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Saturday, September 24, 2016

अरुणाचल की फूहड़ कॉमेडी

अरुणाचल में उठा-पटक ने नए किस्म की राजनीति का मुज़ाहिरा किया है। इसके अच्छे या बुरे परिणामों के लिए हमें तैयार रहना चाहिए। बीजेपी को खुशी होगी कि उसने एक और प्रदेश को कांग्रेस मुक्त कर दिया, पर यह ढलान पर उतरती राजनीति का एक पड़ाव है। अभी तक बीजेपी इसमें प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं है और इसे कांग्रेस की गलतियों का परिणाम बता रही है, पर वह अपने हाथ को छिपा नहीं पाएगी। इससे पूर्वोत्तर में बीजेपी का रास्ता और आसान हो गया है, पर जिस हास्यास्पद तरीके से यह हुआ है, उससे भविष्य को लेकर शंकाएं पैदा होती हैं।

Sunday, January 31, 2016

छोटे राज्यों की बड़ी राजनीति

आम आदमी पार्टी की निगाहें पंजाब और उत्तराखंड पर हैं। अभी वह दिल्ली में सत्तारूढ़ है। यदि उसे पंजाब और उत्तराखंड में सफलता मिले तो उसे राष्ट्रीय स्तर पर उभरने में बड़ी सफलता भी मिल सकती है। और वहाँ विफल रही तो आने वाले वक्त में दिल्ली से भी वह गायब हो सकती है। उसकी सफलता या विफलता के आधार दो छोटे राज्य बन सकते हैं। वाम मोर्चे की समूची राष्ट्रीय राजनीति अब केरल और त्रिपुरा जैसे दो छोटे राज्यों के सहारे है। कांग्रेस की राजनीति भी अब ज्यादातर छोटे राज्यों के भरोसे है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों का अपना महत्व है। वे लोकसभा में सीटें दिलाने का काम करते हैं, पर माहौल बनाने में छोटे राज्यों की भूमिका भी है। हाल में केरल और अरुणाचल इसीलिए महत्वपूर्ण बन गए हैं।