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Wednesday, July 15, 2026

भारत की ‘एक्ट-ईस्ट पॉलिसी’ में नई ऊर्जा का संचार


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले शनिवार को ऑकलैंड से रवाना होते हुए इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के अपने तीन देशों के दौरे का समापन किया. यह एक ऐतिहासिक दौरा था जिसने इस इलाके के देशों के साथ भारत के संबंधों को दीर्घकालिक-साझेदारी के स्तर तक पहुँचाया.

इस यात्रा के महत्व और प्रभाव को समझने के लिए हमें इन तीन देशों के अलावा दक्षिण, दक्षिण पूर्व और सुदूर एशिया के बारे में भी विचार करना होगा.  यह दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र के भू-राजनीतिक और आर्थिक भविष्य में भारत की उभरती आकांक्षाओं को उजागर करता है. इसलिए भी कि यह क्षेत्र वैश्विक-स्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है.

प्रधानमंत्री की यह यात्रा कोरिया और जापान के नेताओं के साथ उनकी हालिया मुलाकातों के बाद हुई हैं. ये सभी मुलाकातें भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी में नई ऊर्जा का संचार करती हैं और इस बात की मान्यता को दर्शाती हैं कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की मध्यम शक्तियों के बीच गहरा सहयोग पारस्परिक आर्थिक और रणनीतिक लाभ संभव है.

तीन देशों की इस यात्रा ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, शिक्षा, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिणाम दिए, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उससे परे एक प्रमुख भागीदार के रूप में भारत की भूमिका मजबूत हुई.

Wednesday, May 8, 2024

चीनी इशारों पर किस हद तक चलेगा मालदीव?

 


देस-परदेस

इस हफ्ते 10 मई तक मालदीव से भारतीय सैनिकों की वापसी पूरी हो जाएगी. पिछले दो महीनों में मालदीव से भारतीय सैन्यकर्मियों के दो बैच वापस आ चुके हैं और उनकी जगह असैनिक विशेषज्ञों को तैनात कर दिया है. शेष कर्मियों की तैनाती इस हफ्ते हो जाएगी.

बावजूद इसके लगता नहीं है कि दोनों देशों के रिश्तों में सुधार हो जाएगा, बल्कि गिरावट ही आ रही है. इसके पीछे चीन की भूमिका है, जिसने मालदीव के कुछ प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं को लालच में फँसा लिया है और फिलहाल वहाँ की राजनीति ने उसे स्वीकार कर लिया है।

बात केवल चीन तक सीमित नहीं है. मालदीव भारत-विरोधी रास्तों को खोजता दिखाई पड़ रहा है. हाल में उसने तुर्की से कुछ ड्रोन और दूसरे शस्त्रास्त्र की खरीद की है. कश्मीर और पाकिस्तान से जुड़ी नीतियों के कारण तुर्की का भारत-विरोधी नज़रिया साफ है.

भारत-विरोधी प्रतीकों का मालदीव बार-बार इस्तेमाल कर रहा है. हाल में तुर्की कोस्टगार्ड के एक पोत का मालदीव में पोर्ट-विज़िट ऐसी ही एक प्रतीकात्मक-परिघटना है. 

विदेशमंत्री की यात्रा

एक खबर यह भी है कि मालदीव के विदेशमंत्री मूसा ज़मीर इस हफ्ते, 9 मई को भारत का दौरा करने वाले हैं. 9 मई को ही उनकी विदेशमंत्री एस जयशंकर से मुलाकात होगी. तारीख का महत्व केवल इतना है कि 10 मई से मालदीव में सहायता कार्य कर रहे भारतीय विमानों का संचालन सैनिकों की जगह भारत की ही एक असैनिक तकनीकी-टीम करने लगेगी.

Wednesday, October 4, 2023

मालदीव में राजनीतिक-परिवर्तन के मायने


मालदीव में राष्ट्रपति पद के चुनाव में चीन-समर्थक मुहम्मद मुइज़्ज़ू की विजय का हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय रणनीति पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह कुछ समय बाद स्पष्ट होगा, पर आमतौर पर माना जा रहा है कि प्रभाव पड़ेगा ज़रूर. नए राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज़्ज़ू ने पहली घोषणा यही की है कि मैं देश में तैनात भारतीय सैनिकों को वापस भेजने के वायदे को पूरा करूँगा. अलबत्ता पिछले कुछ वर्षों का अनुभव कहता है कि हालात 2013 से 2018 के बीच जैसे नहीं बनेंगे. देश की नई सरकार भारत और चीन के बीच संतुलन बनाकर चलना चाहेगी.

यह चुनाव मुइज़्ज़ू के 'इंडिया आउट' और इब्राहिम सोलिह के इंडिया फर्स्ट के बीच हुआ था, जिसमें मुइज़्ज़ू को जीत मिली. दोनों देशों में मालदीव पर अपने असर को लेकर अरसे से होड़ चल रही है. चुनाव का यह नतीजा भारत और चीन से मालदीव के रिश्तों को एक बार फिर परिभाषित करेगा.

