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Thursday, January 1, 2015

कैलेंडर नहीं, समय की चाल को देखिए

 देश की सवा अरब की आबादी में पाँच से दस करोड़ लोगों ने कल रात नए साल का जश्न मनाकर स्वागत किया. इतने ही या इससे कुछ ज्यादा लोगों को पता था कि नया साल आ गया है, पर वे इस जश्न में शामिल नहीं थे. इतने ही लोगों ने किसी न किसी के मुँह से सुना कि नया साल आ गया है और उन्होंने यकीन कर लिया. इतने ही और लोगों ने नए साल की खबर सुनी, पर उन्हें न तो यकीन हुआ और न अविश्वास. इस पूरी संख्या से दुगनी तादाद ऐसे लोगों की थी, जिन्हें किसी के आने और जाने की खबर नहीं थी. उनकी यह रात भी वैसे ही बीती जैसे हर रात बीतती थी.