दो साल पहले सितंबर 2024 में सेंटर फॉर पॉलिसी
रिसर्च और सी-वोटर के एक सर्वे के परिणामों की घोषणा की, जिसमें भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोगों से राय ली गई थी. उसमें एक सवाल था कि
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते क्या सुधर सकते हैं?
मरियम नवाज़ की पुत्रवधू
सर्वे में 60 प्रतिशत से अधिक भारतीयों और करीब
50 प्रतिशत पाकिस्तानियों ने माना कि इस दशक में तो कम से कम नहीं सुधरेंगे. कुछ ने
कहा, कभी नहीं सुधरेंगे.
सर्वे 2022 में हुआ था, उसके परिणाम 2024 में
जारी किए गए थे. विषय था,'बदलती दुनिया में दक्षिण एशिया:
विभाजन के 75 साल बाद भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के
नागरिक क्या सोचते हैं?'
बातचीत ठप्प
सोशल मीडिया पर
एक प्रतिक्रिया पढ़ने को मिली, ‘पाकिस्तान और भारत
कभी दोस्त नहीं हो सकते. यह दुश्मनी उन लोगों के लिए फायदे का सौदा है, जिनका धंधा
इसी दुश्मनी से चलता है.’
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगाँठ के मौके पर अब यह सवाल मन में आता है कि ऐसी क्या बात है, जो टकराव को इस शिद्दत तक ले आई है? पाकिस्तान हमें ‘अज़ली दुश्मन’ क्यों मानता है?
पिछले दस साल से दोनों के बीच कोई उच्च-स्तरीय वार्ता नहीं हुई है. 2019 के बाद से दोनों देशों के उच्चायोग बगैर हाई कमिश्नर चल रहे हैं. कारोबारी रिश्ते नहीं के बराबर हैं. ट्रेन बंद, बस बंद और हवाई सेवा भी बंद. सिंधु जल-संधि रद्द कर है. डिप्लोमेसी का लेवल ज़ीरो है.
















