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Wednesday, April 8, 2026

अब अंतरिक्ष में वर्चस्व की चीन-अमेरिका दौड़


अमेरिका ने 2 अप्रैल को चंद्रमा की परिक्रमा करने के लिए आर्टेमिस 2 यान भेजा है, जिसमें चार यात्री सवार है. 54 वर्षों में यह पहली मानवयुक्त चंद्र उड़ान है, जो चंद्रमा के चक्कर लगाकर 10 अप्रैल को पृथ्वी पर लौटेगी.

यह यान एक बार फिर से मनुष्य को चंद्रमा पर उतारने की तैयारी में गया है. उधर चीनी अंतरिक्ष एजेंसी (सीएनएसए) को उम्मीद है कि वह 2030 तक अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतार देगी. चीन पहले ही कई रोबोट चंद्रमा पर भेज चुका है और चंद्र नमूने वापस ला चुका है. 

ये दो समांतर यात्राएँ केवल चंद्रमा तक पहुँचने के लिहाज से महत्त्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि भविष्य के अंतरिक्ष-अनुसंधान में वर्चस्व की कहानी लिखने वाली हैं. पाँच दशक पहले के चंद्र मिशन अमेरिका और सोवियत संघ के बीच श्रेष्ठता की होड़ का हिस्सा थे. यह स्पर्धा अब चीन और अमेरिका के बीच है.

आर्टेमिस 2 का लॉन्च ऐसे वक्त में हुआ है, जब ईरान की लड़ाई चल रही है. पर्यवेक्षक मानते हैं कि इस रेस का आग़ाज़ करके अमेरिका अपने वर्चस्व की याद दिलाना चाहता है. वहीं कुछ मानते हैं कि चीन साबित करना चाहता है कि यह अमेरिकी पराभव का प्रारंभ है.

चंद्रमा का महत्त्व

आर्टेमिस मिशन में भारत सहित 50 से अधिक देश शामिल हैं. इसकी टीम अगले दो वर्षों में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की खोज करने के लिए प्रारंभिक कार्य करने का इरादा रखती है. इस इलाके में पानी है और बर्फ के भंडार भी. इससे ऑक्सीजन और हाइड्रोजन का उत्पादन करके रॉकेटों के लिए ईंधन तैयार किया जा सकता है.

आर्टेमिस मिशन के यात्री 2028 में चंद्रमा पर उतरने से पहले जीवन-सहायता प्रणालियों और नेवीगेशन क्षमताओं का परीक्षण करेंगे. इस काम में वे चीन के लक्ष्य से दो साल आगे हैं. चीन का लक्ष्य 2030 में चंद्रमा पर अपने यात्रियों को उतारने का है.

Wednesday, December 2, 2020

चीनी यान चंद्रमा पर उतरा

चीन की समाचार एजेंसी शिनह्वा ने चंद्रमा की सतह पर उतरे अपने यान की यह तस्वीर जारी की है।

चीन ने मंगलवार 1 दिसंबर को अपना यान चंद्रमा पर उतारने में सफलता हासिल कर ली है। चीन ने चैंग ई-5 यान का प्रक्षेपण गत 24 नवंबर को किया था। यह यान चंद्रमा की सतह से वहाँ के नमूने लेकर धरती पर वापस आएगा। पौराणिक आख्यान में चैंग ई को चंद्रमा की देवी माना जाता है। यह मिशन चंद्रमा की सतह पर लावा के बने क्षेत्र ओशनस प्रोसीलैरम यानी तूफानों का सागर पर उतरा है, जहाँ इसके पहले धरती का कोई यान नहीं उतरा था। यह चंद्रमा से करीब दो किलोग्राम सामग्री लेकर वापस आएगा।

यह मिशन पूरा होने के बाद चीन ऐसा तीसरा देश होगा, जिसे चंद्रमा की सतह से नमूने धरती पर लाने में सफलता मिली होगी। इसके पहले अमेरिका और सोवियत संघ को इस काम में सफलता मिली है। चंद्रमा की सतह पर उतरने वाले वाहन की रोबोटिक भुजा सतह पर ड्रिलिंग करेगी और उससे प्राप्त सामग्री को वापस जाने वाले वाहन में रखेगी। यह वाहन वापस उड़ान भरेगा और चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहे वाहन से जुड़ेगा, जो पृथ्वी पर वापस आएगा।