तमिलनाडु विधानसभा के चुनाव-परिणामों ने देश में एक नए राजनीतिक 'स्टार्टअप' का नाम जोड़ा है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके का चुनावी पदार्पण बेहद शानदार रहा है। 'स्टार्टअप' शब्द बिजनेस से आया है। तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों को यह नाम दिया जाता है और एक अरब डॉलर से ऊपर का कारोबार करने वाली कंपनी को 'यूनिकॉर्न' कहते हैं। माना जा रहा है कि टीवीके ने रातों-रात भारतीय राजनीति में 'यूनिकॉर्न' बनकर दिखाया है।
तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) ने अपने पहले ही
चुनावी मुकाबले के बाद तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), आम आदमी पार्टी (आप), असम गण परिषद (एजीपी) और वाईएसआर कांग्रेस (वाईएसआरसीपी) जैसी पार्टियों
के नक्शे-कदम सफलता हासिल की है। वह बेशक पहले ही राउंड में ‘यूनीकॉर्न’
बनकर उभरी है, पर पर्यवेक्षक मानते हैं कि उसे अभी कठोर परीक्षा से
गुजरना होगा। अभी यह सेमीफ़ाइनल
जैसा लगता है। शायद साल-दो साल, नई सरकार आए या
फिर से चुनाव कराने पड़ें।
टीवीके के पीछे नौजवानों की ताकत है, जिसे जेन-ज़ी माना जा रहा है। हाल में नेपाल में भी नए नेता जीतकर आए हैं। उस सरकार की स्थिरता को लेकर भी संदेह है। सोशल मीडिया के ज़रिए चुनाव जीतना एक बात है, लेकिन सत्ता के खेल को खेलना दूसरी बात है। इस पीढ़ी को घोषणापत्र पढ़ना, आर्थिक मुद्दों का अध्ययन करना या नेताओं की जवाबदेही का मतलब भी समझना होगा। परंपरागत राजनीति में भी युवा ही आगे आते हैं। पर समाधान झटपट नहीं मिलते और सिनेमा को नायकों की तरह, खासतौर से नहीं।