Showing posts with label स्वच्छ भारत. Show all posts
Showing posts with label स्वच्छ भारत. Show all posts

Sunday, October 5, 2014

सामूहिक इच्छा होगी तो सब साफ हो जाएगा

महात्मा गांधी के चरखा यज्ञ की सामाजिक भूमिका पर कम लोगों ने ध्यान दिया होगा। देशभर के लाखों लोग जब चरखा चलाते थे, तब कपड़ा बनाने के लिए सूत तैयार होता था साथ ही करोड़ों लोगों की ऊर्जा एकाकार होकर राष्ट्रीय ऊर्जा में तबदील होती थी। प्रतीकात्मक कार्यक्रमों का कुशलता से इस्तेमाल व्यावहारिक रूप से बड़े परिणाम भी देता है। जैसे लाल बहादुर शास्त्री के जय जवान, जय किसान के नारे ने संकट के मौके पर देश को एक कर दिया। यह एकता केवल संकटों का सामना करने के लिए ही नहीं चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय निर्माण के लिए भी इसकी जरूरत है। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना-आंदोलन या निर्भया मामले में जनता के रोष के पीछे भी यह राष्ट्रीय एकता खड़ी थी। इस एकता या सर्वानुमति की अक्सर जरूरत होगी, क्योंकि हमारी व्यवस्था इतनी प्रभावशाली नहीं है कि सारे काम हल करके दे दे। उसे प्रभावशाली बनाने के लिए भी जनांदोलनों की जरूरत है।