ईरान-युद्ध शुरू होने के पहले से ही कहा जा रहा था कि लड़ाई शुरू हो गई, तो उसे खत्म करना मुश्किल हो जाएगा. यह बात अब सच साबित हो रही है. अब ट्रंप अपनी योजनाओं को लेकर किंतु-परंतु करने लगे हैं. पहले धमकी दी कि ईरानी ऊर्जा केंद्रों पर हमले करेंगे और फिर कहा कि 120 घंटे तक ऐसा नहीं करेंगे.
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लिखा है कि जब से
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान-युद्ध में ‘प्रवेश’ किया है, तब से
वे इस सवाल से रूबरू हैं कि इसे समाप्त कब करेंगे? सच यह है कि युद्ध के उनके कई घोषित लक्ष्य अब भी
अधूरे हैं.
ट्रंप ने ईरान-युद्ध के लिए ‘भ्रमण’ शब्द का
प्रयोग करना शुरू कर दिया है, ताकि लगे कि कोई बड़ी परेशानी की बात नहीं है, लेकिन
व्यावहारिक रूप से लगता है कि वे फँस गए हैं.
अब वे परेशान हैं. पिछले शुक्रवार शाम को जब ट्रंप
फ्लोरिडा के लिए रवाना हुए, तो ऐसा लग रहा था कि वे शायद लड़ाई को कोई मोड़ देकर ‘एक्ज़िट’ यानी हाथ खींचने की घोषणा करेंगे.
बहरहाल अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है. दूसरी तरफ उनकी और वैश्विक अर्थव्यवस्था की परेशानियाँ बढ़ती जा रही हैं. पेट्रोल की औसत कीमतें आसमान छूने की तैयारी कर रही है. फारस की खाड़ी में बुनियादी ढाँचा खंडहर में तब्दील हो चुका है, वहीं ईरान की ‘कमजोर’ धार्मिक सत्ता की पकड़ मजबूत होती जा रही है.
