Friday, June 19, 2026

पहाड़ के जलस्रोत

प्यास बुझाते हुए: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में रानीधारा नौला पर स्थित एक आउटलेट से स्कूली बच्चे 
अपनी बोतलों में पानी भर रहे हैं।

रविवार 24 मई के हिंदू में मुझे कुमाऊँ के नौलों (जल मंदिरों) पर एक फीचर देखने को मिला, तो अचानक कुछ पुरानी खुशबुओं के साथ यादें ताज़ा हो उठीं। 1961 की गर्मियों में मेरा नौलों, धारों और स्रोतों से पहला परिचय हुआ था।

1961 की गर्मियों में मुझे पहली बार कुमाऊँ के पहाड़ देखने का मौका मिला। अपनी दादी के साथ पहले मैं रानीखेत आया। चाचा के घर कैंटूनमेंट में मॉल रोड पर बने के डबल डेकर घर में रहना एक नया अनुभव था। उस वक्त हम मथुरा में रहते थे। लंबे अरसे तक मैं बीमारियों से घिरा रहा, इसलिए मेरे बाबू ने सोचा पहाड़ जाकर कुछ समय रहने से सेहत में सुधार होगा।

मथुरा के कैंट स्टेशन से हम आगरा फोर्ट एक्सप्रेस पर बैठे, जिसने अगली सुबह हमें काठगोदाम पहुँचाया। वहाँ से उत्तर प्रदेश रोडवेज़ की बस से रानीखेत। रानीखेत का घर चीड़ के पेड़ों से घिरा हुआ था। हरेक सुबह घर के नीचे वाली सड़क से होकर सेना के जवान कवायद करते हुए परेड ग्राउंड की ओर जाते थे, आल्मा ग्राउंड। शाम को लौटते।

Thursday, June 18, 2026

अमेरिका और ईरान के 14-सूत्री समझौते का पाठ

अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को जिस समझौता ज्ञापन पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, उसमें 60 दिनों के विस्तारित युद्धविराम की शर्तें निर्धारित की जाएँगी, जिससे आगे की बातचीत के लिए समय मिल सकेगा।

14-सूत्री समझौते के पुराने पाठ के कुछ मीडिया आउटलेट्स में लीक होने के कुछ घंटों बाद, एक वरिष्ठ अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी ने ज्ञापन पढ़कर सुनाया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से और बिना किसी शुल्क के फिर से खोलने और ‘लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों की समाप्ति’ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई प्रतिबद्धताओं की रूपरेखा दी गई है।

समझौते में कहा गया है कि ईरान कभी नाभिकीय-अस्त्र विकसित नहीं करेगा। यह वादा ईरान ने पहले भी किया है। समझौते में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और ईरान, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षकों की देखरेख में, ईरान के मौजूदा संवर्धित पदार्थों के भंडार को ‘साइट पर ही कम से कम करने की पद्धति’ से नष्ट करेंगे।

इस समझौते से संकेत मिलता है कि तेहरान को ईरान के ‘पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास’ के लिए 300 अरब डॉलर के विकास कोष का लाभ मिल सकता है, बशर्ते वह अंतिम समझौते में निर्धारित प्रतिबद्धताओं को पूरा करे। वार्ता में ईरान पर लगे सभी अमेरिकी प्रतिबंधों को ‘सहमत समय-सारणी के अनुसार’ हटाने की योजना भी तय की जाएगी।

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिकी टीम ईरान के साथ हुए समझौते और उससे अपेक्षित अपेक्षाओं को लेकर पूरी तरह से सचेत है, और ज़रूरत पड़ने पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं। अधिकारी ने कहा, ‘अगर ईरान वाकई में वह सब करेगा, जो वह कह रहा है...तो यह एक ज़बरदस्त समझौता होगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘आप कह सकते हैं कि समझौता ज्ञापन अंतिम है... लेकिन जब तक कोई पूर्ण और बाध्यकारी समझौता नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्षों में से कोई भी किसी भी समय इससे पीछे हट सकता है।’ 

14-सूत्री समझौता ज्ञापन इस प्रकार है:

1— संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान तथा वर्तमान युद्ध में उनके सहयोगी इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों की तत्काल और स्थायी समाप्ति की घोषणा करते हैं, और वचन देते हैं कि वे अब से एक-दूसरे के विरुद्ध कोई युद्ध या सैन्य अभियान शुरू नहीं करेंगे, एक-दूसरे के विरुद्ध बल प्रयोग या धमकी से बचेंगे तथा लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता सुनिश्चित करेंगे। अंतिम समझौता लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की स्थायी समाप्ति तथा इस अनुच्छेद के अन्य प्रावधानों की पुष्टि करेगा।

मायने का वायदा


अक्सर जब मैं लिखता हूँ, कुछ शब्द अटकते हैं। बहुत से तो इस समय याद नहीं आ रहे हैं, दो पर ध्यान गया है। एक है वायदा और दूसरा मायने। दोनों को वादा और माने या मानी भी लिखा जाता है। फिल्मी गीत है, जो वादा किया, वो निभाना पड़ेगा। वहीं गुड़ के वायदा बाजार में उतार-चढ़ाव आता रहता है। सभी प्रचलन में हैं, पर जैसे ही लिखने का समय आता है, मन पूछता है कि सही क्या है?

