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Thursday, September 15, 2016

पूरब में भारत

अगस्त 2014 में विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने वियतनाम की राजधानी हनोई में कहा कि मोदी सरकार भारत की ‘लुक ईस्ट पॉलिसी’ को सार्थक बनाते हुए उसे ‘एक्टिंग ईस्ट’ का रूप देना चाहती है। मई में विदेशमंत्री बनने के बाद वह सुषमा स्वराज की छठी विदेश यात्रा थी। उसके अगले महीने सितम्बर 2014 में तीन बड़ी गतिविधियों ने भारत की विदेश नीति को नई दिशा दी। महीने के पहले हफ्ते में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान यात्रा पर गए। तीसरे हफ्ते में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत यात्रा पर आए और महीने के अंतिम सप्ताह में प्रधानमंत्री अमेरिका यात्रा पर गए।

Wednesday, March 2, 2016

क्या हो सकते हैं पिछड़ेपन के नए आधार?

पिछले साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने जाटों को ओबीसी  कोटा के तहत आरक्षण देने के केंद्र के फैसले को रद्द करने के साथ स्पष्ट किया था कि आरक्षण के लिए नए आधारों को भी खोजा जाना चाहिए। अदालत की दृष्टि में केवल ऐतिहासिक आधार पर फैसले करने से समाज के अनेक पिछड़े वर्ग संरक्षण पाने से वंचित रह जाएंगे, जबकि हमें उन्हें भी पहचानना चाहिए। अदालत ने ‘ट्रांस जेंडर’ जैसे नए पिछड़े ग्रुप को ओबीसी के तहत लाने का सुझाव देकर इस पूरे विचार को एक नई दिशा भी दी थी। कोर्ट ने कहा कि हालांकि जाति एक प्रमुख कारक है, लेकिन पिछड़ेपन के निर्धारण के लिए यह एकमात्र कारक नहीं हो सकता।
आजाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सामाजिक अंतर्विरोधों को दुरुस्त करने की है। दुनिया के तमाम देश ‘एफर्मेटिव एक्शन’ के महत्व को स्वीकार करते हैं। ये कार्यक्रम केवल शिक्षा से ही जुड़े नहीं हैं। इनमें किफायती आवास, स्वास्थ्य और कारोबार से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, ब्राजील आदि अनेक देशों में ऐसे सकारात्मक कार्यक्रम चल रहे हैं। इनके अच्छे परिणाम भी आए हैं।