Sunday, December 31, 2023

विधानसभा चुनाव और 2024 के संकेत

तीन हिंदी भाषी राज्यों में जीत के बाद बीजेपी ने बड़ी तेजी से लोकसभा चुनाव की रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है। तीन राज्यों के नए मुख्यमंत्रियों के चयन से यह बात साफ हो गई है कि पार्टी ने लोकसभा चुनाव ही नहीं, उसके बाद की राजनीति पर भी विचार शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों के कयासों को ग़लत साबित करते हुए बीजेपी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में न सिर्फ जीत हासिल की, बल्कि नए मुख्यमंत्रियों के रूप में तीन नए चेहरों को आगे बढ़ाकर चौंकाया है। संभवतः पार्टी का आशय है कि हमारे यहाँ व्यक्ति से ज्यादा संगठन का महत्व है। हम नेता बना सकते हैं।

तीनों राज्यों में बीजेपी की सफलता के पीछे अनेक कारण हैं। मजबूत नेतृत्व, संगठन-क्षमता, संसाधन, सांस्कृतिक-आधार और कल्याणकारी योजनाएं वगैरह-वगैरह। इनमें शुक्रिया मोदीजी को भी जोड़ लीजिए। यानी मुसलमान वोटरों को खींचने के प्रयासों में भी उसे आंशिक सफलता मिलती नज़र आ रही है।  

राजस्थान में पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा, मध्य प्रदेश में मोहन यादव और छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय के नामों की दूर तक चर्चा नहीं थी। इनका नाम नहीं था, पर पार्टी अब इनके सहारे नएपन का आभास देगी। उसे कितनी सफलता मिलेगी, यह तो मई 2024 में ही पता लगेगा, पर इतना साफ है कि पार्टी पुरानेपन को भुलाना और नएपन को अपनाना चाहती है। पुराने नेताओं का कोई हैंगओवर अब नहीं है। दूसरी तरफ पार्टी को इस बात का भरोसा भी है कि वह लोकसभा चुनाव आसानी से जीत जाएगी। उसने इंड गठबंधन या इंडिया को चुनौती के रूप में लिया ही नहीं।

Thursday, December 28, 2023

कमोबेश बेहतर गुजरा 2023 का साल


गुजरते साल के आखिरी हफ्ते में हम पीछे मुड़कर देखना चाहें, तो पाएंगे कि पिछले तीन वर्षों की तुलना में यह साल अपेक्षाकृत सकारात्मक उपलब्धियों का  रहा है। पिछले साल का समापन कोविड-19 के नए अंदेशों के साथ हुआ था, पर उनपर विजय पा ली गई। हालांकि देश के कुछ इलाकों से बीमारी की खबरें फिर से आ रही हैं, पर खतरा ज्यादा बड़ा नहीं है। ज्यादातर बड़ी खबरें आर्थिक पुनर्निर्माण और राजनीतिक उठा-पटक से जुड़ी हैं। साल के अंत में हुए विधानसभा चुनावों, नए संसद भवन और संसदीय-राजनीति, सुप्रीम कोर्ट के कुछ बड़े फैसलों, चंद्रयान-3 और आदित्य एल-1 मिशन जैसी वैज्ञानिक उपलब्धियों के महत्व को रेखांकित किया जाना चाहिए। इस साल हमारे पास निराशा से ज्यादा आशा भरी खबरें हैं।

चलते-चलाते साल के अंत में आर्थिक मोर्चे से अच्छी खबरें मिली हैं, जो बता रही हैं कि भारतीय जीडीपी अब 7 से 7.5 प्रतिशत सालाना की दर से संवृद्धि की दिशा में बढ़ रही है। दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश की बाढ़, सिल्यारा सुरंग, बालेश्वर (बालासोर) ट्रेन-दुर्घटना, मणिपुर की हिंसा और उसके दौरान वायरल हुए शर्मनाक वीडियो से जुड़ी निराशाओं को भी भुलाना नहीं चाहिए। गत 13 दिसंबर को संसद भवन हमले के सालगिरह पर एक और बड़ी घटना को अंजाम दिया गया। लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान कुछ लोग अंदर कूद गए और उन्होंने एक कैन से पीले रंग का धुआँ छोड़ा।

