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Tuesday, November 24, 2020

कांग्रेस फिर से सवालों के घेरे में

 कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व को लेकर फिर से सवाल उठे हैं। इनके पीछे फौरी कारण है बिहार में पार्टी को मिली विफलता, पर स्थायी कारण है नेतृत्व से जुड़ा सवाल। केवल बिहार की बात ही नहीं है, बल्कि 11 राज्यों में हुए उपचुनाव भी हैं, जहाँ 59 सीटों पर मुकाबला था। बिहार में एक नई बात यह हुई कि उसका मुस्लिम आधार भी आंशिक रूप से खिसक कर असदुद्दीन ओवेसी की पार्टी मजलिस-ए-इत्तहादुल मुस्लिमीन की तरफ चला गया। इस बीच कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद ने अपने सवाल फिर से उठाए हैं। वहीं पी चिदंबरम और तारिक अनवर जैसे वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि हमें अंतर्मंथन करना चाहिए। और जैसाकि हमेशा से होता रहा है, कांग्रेस के भीतर से जैसे ही अंतर्मंथन की आवाजें सुनाई पड़ती हैं, तब उन्हें गांधी-नेहरू परिवार के खिलाफ विद्रोह की संज्ञा दे देती जाती है। पार्टी के भीतर से कोई नेता खड़ा होकर ये बातें करता है। इस बार अशोक गहलोत और सलमान खुर्शीद ने कहा है कि इन बातों को पार्टी फोरमों के भीतर उठाना चाहिए। जब यह सवाल राजदीप सरदेसाई ने कपिल सिब्बल से किया, तो उन्होंने कहा किस फोरम में उठाएं? 

Monday, November 16, 2020

कांग्रेस के भविष्य पर फिर एक और सवाल


कांग्रेस का वरिष्ठ नेता सिब्बल ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा, बिहार चुनाव और दूसरे राज्यों के उपचुनावों के हाल के प्रदर्शन पर कांग्रेस पार्टी (के शीर्ष नेतृत्व) के विचार अब तक सामने नहीं आए हैं। शायद उन्हें लगता है कि सब ठीक है और इसे सामान्य घटना ही माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने शायद हर चुनाव में पराजय को ही अपनी नियति मान लिया है। और यह भी कहा कि लोग शायद अब कांग्रेस को बीजेपी का विकल्प मानते ही नहीं।  

इससे पहले बिहार कांग्रेस के बड़े नेता तारिक अनवर ने कहा था कि बिहार चुनाव परिणाम पर पार्टी में अंतर्मंथन होना चाहिए। इस दौरान आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने इशारों-इशारों में कहा कि कांग्रेस देशभर में अपने गठबंधन सहयोगियों पर बोझ बनती जा रही है। उसकी वजह से हर जगह गठबंधन का खेल खराब हो रहा है।

कपिल सिब्बल के पूरे इंटरव्यू को पढ़ें, तो उससे किसी झुंझलाए व्यक्ति की प्रतिक्रिया नहीं लगती है, पर इतना लगता है कि शायद पार्टी के भीतर उनका संवाद ज्यादा नहीं है। उनकी यह बात ध्यान देने वाली है कि जब विचार का कोई फोरम नहीं है, तब मैं अपनी बात सार्वजनिक रूप से कहने को बाध्य हूँ। उनकी बात से यह नहीं मान लिया जाना चाहिए कि पार्टी नेतृत्व अपनी उपलब्धियों या विफलताओं पर विचार नहीं करता, पर इतना जरूर लगता है कि नेतृत्व के स्तर पर भी पार्टी में या तो ध्रुवीकरण हो रहा है या कपिल सिब्बल जैसे लोग हाशिए हैं।