Sunday, January 4, 2026

2026 का भारतीय मन, नए संकल्प-नई ऊर्जा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर के आखिरी हफ्ते में प्रसारित अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा था कि 2026 का साल विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। कैसा होगा यह मील का पत्थर? पिछल साल से विश्व-व्यवस्था में बुनियादी बदलावों की शुरुआत हुई ही है। बदलाव इस साल भी जारी रहेंगे, पर भारत के लिए यह साल कैसा होगा? भारत माने यहाँ का जन-गण-मन। भारत के लोग और उनका मन। क्या विश्व की प्राचीनतम सभ्यता, आधुनिकतम सपनों के साथ भविष्य की उड़ान भरने को तैयार है?

ज्योतिषियों की भाषा में दुनिया इस वक्त एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के बीच से गुज़र रही है। वह है, नेपच्यून का मेष राशि में प्रवेश। नेपच्यून ने 30 मार्च, 2025 को एक नए 14 वर्षीय अध्याय के साथ-साथ एक नए राशिचक्र की शुरुआत कर दी है। 165 वर्षों के बाद उसने मेष राशि में प्रवेश किया है, जो 2039 तक रहेगा। इससे व्यक्तिगत पहचान, नए आदर्शों और आध्यात्मिक खोजों का दौर शुरू हुआ है, जहाँ लोग अपने सपनों को साकार करने और साहसिक कदम उठाने के लिए प्रेरित होंगे। यह ऐसा दौर है, जब साहस हमें पुकारता है। हमारी आकांक्षाएं, महत्वाकांक्षाएं, दृष्टियां, इच्छाएं और रचनात्मकता भीतर से जागती है।

हमारे सामूहिक संकल्प

साठ के दशक में हिंदी के लोकप्रिय व्यंग्य लेखक काका हाथरसी ने एक कविता लिखी थी, जन-गण मन के देवता, अब तो आँखें खोल/ महँगाई से हो गया, जीवन डावाँडोल/ जीवन डावाँडोल, ख़बर लो शीघ्र कृपालू/ कलाकंद के भाव बिक रहे बैंगन-आलू। यह कविता हमें अपने आसपास से जोड़ती है और आप इसे हरेक दौर में पसंद कर सकते हैं। यह जनता के की मन की बात है। इसका मतलब यह भी नहीं कि हम निराशावादी हैं, बल्कि यह है कि समाधान चाहते हैं।    

Thursday, January 1, 2026

इंडिगो संकट ने नागरिक विमानन की खोली पोल

दिसंबर की शुरुआत बेहद मुश्किल भरी रही, जब चालक दल के आराम और ड्यूटी की अवधि से जुड़े नए नियमों को लेकर भारत की सबसे बड़ी एयरलाइंस इंडिगो का संचालन अचानक ठप हो गया। बहरहाल अब उसकी सेवा सामान्य हो गई है।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा दी गई अस्थायी छूट का लाभ उठाते हुए, इंडिगो ने अपने संचालन को स्थिर करने और दैनिक उड़ानों को लगातार बढ़ाने में कामयाबी हासिल कर ली है। पर सवाल अनेक बचे हैं। यह किसी एक एयरलाइंस का मसला नहीं हैं। अस्थायी तौर पर समस्या का समाधान हो गया है, पर यह दीर्घकालीन समाधान की गारंटी नहीं है। सवाल यह है कि तेजी से बदलती परिस्थितियों में परिवहन सेवाओं का विस्तार किस तरह होगा?

संकट के क्षणों में उसकी उड़ानें लगभग 700 के आसपास पहुँच चुकी थीं, जो अब दो हजार के ऊपर आ गई हैं, जो सामान्य है। बेशक यह सवाल अपनी जगह पर है कि फरवरी में जब उसे इस व्यवस्था को लागू करना होगा, तब क्या यह एयरलाइंस अपने संचालन को सामान्य करने में सफल हो पाएगी?

इंडिगो एयरलाइंस को सफलता का पर्याय माना जाता है। देश में कम लागत वाले विमानन क्षेत्र में यह एयरलाइंस तेजी से बढ़ रही है। इसका उदय किसी चमत्कार से कम नहीं है। 4 अगस्त, 2006 को लॉन्च हुई इस कंपनी का संकट शुरू होने से पहले भारत के घरेलू बाजार के लगभग 64 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा था। इसके बेड़े में मुख्य रूप से एयरबस ए320 परिवार के 400 से अधिक विमान हैं और यह प्रतिदिन लगभग 2,200-2,300 उड़ानें संचालित करती है।

Wednesday, December 31, 2025

धर्मवीर भारती की पत्रकारिता

टिल्लन रिछारिया ने काफी पहले मुझसे भारती जी पर लेख लिखने को कहा था। मैंने भी लिखने में देरी की। टिल्लन जी के निधन से अवरोध पैदा हुए होंगे। इस वजह से किताब के प्रकाशन में भी देरी हुई होगी। बहरहाल 2025 के जनवरी में यह प्रकाशित हुई, जिसमें मेरा यह लेख भी शामिल है।