हमलावरों पर काबू पा लिया गया, पर इसके बाद सत्तापक्ष और इंडिया गठबंधन से जुड़े विरोधी दलों के बीच टकराव शुरू हो गया, जिसकी परिणति 146 सांसदों के निलंबन के रूप में हुई है। यह परिघटना न केवल शर्मनाक है, बल्कि खतरनाक भी। इसे ऐसे दिन अंजाम दिया गया, जो 2001 के संसद पर हुए हमले की तारीख है। इस दृष्टि से यह देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था के आँगन सुरक्षा में हुई चूक से ज्यादा राष्ट्रीय-प्रतिष्ठा का प्रश्न है। इसका सांकेतिक महत्व है। लगता है कि यह गतिरोध नए साल में बजट सत्र में भी चलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 एक अस्थायी व्यवस्था थी, जिसे हटाए जाने का फैसला पूरी तरह संवैधानिक है। इस निर्णय ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाए जाने के 5 अगस्त, 2019 के फैसले पर कानूनी मुहर लगा दी। कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा जल्द दिया जाना चाहिए और अगले साल सितंबर के महीने तक राज्य में चुनाव कराए जाने चाहिए। अब 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ जम्मू-कश्मीर विधानसभा-चुनाव होने की उम्मीद भी जागी है।

Wednesday, December 27, 2023

बाइडेन-यात्रा जैसा ही महत्वपूर्ण है, मैक्रों का गणतंत्र-सम्मान


अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की यात्रा रद्द होने के बाद देश के गणतंत्र-दिवस समारोह में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के आगमन की घोषणा के भी राजनयिक-निहितार्थ हैं. वहाँ की आंतरिक-राजनीति में भारत के प्रति नकारात्मक भावनाएं वैसी नहीं हैं, जैसी अमेरिका में हैं.

बाइडेन का कार्यक्रम रद्द होने में जहाँ अमेरिका के राजनीतिक-अंतर्विरोधों की भूमिका है, वहीं मैक्रों के दौरे का मतलब है भारत-फ्रांस रिश्तों का एक और पायदान पर पहुँचना. मैक्रों के दौरे की इस त्वरित-स्वीकृति से भारत के डिप्लोमैटिक  कौशल की पुष्टि भी हुई है.

त्वरित-स्वीकृति

फ्रांस में भारत के राजदूत जावेद अशरफ ने जिस तेजी से समय के रुख को पहचानते हुए मैक्रों के दौरे की पुष्टि कराने में सफलता प्राप्त की है, वह उल्लेखनीय है. मैक्रों की इस यात्रा से नरेंद्र मोदी को बास्तील-दिवस परेड की प्रतिध्वनि आ रही है.

राष्ट्रपति मैक्रों गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने वाले छठे फ्रांसीसी नेता होंगे. फ्रांस एकमात्र देश है, जिसके नेताओं को इतनी बार गणतंत्र दिवस परेड का मुख्‍य अतिथि बनाया गया है.

गणतंत्र दिवस की आगामी परेड इसलिए विशेष है, क्योंकि उसमें केवल महिलाएं शामिल होंगी. भारत सरकार ने इस अवसर पर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन को आमंत्रित किया था, लेकिन उन्होंने असमर्थता जताई. संभवतः बाइडेन अगले साल के ‘स्टेट ऑफ द यूनियन' संबोधन में हमस-इजराइल संघर्ष पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं.

रिश्तों की गहराई

फ्रांसीसी राष्ट्रपति के दौरे से यह बात स्पष्ट होगी कि भारत और फ्रांस के रिश्तों की गहराई क्रमशः बढ़ती जा रही है और यूरोप में वह हमारा सबसे बड़ा मित्र देश है. यह दूसरा मौका होगा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति का दौरा रद्द होने पर उनका स्थान फ्रांस के नेता लेंगे.

1975 में भारत में आपातकाल की घोषणा के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति जेराल्ड फोर्ड ने अपनी भारत यात्रा स्थगित कर दी थी. पश्चिम में भारत के प्रति कटुता बढ़ रही थी, इसके बावजूद जनवरी 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री याक शिराक गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि बनकर आए.

