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फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ वेलिकोविच।
डॉनल्ड ट्रंप के परिवार से जुड़ी अमेरिकी ड्रोन कंपनी पावरयूएस ने पाकिस्तानी सेना के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत वह ड्रोन और उनसे जुड़ी तकनीक पाकिस्तानी सेना को प्रदान करेगी। कंपनी के को-फाउंडर ब्रेट वेलिकोविच ने बुधवार 16 सितंबर को समाचार एजेंसी रॉयटर्स को यह जानकारी दी।
वेलिकोविच ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस बारे में विस्तार से जानकारी देने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने बताया कि यह डील 'अनमैन्ड एरियल सिस्टम' यानी बिना पायलट वाले हवाई सिस्टम की श्रेणी में आती है। वेलिकोविच ने कहा, ‘लक्ष्य है एक संयुक्त प्रौद्योगिकी संबंध स्थापित करना, जिसमें अमेरिका की सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी को पाकिस्तान की सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ा जाएगा।’
पावरयूएस ने 17
सितंबर को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया, ‘पावरयूएस को पाकिस्तान के रक्षा
मंत्रालय से मानवरहित हवाई प्रणालियों और संबंधित सहायक उपकरणों के लिए एक सीमित
खरीद आदेश प्राप्त हुआ है। यह आदेश हमारे अंतरराष्ट्रीय रक्षा व्यवसाय के विस्तार
का प्रतीक है’। कंपनी की वैबसाइट
के अनुसार, उसके इंटरसेप्टर
परिवार का विकास तीन पीढ़ियों में हुआ है: गार्डियन 1 (मैनुअल), गार्डियन-2 (अर्ध-स्वायत्त संचालन) और
गार्डियन-3 (फायर-एंड-फॉर्गेट इकोसिस्टम)।
पावरयूएस को
इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय से मानवरहित हवाई प्रणालियों और
संबंधित सहायक उपकरणों के लिए एक सीमित खरीद आदेश प्राप्त हुआ है। यह आदेश हमारे
अंतरराष्ट्रीय रक्षा व्यवसाय के विस्तार का प्रतीक है।
पावरयूएस, फौजी और
औद्योगिक इस्तेमाल वाले एरियल और समुद्री मैरीटाइम ड्रोन बनाती है। उसका ‘ऑरियस ग्रीनवे होल्डिंग्स’ नाम की एक कंपनी में विलय होने वाला है। इस कंपनी को अमेरिकी राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप के दो बेटों का समर्थन हासिल है। रॉयटर्स के मुताबिक पाकिस्तान की
सेना ने 16 सितंबर को बताया कि वेलिकोविच के नेतृत्व में पावरयूएस के एक
प्रतिनिधिमंडल ने फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर से मुलाकात की और रक्षा खरीद,
उत्पादन और लंबे समय के लिए क्षमता
बढ़ाने पर चर्चा की। सेना के बयान में समझौता ज्ञापन का कोई जिक्र नहीं था।
कंपनी के संस्थापक
और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंड्रयू फॉक्स ने कहा है कि पाकिस्तान का निजी रक्षा
क्षेत्र ‘उभरता हुआ’ है और अभी ‘परिपक्व’ नहीं हुआ है, जिससे अमेरिका को अपनी कंपनियों के लिए अधिक अवसर
मिलेंगे। वेलिकोविच ने कहा, ‘कई
दशकों से अमेरिकी सरकार पाकिस्तान जैसे देशों को ड्रोन सिस्टम उपलब्ध कराने के
खिलाफ रही है, जबकि चीन ने यहाँ
के लोगों की हर माँग को बिना किसी रोक-टोक के पूरा किया है। लेकिन अब हम अमेरिकी
नीति में एक तरह की जागरूकता देख रहे हैं, जिसके तहत हम अपने ड्रोन सिस्टम को अधिक साझा करने के लिए तैयार हैं।’
पिछले साल दिसंबर
में, अमेरिका ने पाकिस्तान के
एफ-16 लड़ाकू विमानों के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी और समर्थन बेचने के लिए 68.6 करोड़
डॉलर के एक बड़े हथियार सौदे को मंजूरी दी थी।
पाकिस्तान की पावरयूएस
में दिलचस्पी मई 2025 में भारत के साथ हुई चार दिवसीय झड़प के बाद पैदा हुई है,
जिसमें दोनों देशों ने ड्रोन का
इस्तेमाल आक्रमणकारी हथियारों के रूप में किया था। भारत ने टोही, निगरानी और सटीक हमलों के लिए ड्रोन का
इस्तेमाल किया था। खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान, पावरयूएस की गार्डियन इंटरसेप्टर लाइन खरीदने पर विचार कर रहा है,
जिसे एकतरफा हमले करने वाले ड्रोनों
का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
फाइनेंशियल टाइम्स
की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह
कंपनी प्रति माह लगभग 3,000 ड्रोन इंटरसेप्टर का उत्पादन करती है, जिनकी कीमत लगभग 5,000 डॉलर प्रति यूनिट है।
पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच, इसने
इस जून में संयुक्त अरब अमीरात में इंटरसेप्टर का निर्माण शुरू किया है।

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