प्रधानमंत्री कार्यालय की निगरानी में होने वाली नीट-यूजी पुनर्परीक्षा में केंद्र सरकार ने प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए भारतीय वायुसेना का उपयोग करने का फैसला किया है। यह कदम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की उस घोषणा के बाद उठाया गया है, जिसमें 3 मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया गया था। जाँच में पाया गया कि प्रस्तावित-प्रश्नपत्र के प्रश्नों से मिलते-जुलते कई प्रश्न परीक्षा से पहले ही प्रसारित हो गए थे। पुनर्परीक्षा 21 जून को होगी।
केंद्र सरकार अब यह सुनिश्चित करने के लिए हर
संभव प्रयास कर रही है कि नीट-यूजी की पुनः परीक्षा बिना
किसी गड़बड़ी या चूक के संपन्न हो। यहाँ मुख्य प्रयास ‘विश्वास’ की स्थापना का भी है। यह विश्वास,
नई व्यवस्था कायम करने के लिए भी ज़रूरी है। देश में सेना के प्रति जनता का
विश्वास सबसे ज्यादा है। इसलिए उम्मीद की जा
रही है कि इस कदम से विश्वास पैदा होगा। बार-बार हो रहे ‘लीक’ के कारण जन्मे
गहरे अविश्वास को दूर करने के लिए इसकी ज़रूरत भी है।
नीट परीक्षा के लिए विशेषज्ञों का एक गुप्त पैनल प्रश्नपत्र तैयार करता है। इसके बाद, उन्हें चुनींदा प्रिंटिंग प्रेसों में भेजा जाता है, जिन्हें उच्च स्तरीय जाँच के बाद चुना जाता है। इनकी छपाई सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है, जिनकी फुटेज को कम से कम एक वर्ष तक सुरक्षित रखा जाता है। प्रेस के अंदर केवल सीमित संख्या में ऑपरेटरों को ही अनुमति होती है। छपाई के बाद, पेपरों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जाता है। 3 मई के मामले की जाँच कर रही सीबीआई के सामने सवाल है कि ‘लीक’ परिवहन में हुआ या छपाई के दौरान। ऐसे जोखिमों को खत्म करने के लिए सरकार अंततः रक्षा बलों की मदद लेने का फैसला किया है।