शिराक के बाद निकोलस सरकोज़ी, फ्रांस्वा होलां से लेकर इमैनुएल मैक्रों तक सभी राष्ट्रनेताओं ने भारत के साथ रिश्ते बनाकर रखे है. भारत के गणतंत्र समारोह में फ्रांस के छह राष्ट्रनेता भाग ले चुके हैं. किसी भी देश के राष्ट्राध्यक्षों की यह सबसे बड़ी संख्या है.

Wednesday, December 20, 2023

अमेरिकी राजनीति की लपेट में रद्द हुई बाइडेन की भारत-यात्रा


अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर दिल्ली नहीं आएंगे. पहले यह बात केवल मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से सुनाई पड़ी थी, पर अब आधिकारिक रूप से भी बता दिया गया है. यात्रा का इस तरह से रद्द होना, राजनयिक और राजनीतिक दोनों लिहाज से अटपटा है.

बाइडेन की यात्रा की बात औपचारिक रूप से घोषित भी नहीं की गई थी, पर भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने गत 20 सितंबर को उत्साह में आकर इस बात की जानकारी एक पत्रकार को दे दी थी. बहरहाल अब दोनों देशों के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि प्रस्तावित यात्रा नहीं होगी.

गणतंत्र की प्रतिष्ठा

गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनना भारत की ओर से अतिथि को दिया गया बड़ा राजनयिक सम्मान है. भारत की राजनयिक गतिविधियों में अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा को उच्चतम स्तर दिया जाता है. ऐसे कार्यक्रमों की घोषणा तभी की जाती है, जब हर तरफ से आश्वस्ति हो, ताकि बाद में शर्मिंदगी न हो.  

बताते हैं कि सितंबर में दिल्ली में जी-20 सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के बीच हुई बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने बाइडेन को भारत-यात्रा की निमंत्रण दिया था. बैठक के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में इस निमंत्रण की जानकारी नहीं थी, पर अमेरिकी राजदूत ने एक भारतीय पत्रकार को बता दिया कि बाइडेन को गणतंत्र दिवस-2024 के लिए मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है.

रिश्ते बिगड़ेंगे नहीं

अमेरिका के राष्ट्रीय रक्षा सलाहकार जेक सुलीवन ने अब कहा है कि जो बाइडेन अब भारत नहीं आ सकेंगे, पर भारत के साथ रिश्तों को प्रगाढ़ करने में उनकी निजी दिलचस्पी बदस्तूर बनी रहेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी व्यक्तिगत दोस्ती है, जो आने वाले समय में भी जारी रहेगी.

यात्रा का रद्द होना उतनी बड़ी घटना नहीं है, जितनी उसके साथ जुड़ी दूसरी बातें हैं. भारत-अमेरिका संबंधों को प्रगाढ़ करने में भारत से ज्यादा अमेरिका की दिलचस्पी है. अमेरिका के दोनों राजनीतिक दल चीन के खिलाफ भारत को समर्थन देने के पक्षधर हैं, पर इस समय यात्रा रद्द होने के पीछे भी वहाँ की आंतरिक रस्साकशी की भूमिका है.

Wednesday, December 13, 2023

भारत-अमेरिका रिश्तों पर पन्नू-निज्जर प्रसंगों की छाया

दिल्ली में एनआईए के प्रमुख के साथ एफबीआई के प्रमुख 

अमेरिका में खालिस्तानी-अलगाववादी गतिविधियों और गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश से जुड़े एक मामलों को लेकर दोनों देशों के गुपचुप-मतभेद जरूर सामने आए हैं, पर इससे यह नहीं मान लेना चाहिए कि दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ जाएगी. अलबत्ता इन मामलों से भारत की प्रतिष्ठा जुड़ी है.

बावजूद इसके बातें इतनी बड़ी नहीं हैं कि दोनों देशों के रिश्तों में बिगाड़ पैदा हो जाए. पन्नू-प्रसंग से मिलता-जुलता मामला कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़ा है. इन दोनों मामलों को लेकर भारत की खुफिया एजेंसी की प्रतिष्ठा को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. दूसरी तरफ भारत के सामने खालिस्तानी चरमपंथियों को काबू करने की चुनौतियाँ भी है.

