानी को काफी हद तक सुधारा है. ओलिंपिक-कांस्य तक पहुँच गए हैं. उम्मीद जगाई है, ओडिशा जैसे राज्य ने, जहाँ हॉकी का इंफ्रास्ट्रक्चर बना है.

हो सकता है कि आने वाले समय में कॉरपोरेट जगत हॉकी की मदद में भी आगे आएं. फिलहाल हमारी दिलचस्पी हॉकी और क्रिकेट की तुलना करने में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय-जीवन में खेल की भूमिका में है. बैडमिंटन, कुश्ती, बॉक्सिंग और आर्चरी जैसे खेलों का भी यह उदयकाल है.

विश्वकप फुटबॉल

हाल में क़तर में हुई विश्वकप फुटबॉल प्रतियोगिता के दौरान मोरक्को की टीम के सेमीफाइनल तक पहुँचने पर मुस्लिम देशों, खासतौर से अरब देशों में उत्साह की लहर देखी गई. क्रिस्टियानो रोनाल्डो की टीम पुर्तगाल को हराने के बाद मोरक्को वर्ल्ड कप के सेमीफ़ाइनल तक पहुँचने वाला पहला अफ़्रीकी अरब देश बना था. प्रतियोगिता के आयोजक देश कतर को भले ही सफलता नहीं मिली, पर उसका आयोजन शानदार था. अलबत्ता सेनेगल, ट्यूनीशिया, ईरान और सऊदी अरब ने भी किसी न किसी रूप में अच्छा प्रदर्शन किया. 

अब तक इन अफ्रीकी-अरब देशों के खिलाड़ी यूरोपियन टीमों में शामिल होकर उनका गौरव बढ़ाते रहे हैं, पर लगता है कि अब एक नया चलन शुरू होने जा रहा है. विश्वकप जीतने का सपना टूटने के कुछ सप्ताह बाद पुर्तगाल के कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने यूरोपीय फ़ुटबॉल क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड छोड़कर, सऊदी अरब के 'अल-नस्र' से नाता जोड़ लिया है.

सऊदी अरब का सपना

अल नस्र और रोनाल्डो के बीच हुआ क़रार अब तक का सबसे महंगा सौदा बताया जा रहा है. अल-नस्र 2025 तक हर साल रोनाल्डो को क़रीब 1800 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा. रोनाल्डो का सऊदी अरब पहुँचना बड़े बदलाव का संकेत है.

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान क़तर विश्व कप के दौरान फीफा के प्रमुख जीवी इनफ़ैंन्तिनो के साथ कई बार नज़र आए थे. वे अपने देश को आधुनिक बना रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने विज़न-2030 के नाम से पूरा एक कार्यक्रम बनाया है. इस कार्यक्रम में खेलों को भी शामिल किया गया है. क्राउन प्रिंस मानते हैं कि पश्चिम एशिया अब नया यूरोप बनेगा. अब आप आएं भारत की ओर.

क्रिकेट विश्वकप

ब्रिटिश पत्रिका इकोनॉमिस्ट हर साल नवंबर के दूसरे सप्ताह में एक विशेष अंक का प्रकाशन करती है, जिसका नाम होता है द वर्ल्ड अहैड. इसमें आने वाले वर्ष की संभावित-प्रवृत्तियों और घटनाओं का अनुमान किया जाता है. इस साल के द वर्ल्ड अहैड-2023 में भारत को लेकर तीन आलेख हैं. एक नरेंद्र मोदी की 2024 में विजय-संभावनाओं पर, दूसरा अर्थव्यवस्था पर. तीसरे का शीर्षक है, द क्रिकेट वर्ल्ड कप इन इंडिया इन 2023 विल बी मोर दैन जस्ट अ गेम.