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Sunday, September 2, 2018

राफेल पर राजनीति की छाया

केन्द्र सरकार के लिए इस हफ्ते का आखिरी दिन खुशखबरी लेकर आया। खबर है कि इस वित्तीय वर्ष के पहली तिमाही में अर्थ-व्यवस्था में 8.2 फीसदी की दर से इजाफा हुआ है। इसका सबसे सकारात्मक पक्ष है मैन्यूफैक्चरिंग और फार्म सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन। ये दोनों सेक्टर रोजगार देते हैं। लगता यह है कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण दबाव में आई अर्थव्यवस्था फिर से रास्ते पर आ रही है। इससे पहले 2015-16 की पहली तिमाही में जीडीपी में सबसे तेज वृद्धि दर्ज हुई थी। पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्घि दर 7.7 फीसदी रही थी। बहरहाल इस तिमाही में भारत एकबार फिर से सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बन गया है। चीन की वृद्घि दर पहली तिमाही में घटकर 6.7 फीसदी रह गई है।

इस खुशखबरी के बावजूद केन्द्र सरकार पर विरोधियों के हमले बढ़ जा रहे हैं। चुनाव नजदीक आ रहे हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के कारण सरकार दबाव में आई है। कांग्रेस ने राफेल विमान के सौदे को चुनाव का मुद्दा बनाने का फैसला किया है। राहुल गांधी ने कई बार कहा है कि राफेल-डील में कोई घोटाला है। क्या घोटाला है, यह पार्टी ने स्पष्ट नहीं किया है। पार्टी इतना जरूर कह रही है कि हमने जो सौदा किया था, उसके मुकाबले सरकार अब बहुत ज्यादा कीमत दे रही है। दूसरे इसके ऑफसेट में सरकार की पसंदीदा कम्पनियों को फायदा पहुँचाने का आरोप भी है।

Saturday, February 17, 2018

राफेल पर गैर-वाजिब राजनीति

पिछले कुछ समय से कांग्रेस पार्टी राफेल विमान के सौदे को लेकर सवाल उठा रही है. वह मतदाता को मन में संशय के बीज बोकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है. बेशक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसलों पर सवाल उठाइए, पर उसकी बुनियादी वजह को भी बताइए. सन 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने 126 विमान खरीदने का फैसला किया था. इस फैसले को लागू करने की प्रक्रिया 2007 से शुरू हुई और 2012 में तय हुआ कि दासो का राफेल विमान खरीदा जाए. पर यूपीए सरकार ने समझौता नहीं किया. क्यों नहीं किया, यह कांग्रेस को बताना चाहिए.
यह सौदा दो देशों की सरकारों के बीच हुआ है, इसलिए इसमें बिचौलियों के कमीशन वगैरह का मसला नहीं है. कांग्रेस का कहना है कि यूपीए ने जो समझौता किया था, उसमें कीमत कम थी. अब ज्यादा है. मूल कार्यक्रम बदल चुका है. अब 126 के बजाय केवल 36 विमान जरूर खरीदे जा रहे हैं. पर विमानों के पूरे उपकरण और लम्बी अवधि का रख-रखाव भी इसमें शामिल है. यूपीए सरकार जिस समझौते को करना चाहती थी, उसमें केवल 18 विमान फ्रांस से आने थे. शेष 108 विमान भारत में ही बनने थे. वे फ्लाई अवे विमान थे, उनमें लाइफ साइकिल कॉस्ट शामिल नहीं थी.