अमेरिका को चीनी चुनौती का सामना करने के लिए भारत की जरूरत है. एशिया में भारत ही अमेरिका के काम आ सकता है. ऐसा भारत की भौगोलिक स्थिति के अलावा आर्थिक और सामरिक मजबूती की वजह से भी है. भारत को भी अमेरिका की जरूरत है, क्योंकि वह दो ऐसे देशों से घिरा है, जो उसे अज़ली दुश्मन मानते हैं.

Tuesday, December 12, 2023

राजनीति की लोकलुभावन गारंटियाँ


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में विकसित भारत संकल्प यात्रा के लाभार्थियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बातचीत करने के बाद कहा कि विधानसभा चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया कि मोदी की गारंटी में दम है। गारंटी से उनका आशय उस भरोसे से है, जो उनकी कार्यशैली से जुड़ा है। सिद्धांततः वे लोकलुभावन राजनीति के विरोधी हैं। पिछले साल एक सभा में उन्होंने कहा था कि लोकलुभावन राजनीति के नाम पर मुफ्त की रेवड़ियाँ बाँटने की संस्कृति पर रोक लगनी चाहिए। वे यह बात गुजरात के चुनाव के संदर्भ में कह रहे थे, जहाँ आम आदमी पार्टी भी प्रवेश पाने की कोशिश कर रही थी।

इसी रविवार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक कार्यक्रम में कहा कि समाज में जिस तथाकथित मुफ्त उपहार की ‘अंधी दौड़’ देखने को मिल रही है, उसकी राजनीति खर्च करने संबंधी प्राथमिकताओं को विकृत कर देती है। बहरहाल इन दिनों गारंटी शब्द इतना लोकप्रिय हो रहा है कि इसबार भाजपा ने छत्तीसगढ़ के लिए अपने घोषणापत्र को 'मोदी की गारंटी' नाम दिया। मध्य प्रदेश में बीजेपी की जीत के पीछे ‘लाड़ली बहना’ योजना का हाथ बताया जा रहा है। इस योजना के तहत मध्य प्रदेश सरकार महिलाओं को हर महीने 1,250 रुपये देती है।

मोदी की भाजपा ने ही नहीं, हाल में हुए चुनावों में कांग्रेस ने चार राज्यों में और तेलंगाना में बीआरएस ने भी गारंटियों की झड़ी लगा दी। इन वायदों में एलपीजी सिलेंडर रिफिल पर भारी सब्सिडी, स्त्रियों को हर महीने धनराशि वगैरह-वगैरह शामिल हैं। इस साल मई हुए में कर्नाटक विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस को मिली सफलता के पीछे पाँच गारंटियों की बड़ी भूमिका थी। पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में गृह ज्योति, गृह लक्ष्मी, अन्न भाग्य, युवा निधि एवं शक्ति की पाँच गारंटियाँ दी थीं। गृह ज्योति के तहत 200 यूनिट निशुल्क बिजली, गृह लक्ष्मी में परिवार की मुखिया को दो हजार रुपये, अन्न भाग्य में दस किलोग्राम अनाज, युवा निधि में बेरोजगार स्नातकों को तीन हजार और डिप्लोमाधारियों को डेढ़ हजार रुपये महीने, शक्ति योजना के तहत महिलाओं को राज्य भर में सरकारी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा की गारंटी थी।  

Sunday, December 10, 2023

सेमीफाइनल बीजेपी के नाम


बीजेपी की जीत के बाद दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, मैं लगातार कहता रहा हूं कि मेरे लिए देश में चार जातियां ही सबसे बड़ी जातियां हैं। मैं जब इन जातियों की बात करता हूं, तो इसमें स्त्रियाँ, युवा, किसान और गरीब परिवार हैं। इन चार जातियों को सशक्त करने से ही देश सशक्त होने वाला है। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोग कह रहे हैं कि इस हैट्रिक ने लोकसभा चुनाव की हैट्रिक की गारंटी दे दी है।