वायदा

हिंदी शब्दसागर में वायदा शब्द नहीं, वादा मिला। वृहत् हिंदी कोश में भी वायदा नहीं, वादा मिला, जो अरबी मूल का शब्द माना गया है। शब्दसागर के अनुसार, वादा vādā संज्ञा पुं॰ [अ॰ वाइदह] (१) नियत समय या घड़ी। यानी यह अरबी मूल का शब्द है। वहीं इस कोश में एक और शब्द है, वादाशिकनी vādāśikanī [संज्ञा स्त्री] [फ़ा॰] प्रतिज्ञा भंग। वादखिलाफी [को॰], जो फारसी मूल का शब्द है। वर्धा के शब्दकोश में, वायदा (फ़ा.) [सं-पु.] 1. वचन; इकरार; वादा 2. प्रतिज्ञा। वहाँ वादा भी है। वादा (अ.) [सं-प.] 1. वचन; प्रतिज्ञा; इकरार; (प्रॉमिस) 2. कर्ज अदा करने का वक्त। फर्क केवल फ़ारसी और अरबी का है। मैंने और ज्यादा कोश नहीं देखे, अलबत्ता लगता है कि विलंब से वायदा शब्द को हिंदी में स्वीकार कर लिया गया है।

मायने

हिंदी शब्दसागर में मायने शब्द नहीं, माने मिला। माने mānē संज्ञा पुं॰ [अं॰ मानी] अर्थ। मतलब। आशय। वृहत् हिंदी कोश में माने और मायने दोनों नहीं मिले। मानी मिला, मतलब, अभिप्राय और हेतु के अर्थ में। संस्कृत मूल के अर्थ में स्वाभिमानी, नापने का पात्र, चक्की के ऊपर वाले पाट की लकड़ी वगैरह हैं। मराठी शब्द रत्नाकर में मायना मिला। वहाँ भी मानी का अर्थ स्वाभिमानी है। वर्धा को कोश में भी मानी का मतलब स्वाभिमानी, चक्की और कुदाल के बेंट  वगैरह है। उसमें माने या मायने नहीं है।

 

Wednesday, June 17, 2026

नेटक्रांति के सांस्कृतिक-राजनीतिक निहितार्थ


करीब एक दशक पहले नए दौर का सूत्र था नेट-साक्षरता। यानी इंटरनेट पटु होना सामान्य साक्षरता का हिस्सा बना। सिद्धांत थी कि जो इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाएगा वही सजग नागरिक है। वजह साफ थी। जीवन से जुड़ा ज्यादातर कार्य-व्यवहार इंटरनेट के मार्फत होने लगा था। इसका व्यावसायिक महत्व बढ़ा। इस तकनीक ने जीवन को पारदर्शी बनाया और लोकतंत्र को सार्थक बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान किया।

नेट के विस्तार के साथ-साथ कुछ अंतर्विरोधी बातें भी सामने आई हैं, जिनके बीज पत्रकारिता के करीब चार सौ से ज्यादा वर्षों के इतिहास में भी देखे जा सकते हैं। इसकी वजह दो बातें हैं, तकनीक और पूँजी। इंटरनेट की सार्वजनिक जीवन में भूमिका होने के बावजूद इसका विस्तार निजी पूँजी की मदद से हो रहा है। निजी पूँजी मुनाफे के लिए काम करती है।

सूचना-प्रसार केवल व्यावसायिक गतिविधि नहीं है। वह लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था है। जानकारी पाना या देना, कनेक्ट करना और जाग्रत विश्व के संपर्क में रहना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इंटरनेट के सहारे यह काम आसानी से हो सकता है।

Tuesday, June 16, 2026

मतदाता, नागरिकता और ‘डेमोग्राफिक चेंज’


गत 8 जून को ‘इंडिया गठबंधन ने पाँच-सूत्री प्रस्ताव पारित किया, जिसमें एक यह भी है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा जाएगा। यह गठबंधन एसआईआरको ‘वोट चोरी’ मानता है। इसके कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को लेकर चुनाव-आयोग को क्लीन-चिट दी है। प्रश्न है कि ऐसे में पत्र लिखने से मिलेगा क्या? यह व्यक्तिगत मसला नहीं है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का कहना है, हम इसे ‘वोट लूट’ की कोशिश मानते हैं। भारत में घुसपैठ और नागरिकता रजिस्टर पिछले कई दशकों से बहस में हैं और यह बहस अब मतदाता सूची की बहस के साथ जुड़ गई है। एसआईआर के देश में दो दौर हो चुके हैं और तीसरा शुरू हो गया है। पहला दौर मुख्यतः बिहार-केंद्रित था, जो जून से सितंबर 2025 तक चला। 27 अक्तूबर से दूसरा दौर शुरू हुआ, जिसमें उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत, नौ राज्य और तीन केंद्र-शासित क्षेत्र शामिल थे।

गत 14 मई को निर्वाचन आयोग ने एसआईआर के तीसरे दौर की भी घोषणा कर दी, जिसमें सोलह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया गया है। इसके पूरा होने के बाद जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश को छोड़कर पूरे देश में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके साथ इस प्रक्रिया से जुड़ी बहस नए सिरे से शुरू होगी, जिसकी अनुगूँज संसद के मॉनसून सत्र में सुनाई पड़ेगी।