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Friday, March 27, 2015

इस तस्वीर का दूसरा पहलू भी है

बिहार के जिस स्कूल में हो रही नकल की फोटो हाल में मीडिया ने प्रचारित की थी उसके बारे में आज के इंडियन एक्सप्रेस में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इसके अनुसार 1700 छात्रों के स्कूल में गणित के केवल दो अध्यापक हैं। इस तस्वीर ने हमारी शिक्षा प्रणाली और मीडिया की भी बखिया उधेड़ कर रख दी है। बेशक मीडिया की सनसनी की प्रवृत्ति के कारण यह तस्वीर सामने आई, पर उसकी उदासीनता के कारण ही तो बरसों से यह हो रहा था। बावजूद इसके शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन की खराब स्थिति पर खबरें लगभग न के बराबर आती हैं।

हमारी शिक्षा की वास्तविक तस्वीर शिक्षा से सम्बद्ध वास्तविकता पर नजर रखने वाले संगठन प्रथम के सर्वेक्षणों से उजागर होती है। हम जितनी भयावह स्थिति समझते हैं वह उससे भी ज्यादा भयावह है। दूसरी ओर हमारा मीडिया इस तस्वीर के सनसनीखेज पहलू तक ही सीमित है। पता नहीं किसी और अखबार ने वास्तविकता को सामने लाने की कोशिश की या नहीं पर कम से कम इंडियन एक्सप्रेस के संवाददाता दीपू सेबास्टियन एडमंड्स ने तस्वीर के दूसरे पहलू को भी सामने रखा है। उन अखबारों ने क्या किया जिनके हाथ यह तस्वीर लग गई थी। फोटोग्राफर का नाम तक नहीं दिया गया।

What photo didn't show...
हिन्दू में फोटोग्राफर के बारे में खबर
शिक्षा की गुणवत्ता पर मेरी पुरानी पोस्ट