तीन हिंदी भाषी राज्यों में जीत के बाद लगता है कि बीजेपी अब लोकसभा चुनाव की रणनीतियों पर काम करेगी। 2018 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी इन तीनों हिंदी भाषी राज्यों में हार गई थी, पर 2019 के लोकसभा चुनावों में इन्हीं राज्यों से पार्टी को जबर्दस्त सफलता मिली। इस लिहाज से वह पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में है, पर उसके सामने इसबार इंडी या इंडिया गठबंधन होगा। सच यह भी है कि इंड गठबंधन खुद अंतर्विरोधों का शिकार है। बीजेपी की सफलता के पीछे अनेक कारण हैं। मजबूत नेतृत्व, संगठन-क्षमता, संसाधन, सांस्कृतिक-आधार और कल्याणकारी योजनाएं वगैरह-वगैरह। इनमें शुक्रिया मोदीजी को भी जोड़ लीजिए।

माना जाता है कि राज्यों के चुनावों में स्थानीय नेतृत्व की प्रतिष्ठा और राज्य से जुड़े दूसरे मसले भी होते हैं, पर लोकसभा चुनाव में मोदी का जादू काम करता है। बहरहाल इसबार के विधानसभा चुनावों में भी मोदी की गारंटी ने काम किया है। मध्य प्रदेश में लोकसभा की 29, राजस्थान में 25, छत्तीसगढ़ में 11, तेलंगाना में 17 और मिज़ोरम में एक सीट है। इन सीटों को जोड़ दिया जाए तो इनका योग 83 हो जाता है। इन परिणामों के निहितार्थ और 2024 के चुनावों पर पड़ने वाले असर के लिहाज से देखने के लिए यह समझना जरूरी है कि बीजेपी की इस असाधारण सफलता के पीछे के कारण क्या हैं।

बीजेपी की जीत में ‘शुक्रिया मोदीजी’ की भूमिका


बीजेपी की जीत के बाद दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, मैं लगातार कहता रहा हूं कि मेरे लिए देश में चार जातियां ही सबसे बड़ी जातियां हैं. मैं जब इन जातियों की बात करता हूं, तो इसमें स्त्रियाँ, युवा, किसान और गरीब परिवार हैं. इन चार जातियों को सशक्त करने से ही देश सशक्त होने वाला है. उन्होंने यह भी कहा कि कई लोग कह रहे हैं कि इस हैट्रिक ने लोकसभा चुनाव की हैट्रिक की गारंटी दे दी है.

तीन हिंदी भाषी राज्यों में जीत के बाद लगता है कि बीजेपी अब लोकसभा चुनाव की रणनीतियों पर काम करेगी. उसे बेशक सफलता मिल गई, पर नहीं मिलती तब भी वह निराश नहीं होती. 2018 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी इन तीनों हिंदी भाषी राज्यों में हार गई थी, पर 2019 के लोकसभा चुनावों में इन्हीं राज्यों से पार्टी को जबर्दस्त सफलता मिली. बीजेपी की सफलता के पीछे अनेक कारण हैं. मजबूत नेतृत्व, संगठन-क्षमता, संसाधन, सांस्कृतिक-आधार और कल्याणकारी योजनाएं वगैरह-वगैरह. इनमें शुक्रिया मोदीजी को भी जोड़ लीजिए.

माना जाता है कि राज्यों के चुनावों में स्थानीय नेतृत्व की प्रतिष्ठा और राज्य से जुड़े दूसरे मसले भी होते हैं, पर लोकसभा चुनाव में मोदी का जादू काम करता है. बहरहाल इसबार के विधानसभा चुनावों में भी मोदी की गारंटी ने काम किया है. चुनाव-परिणामों के निहितार्थ और 2024 के चुनावों पर पड़ने वाले असर के लिहाज से देखने के लिए यह समझना जरूरी है कि बीजेपी की इस असाधारण सफलता के पीछे के कारण क्या हैं.