पिछले पाँच साल से वहाँ भारत-समर्थक सरकार थी, पर अब चीन फिर से वहाँ की राजनीति में अपने पैर जमाएगा. इस दौर में चीन को वैसी ही सफलता मिलेगी या नहीं, अभी कहना जल्दबाजी होगी. चीन के कर्जों को लेकर हाल के वर्षों में बांग्लादेश, श्रीलंका और यहाँ तक कि पाकिस्तान में भी विरोध हुआ है. क्या मालदीव इस बात से बचा रहेगा?

Tuesday, May 11, 2021

एशिया में तेज गतिविधियाँ और भारतीय विदेश-नीति की चुनौतियाँ

 


पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अचानक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। एक तरफ अमेरिकी सेना की अफगानिस्तान से वापसी शुरू हो गई है, वहीं अमेरिका के हटने के बाद की स्थितियों को लेकर आपसी विमर्श तेज हो गया है। अफगानिस्तान में हाल में हुए एक आतंकी हमले में 80 के आसपास लोगों की मृत्यु हुई है, जिनमें ज्यादातर स्कूली लड़कियाँ हैं। ये लड़कियाँ शिया मूल के हज़ारा समुदाय से ताल्लुक रखती हैं।

ऐसा माना जा रहा है कि यह हमला दाएश यानी इस्लामिक स्टेट ने किया है। इस हमले के बाद अमेरिका ने कहा है कि अफगान सरकार और तालिबान को मिलकर इस गिरोह से लड़ना चाहिए। दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सऊदी अरब का दौरा करके आए हैं। इस दौरे के पीछे भी असली वजह अमेरिका के पश्चिम एशिया से हटकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर जाना है।

सऊदी अरब का प्रयास है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव खत्म हो, ताकि अफगानिस्तान में हालात पर काबू पाया जा सके, साथ ही इस इलाके में आर्थिक सहयोग का माहौल बने। इस बीच सऊदी अरब और ईरान के बीच भी सम्पर्क स्थापित हुआ है। जानकारों के अनुसार अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन का ईरान के साथ परमाणु समझौते को दोबारा बहाल करने की कोशिश करना और चीन का ईरान में 400 अरब डॉलर के निवेश के फ़ैसले के कारण सऊदी अरब के रुख़ में बदलाव नज़र आ रहा है।

अमेरिका की कोशिश भी ईरान से रिश्तों को सुधारने में है। इतना ही नहीं सऊदी और तुर्की रिश्तों में भी बदलाव आने वाला है। इस प्रक्रिया में भारत की नई भूमिका भी उभर कर आएगी। भारत ने प्रायः सभी देशों के साथ रिश्तों को सुधारा है। पाकिस्तान के कारण या किसी और वजह से तुर्की के साथ खलिश बढ़ी है, पर उसमें भी बदलाव आएगा।

Wednesday, January 13, 2021

हिंद-प्रशांत क्षेत्र की ताकत बनने में लंबा सफर

प्रेमवीर दास, बिजनेस स्टैंडर्ड  

पिछले कुछ दिनों में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर लगातार कुछ न कुछ कहा है। देश की विदेश नीति के प्रभारी एवं रणनीतिक मामलों के जानकार दोनों की हैसियत से उनकी कही गई बातें महत्त्वपूर्ण हैं। इस समय देश में जयशंकर की तरह इन मामलों में विशेष जानकारी रखने वाले कुछ गिने-चुने लोग ही हैं। ऐसे में उन्होंने जो कहा है उनसे चार महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। पहली बात तो यह कि हिंद-प्र्रशांत बीते हुए कल की वास्तविकता थी, न कि आने वाले कल की जरूरत है। दूसरी अहम बात यह है कि अब देश की रक्षा एवं रणनीतिक पहलुओं से जुड़े मामलों में समुद्री क्षेत्र की अहमियत अधिक है। एक और महत्त्वपूर्ण बात उन्होंने यह कही है कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत को एक अहम किरदार निभाना चाहिए था और चौथी बात यह है कि भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने हितों का तालमेल समान सोच रखने वाले दूसरे देशों के हितों के साथ बैठाना है।

एक अन्य ध्यान आकृष्ट करने वाला बयान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) ने दिया है। उन्होंने मैरीटाइम थियेटर बनाने की हिमायत की है। ऐसा लगता है कि इसमें मौजूदा पूर्वी एवं पश्चिमी नौसेना कमान के  साथ तीनों सेना की अंडमान एवं निकोबार कमान भी शामिल होंगी। इस थियेटर का आकार कितना होगा फिलहाल यह मालूम नहीं है, लेकिन समुद्र में तमाम बातों की स्वतंत्रता बनाए रखने, व्यापार के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) पर मोटे तौर पर चर्चा चल रही है। इस लिहाज से किसी शत्रु का नाम या उसकी पहचान नहीं की गई है, लेकिन ऐसा समझा जा रहा है कि चीन और पाकिस्तान पर ही नजरें हैं।