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Wednesday, May 24, 2023

श्रीनगर जी-20 ने भारत-विरोधी प्रचार की हवा निकाली


श्रीनगर में जी-20 के तीन दिन के कार्यक्रम के आगाज़ के साथ पाकिस्तानी और चीनी प्रचार की हवा ही नहीं निकली है, बल्कि कश्मीर घाटी के निवासियों का आत्मविश्वास भी वापस लौटा है. इस दौरान यह भी साबित हुआ है कि पाकिस्तान यहाँ शांति-व्यवस्था की वापसी नहीं चाहता.

श्रीनगर सम्‍मेलन को विफल साबित करने और भारत की प्रतिष्ठा को कलंकित करने के इरादे से पाकिस्तान के विदेशमंत्री बिलावल भुट्टो गुलाम कश्मीर के तीन दिन के दौरे पर जा पहुँचे हैं.

जिस वक्त श्रीनगर में विदेशी मेहमान आए हुए हैं, बिलावल साहब पीओके में भारत-विरोधी जहर बो रहे हैं. तीन दिन के इस कार्यक्रम के लिए जबर्दस्त व्यवस्था की गई है, क्योंकि इसे विफल साबित करने वालों के इरादों पर भी पानी फेरना है.

Monday, December 7, 2020

नियामे में पाकिस्तानी सफलता, भारत के लिए संदेश

नाइजर की राजधानी नियामे में 27-28 नवंबर को ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) के विदेश मंत्रियों के 47वें सम्मेलन में कश्मीर के उल्लेख से दो बातें साबित हुईं। एक, इस्लामिक देश आसानी से कश्मीर से मुँह मोड़ नहीं पाएंगे, भले ही वे ऐसा चाहते हों। दूसरे, कश्मीर मामले को, संयुक्त राष्ट्र में उठाने में पाकिस्तान भले ही विफल रहा हो, पर ओआईसी का समर्थन पाने में कामयाब है।

इससे पहले ओआईसी के कश्मीर कांटैक्ट ग्रुप की जून में हुई बैठक में भी भारत की आलोचना की गई थी। उसे पाकिस्तान की बड़ी सफलता नहीं माना गया, पर नियामे सम्मेलन को पाकिस्तान सरकार, कम से कम अपने देश में,  उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर रही है। ओआईसी विदेश मंत्रियों का 2021 में सम्मेलन पाकिस्तान में होगा। उसमें पाकिस्तान इस विषय को बेहतर तरीके से उठाने की उम्मीद रखता है। इस्लामिक देशों के बीच भी गोलबंदी हो रही है। एक साल बाद की स्थितियों के बारे में अभी कुछ कहना कठिन है।

फलस्तीन और कश्मीर

सच यह भी है कि इस्लामिक देशों के बीच भारतीय राजनय ने पैठ जमाई है, पर उसके चमत्कारिक परिणाम नहीं हैं। सिवाय इसके कि पिछले साल मार्च में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को अबू धाबी के सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया और पाकिस्तान के विरोध की अनदेखी की गई। हाल में सऊदी अरब, यूएई और बहरीन के साथ भारत के रिश्तों में सुधार हुआ है। नियामे सम्मेलन में एकबारगी ओआईसी का असमंजस झलका भी था। सम्मेलन के ठीक पहले आयोजकों ने कहा था कि सम्मेलन का एजेंडा कश्मीर नहीं है, पर सम्मेलन के पहले दिन ही सऊदी अरब, तुर्की और नाइजर के विदेश मंत्रियों ने अपने वक्तव्यों में कश्मीर का जिक्र किया। प्रस्तावों में भी भारतीय कार्रवाइयों की आलोचना की गई।

Monday, November 30, 2020

ओआईसी के प्रस्ताव पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया


बीबीसी हिंदी के अनुसार भारत ने इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी ओआईसी के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में पास किए गए प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया है। इस प्रस्ताव में कश्मीर का भी ज़िक्र किया गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओआईसी में पास किए गए प्रस्ताव में भारत का संदर्भ तथ्यात्मक रूप से ग़लत, अकारण और अनुचित है। भारत ने इसे अनुचित करार देते हुए ओआईसी को देश के आंतरिक मसलों में दखल ना देने की सलाह दी है। हमने हमेशा से यह उम्मीद की है कि इस्लामिक सहयोग संगठन का भारत के आंतरिक मसलों को लेकर कोई स्टैंड नहीं है। इसमें जम्मू कश्मीर का मसला भी शामिल है जो भारत का अभिन्न हिस्सा है।

Thursday, November 26, 2020

ओआईसी की बैठक को लेकर पाकिस्तान परेशान


नाइजर की राजधानी नियामे में शुक्रवार 27 नवंबर से हो रही ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) के विदेश मंत्रियों की बैठक के एजेंडा में कश्मीर का जिक्र नहीं है। इस खबर से पाकिस्तान सरकार काफी परेशान है और उसके विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हफीज़ चौधरी ने कहा कि यह भारतीय मीडिया का प्रचार है कि बैठक के एजेंडा में कश्मीर नहीं है।

दरअसल आज सुबह पाकिस्तानी मीडिया हाउस डॉन की वैबसाइट पर यह खबर प्रकाशित की गई थी कि इस सिलसिले में ओआईसी के अंग्रेजी और अरबी भाषा में जारी वक्तव्य में कश्मीर का नाम नहीं है। इसके पहले हिंदुस्तान टाइम्स ने यह खबर दी थी कि एजेंडा में कश्मीर का जिक्र नहीं है।