Wednesday, December 6, 2023

इंडिया गठबंधन की उलझनें बढ़ीं


पाँच राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस पार्टी की परेशानियाँ बढ़ गई हैं। 2018 में जिन तीन हिंदीभाषी राज्यों में उसे जीत मिली थी, उनमें हार से उसके 2024 का गणित उलझ गया है। कम से कम एक राज्य में भी उसे जीत मिलती, तो उसके पास कहने को कुछ था, पर मामूली नहीं मिली, अच्छी-खासी हार मिली है। कांग्रेस इससे बेहतर परिणाम की उम्मीद कर रही थी।

विपक्ष का ‘इंडिया’ गठबंधन बनने के बाद यह बड़ा चुनाव था, जिसमें एक साथ पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे थे। इसका असर इंडी या इंडिया गठबंधन पर पड़ेगा, जिसके केंद्र में हिंदीभाषी राज्य ही हैं। बहरहाल अब गठबंधन की अगली बैठक का इंतज़ार है, जिसमें सीटों के बँटवारे पर बात होगी। सपा ने फैसला किया है कि घटक दलों के पास मजबूत प्रत्याशी होने पर ही वह कोई भी सीट छोड़ेगी।

सीटों के बंटवारे के लिए तृणमूल, सपा और डीएमके जैसी क्षेत्रीय पार्टियां समान फॉर्मूला अपनाने पर सहमत हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 6 दिसंबर को घटक दलों के नेताओं की बैठक बुलाई थी, जिसे स्थगित कर दिया गया, पर संसद में विपक्ष के नेता दिल्ली में खरगे के आवास पर डिनर में शामिल हो रहे हैं। डिनर के माध्यम से खटास दूर करने की कोशिश होंगी और अगली बैठक के लिए संभावित तारीखों पर विचार भी किया जाएगा।

पांच राज्यों के चुनाव के दौरान ही राजद और जदयू समेत इंडिया के कई घटक दल न सिर्फ एक बड़ी रैली का आयोजन करना चाहते थे, बल्कि सीटों के बंटवारे के फॉर्मूले पर वार्ता करने की भी उनकी योजना थी। लेकिन कांग्रेस ने पांच राज्यों के चुनाव के नतीजों के बाद इस पर विचार करने की बात कहते हुए मामले को टाल दिया था। अब क्षेत्रीय पार्टियों का कांग्रेस पर दबाव बढ़ जाएगा।

महुआ मोइत्रा और राजनीतिक नैतिकता से जुड़े सवाल

यह लेख 18 नवंबर को लिखा गया था। मासिक-पत्रिका में प्रकाशित यह लेख 18 नवंबर को लिखा गया था। मासिक-पत्रिका में प्रकाशित होने के कारण अक्सर समय के साथ विषय का मेल ठीक से हो नहीं पाता है। बहरहाल अब संसद ने महुआ मोइत्रा की सदस्यता खत्म करने का फैसला कर लिया है। इस लेख में इतना जोड़ लें, विषय से जुड़े संदर्भ बहुत पुराने नहीं हुए हैं।

महात्मा गांधी ने जिन सात पापों से बचने की सलाह दी, वे हैं-सिद्धांतों के बिना राजनीति, नैतिकता के बिना व्यापार, चरित्र के बिना शिक्षा, काम के बिना धन, विवेक के बिना खुशी, मानवता के बिना विज्ञान और बलिदान के बिना पूजा। अपने आसपास देखें, तो आप पाएंगे कि हम इन सातों पापों के साथ जी रहे हैं। पिछले कुछ समय का राजनीतिक घटनाक्रम इस बात की पुष्टि करता है।

दो पक्षों के वाग्युद्ध के शुरू हुआ महुआ मोइत्रा प्रकरण अब जटिल सांविधानिक-प्रक्रिया की शक्ल ले ल रहा है। लोकसभा की आचार समिति (एथिक्स कमेटी) ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर कैश लेकर सवाल पूछने से जुड़े बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के लगाए आरोपों की जाँच पूरी कर ली है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कमेटी ने महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित करने की सिफ़ारिश की है। इस रिपोर्ट के मसौदे में बीएसपी सांसद दानिश अली को लोकसभा के नियम 275 के उल्लंघन पर फटकार लगाने की सिफारिश भी है।

इस रिपोर्ट में अली समेत विपक्ष के उन सांसदों का भी ज़िक्र है, जिन्होंने कमेटी की बैठक के दौरान चेयरमैन विनोद कुमार सोनकर के पूछे गए सवालों पर आपत्ति जताई थी। मोइत्रा और विपक्ष के पाँच सांसद-दानिश अली, कांग्रेस के उत्तम कुमार रेड्डी और वी वैथीलिंगम, सीपीएम सांसद पीआर नटराजन और जेडीयू के गिरिधारी यादव 2 नवंबर को हुई बैठक को छोड़कर चले गए थे।

