Showing posts with label खानृपान. Show all posts
Showing posts with label खानृपान. Show all posts

Sunday, May 17, 2026

भारत का सुपरफूड गुड़

उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर का 'जीआई टैग्ड गुड़'

भारत दुनिया के
70 प्रतिशत से ज़्यादा गुड़ का उत्पादन करता है, जिससे वह प्राकृतिक मिठास के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। देश के गन्ने के कुल उत्पादन का लगभग 20–30 प्रतिशत हिस्सा गुड़ बनाने में इस्तेमाल होता है, जिससे लगभग 25 लाख ग्रामीण लोगों को आजीविका मिली हुई है। इस क्षेत्र में निर्यात में भी काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। 2015–16 से 2024–25 के बीच गुड़ के निर्यात के मूल्य में 106.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो इसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय माँग का संकेत है। आयरन, मिनरल्स और जरूरी माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण, गुड़ रिफाइंड चीनी का एक ज़्यादा सेहतमंद विकल्प है। इस बढ़ोतरी को और बढ़ावा देने के लिए, सरकार की कई योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग उन्नयन योजना और एक जिला एक उत्पाद के साथ-साथ जीआई टैगिंग भी अहम भूमिका निभा रही हैं। ये योजनाएं उत्पादों की वैल्यू बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमों को मजबूत करने और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद कर रही हैं।

 भारत में गुड़ सेक्टर

गुड़, एक पारंपरिक, बिना रिफाइन और प्राकृतिक मीठा पदार्थ है। इसे बिना किसी रसायन का इस्तेमाल किए, गन्ने के रस को गाढ़ा करके बनाया जाता है। इसे अक्सर ‘औषधीय चीनी’ भी कहा जाता है, और पोषक तत्वों के मामले में यह शहद के बराबर होता है। गुड़ का सेवन एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरीबियन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है, जहां इसे अलग-अलग स्थानीय नामों से जाना जाता है। गुड़ को प्राकृतिक रुप से बनाने के पारंपरिक तरीकों और रसायन-मुक्त मीठे पदार्थों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती पसंद के कारण इसे काफी महत्व दिया जाता है।

दुनिया भर में गुड़ के कुल उत्पादन का 70 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा भारत में होता है। इस वजह से भारत दुनिया का सबसे बड़ा गुड़ उत्पादक देश है। देश में गन्ने के कुल उत्पादन का लगभग 20–30 प्रतिशत हिस्सा गुड़ बनाने में इस्तेमाल होता है। यह ग्रामीण भारत के प्रमुख कृषि-प्रसंस्करण उद्योगों में से एक है। इस क्षेत्र की खासियत विकेंद्रित प्रसंस्करण, परिवहन की कम लागत, छोटे पैमाने पर उद्यमिता और कुटीर उद्योग है। इससे लगभग 25 लाख लोगों की आजीविका चलती है।

बढ़ती गुड़ अर्थव्यवस्था

भारत के गुड़ क्षेत्र को गन्ने के भारी उत्पादन का लाभ मिलता है। वर्ष 2024-25 में, गन्ने का कुल उत्पादन 44.49 करोड़ टन (एमटी) रहने का अनुमान था। कुल उत्पादन में उत्तर प्रदेश का योगदान 48.5 प्रतिशत रहा, जिसके बाद महाराष्ट्र (24.1 प्रतिशत) और कर्नाटक (10.5 प्रतिशत) का स्थान था। अन्य उत्पादक राज्यों में गुजरात, तमिलनाडु, बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश और हरियाणा शामिल हैं।

भारत गुड़ और कनफैक्शनरी उत्पादों (जिनमें पारंपरिक भारतीय मिठाइयाँ और टॉफियाँ शामिल हैं) के प्रमुख निर्यातकों में से एक है। वर्ष 2015-16 में, इसका 292.8 मीट्रिक टन निर्यात हुआ जिससे 19.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर मिले। वर्ष 2024-25 तक निर्यात बढ़कर 471.9 मीट्रिक टन हो गया जिससे 40.68 करोड़ अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए। इस अवधि के दौरान, मूल्य में लगभग 106.5 प्रतिशत और मात्रा में 61.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।वर्ष 2024-25 में निर्यात के प्रमुख ठिकानों में इंडोनेशिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नाइजीरिया और नेपाल शामिल थे।