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Tuesday, June 16, 2026

मतदाता, नागरिकता और ‘डेमोग्राफिक चेंज’


गत 8 जून को ‘इंडिया’ गठबंधन ने पाँच-सूत्री प्रस्ताव पारित किया, जिसमें एक यह भी है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा जाएगा। यह गठबंधन ‘एसआईआर’ को ‘वोट चोरी’ मानता है। इसके कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने ‘एसआईआर’ को लेकर चुनाव-आयोग को क्लीन-चिट दी है। प्रश्न है कि ऐसे में पत्र लिखने से मिलेगा क्या? यह व्यक्तिगत मसला नहीं है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का कहना है, हम इसे ‘वोट लूट’ की कोशिश मानते हैं। भारत में घुसपैठ और नागरिकता रजिस्टर पिछले कई दशकों से बहस में हैं और यह बहस अब मतदाता सूची की बहस के साथ जुड़ गई है। ‘एसआईआर’ के देश में दो दौर हो चुके हैं और तीसरा शुरू हो गया है। पहला दौर मुख्यतः बिहार-केंद्रित था, जो जून से सितंबर 2025 तक चला। 27 अक्तूबर से दूसरा दौर शुरू हुआ, जिसमें उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत, नौ राज्य और तीन केंद्र-शासित क्षेत्र शामिल थे।

गत 14 मई को निर्वाचन आयोग ने ‘एसआईआर’ के तीसरे दौर की भी घोषणा कर दी, जिसमें सोलह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया गया है। इसके पूरा होने के बाद जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश को छोड़कर पूरे देश में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके साथ इस प्रक्रिया से जुड़ी बहस नए सिरे से शुरू होगी, जिसकी अनुगूँज संसद के मॉनसून सत्र में सुनाई पड़ेगी।