संसदीय प्रक्रिया के अलावा यह मामला आपराधिक-जाँच के दायरे में भी आ रहा है। निशिकांत दुबे ने मीडिया को जानकारी दी है कि उन्होंने मोइत्रा के ख़िलाफ़ लोकपाल के पास शिकायत भेजी थी, जिसे लोकपाल ने जाँच के लिए सीबीआई के पास भेज दिया है। अब एक तरफ यह मामला लोकसभा के भीतर है और वहीं बाहर भी है।

Friday, December 1, 2023

गज़ा में अस्थायी युद्ध-विराम के बाद


इसराइल और हमास के बीच अस्थायी पहले अस्थायी संघर्ष-विराम के चार दिन के बाद दो दिन के लिए यह विराम और आगे बढ़ाया गया. इस दौरान दोनों पक्षों ने कुछ कैदियों या बंधकों का आदान-प्रदान किया और हिंसक गतिविधियों को रोककर रखा. इस दौरान अमेरिका के विदेशमंत्री एंटनी ब्लिंकेन इसरायल गए, यह समझाने कि युद्ध-विराम को आगे बढ़ाने में भलाई है. इसके सहारे कुछ और बंधकों की रिहाई हो जाएगी.

उधर सीआईए के डायरेक्टर विलियम बर्न्स और मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया क़तर के प्रधानमंत्री और मिस्र के अधिकारियों से बातें करने के लिए दोहा गए. अमेरिका चाहता है कि युद्ध-विराम जारी रहे, पर इसराइल चाहता है कि उसकी कारवाई जल्द से जल्द शुरू हो. सवाल पूछा जा सकता है कि अब आगे क्या होगा और यह भी कि इस आंशिक-विराम से किस को क्या मिला?  

संभव है कि यह विराम एकबार और कुछ समय के लिए बढ़ा दिया जाए. अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने भी इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को इस आशय का सुझाव दिया है, ताकि बंधकों की रिहाई कराई जा सके. अस्थायी युद्ध-विराम से स्थायी-समाधान के बारे में सोचने का मौका भी मिलेगा, बशर्ते दोनों पक्षों को हिंसा की निरर्थकता का आभास हो. मिस्री अधिकारियों को इस आशय के संकेत मिले हैं, पर इसराइल और हमास ने ऐसी कोई बात कही नहीं है.

जो भी होगा उसमें इन दोनों पक्षों के अलावा अमेरिका की भूमिका भी होगी. अमेरिका को दो तरह की चिंताएं है. बड़ी संख्या में नागरिकों की मौतों का अमेरिकी जनमत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. अगले साल चुनाव को देखते हुए बाइडन अपनी छवि को लेकर संवेदनशील हैं. दूसरे लड़ाई खत्म होने के बाद खंडहर में तब्दील हो चुके गज़ा का पुनर्निर्माण. अंततः उसकी काफी कीमत अमेरिका को चुकानी होगी.

इसराइली दावा

इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने 26 नवंबर को कहा कि इस लड़ाई में हमारे तीन लक्ष्य हैं: हमास का सफाया, बंधकों की वापसी और भविष्य में गज़ा को इसराइल के लिए खतरा बनने से रोकना. हम पूर्ण विजय पाने तक लड़ते रहेंगे.

पर्यवेक्षकों के अनुसार लड़ाई का दूसरा दौर शुरू हुआ, तो वह गज़ा के दक्षिणी इलाकों में चलेगा. यह ज्यादा विवादास्पद होगा, क्योंकि यहाँ नागरिकों की ज्यादा मौतें होने का अंदेशा है.

कौन सा पक्ष पहले थकेगा, यह भी देखना होगा. हमास की ताकत का पता लगाना आसान नहीं है. उसके काफी लड़ाके अभी सुरंगों में बैठे हैं. अलबत्ता इसराइल का दावा है कि हमास की आधी ताकत खत्म कर दी गई है. लड़ाई खत्म होने के बाद यह भी देखना होगा कि हमास की लोकप्रियता का स्तर क्या है. नागरिकों का एक तबका ऐसा भी है, जो मानता है कि हमास की हरकतों के कारण उनका जीवन खतरे में पड़ गया.