 रचनात्मक प्रतिभाएं बहुमुखी होती हैं। इसलिए रचनात्मकता के दायरे खींचना मुश्किल काम है। कविता शुरू होकर उपन्यास बन सकती है और कोई कहानी कविता में तब्दील हो सकती है। यह रचनाकार पर निर्भर करता है कि वह गीली मिट्टी को क्या आकार देता है। धर्मवीर भारती की पहली पहचान साहित्यकार के रूप में है। पर वे पत्रकार भी थे, बावजूद इसके कि जिस धर्मयुग के नाम से वे पहचाने गए, उसमें उन्होंने बहुत कम लिखा। फिर भी वे अपने किसी कृतित्व के कारण ही संपादक रूप में पहचाने गए। रिपोर्टर, लेखक और संपादक अलग-अलग पहचान हैं।

साहित्यकार के मुकाबले पत्रकार का मूल्यांकन केवल उसकी निजी-रचनाओं के मार्फत नहीं किया जा सकता। वह लेखक भी होता है और आयोजक भी। वह अपने विचार लिखता है और दूसरों के विचारों का वाहक भी होता है। उसका मूल्यांकन किसी एक या अनेक रिपोर्टों या टिप्पणियों के आधार पर किया जाना चाहिए। यह एक कसौटी है। दूसरी कसौटी है वह समग्र-आयोजन जिसमें वह अनेक रचनाधर्मियों को जोड़ता है। इस कसौटी पर खरा उतरना बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि इसमें तमाम लोग जुड़े होते हैं, जो कंकड़-पत्थर नहीं इंसान हैं।

धर्मयुग: एक दीर्घ रचना-प्रक्रिया

इस लिहाज से धर्मयुग अपने आप में एक रचना-प्रक्रिया थी। उसकी साप्ताहिक, मासिक या वार्षिक-योजना, सहयोगियों की कार्य-क्षमता का मूल्यांकन, कार्य-वितरण और देश-काल के साथ चलने की सामर्थ्य का विवेचन लोगों ने किया है और होता रहेगा। उसमें एक दौर भारती जी का था और वह 27 वर्ष का था, यानी काफी लंबा। उसे भारती जी की पत्रकारिता का दौर कह सकते हैं।

काफी लंबा होने का मतलब यह भी है कि उन्हें अपनी दृष्टि, विवेक और क्षमताभर काम करने का मौका मिला, जिसका श्रेय बेनेट कोलमन कंपनी और उसके प्रबंधकों को भी जाता है। या उस विशेष मुद्रण प्रक्रिया को, जिसके कारण धर्मयुग, इलस्ट्रेटेड वीकली, फिल्मफेयर और फेमिना जैसी पत्रिकाओं की अलग पहचान थी। उस दौर को भी जिसमें इन पत्रों का मुकाबला करने वाले नहीं थे।

भारती जी का उपन्यास गुनाहों का देवता मैंने 1962-63 में कभी पढ़ा होगा। तब मैं किसी भी कहानी या उपन्यास को पढ़ लिया करता था। 12-13 की उम्र के लिहाज से उस उपन्यास को ठीक से समझ पाना भी मेरे लिए आसान नहीं रहा होगा, पर उन दिनों मैं चंदामामा से लेकर मामा बरेरकर के उपन्यासों तक कुछ भी पढ़ लेता था।

दूसरों से अलग

मथुरा के चौबियापाड़े की एक गली में छोटा सा समाज कल्याण पुस्तकालय और वाचनालय था, जो आसपास के लोगों की मदद से चलता था। शाम को दो बेंचें लगा दी जाती थीं, जिनमें बैठकर लोग अखबार और पत्रिकाएं पढ़ते थे। चंदामामा, मनमोहन, पराग और बालक से लेकर धर्मयुग तक। नंदन का प्रकाशन तब शुरू हुआ नहीं था। बहरहाल धर्मयुग और भारती जी के रिश्ते या उसके महत्व को मैं तब समझता नहीं था। वह पत्रिका दूसरी पत्रिकाओं से अलग लगती थी, अपने आकार, बनावट, छपाई और सजावट की वजह से। इसी पुस्तकालय से एक किताब घर ले जाने की व्यवस्था भी थी। इसी निशुल्क-व्यवस्था के तहत मैंने इब्ने सफी बीए से लेकर गुरुदत्त और रवींद्रनाथ ठाकुर तक के उपन्यास पढ़ डाले।

पाकिस्तान का ‘हाइब्रिड सिस्टम’ और सेना की ताकत


इस्लामी जम्हूरिया-ए-पाकिस्तान नाम से लगता है कि पाकिस्तानी राजव्यवस्था लोकतांत्रिक है. वहाँ चुनाव भी होने लगे हैं, संसद, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उच्चतम न्यायालय भी है. इसलिए मान लिया जाता है कि वहाँ असैनिक-शासन है.

बावज़ूद इन बातों के देश में पिछले 78 साल से सेना की घोषित-अघोषित भूमिका चली आ रही है, जिसे पनपाने, बढ़ावा देने और मजबूत करने में असैनिक-राजनीति की भी भूमिका है.

पाकिस्तान के नेता गर्व से इसे हाइब्रिड सिस्टम कहते हैं. इस साल वहाँ की संसद ने इस सिस्टम को सांविधानिक-दर्जा भी प्रदान कर दिया गया है.

पाकिस्तानी सेना और अमेरिका की लोकतांत्रिक सरकार के बीच अनोखा रिश्ता है, जो इस साल राष्ट्रपति ट्रंप और आसिम मुनीर के लंच से स्पष्ट हो गया था. कहा जाता है कि दूसरे देशों के पास अपनी सेना होती है, पाकिस्तान की सेना के पास एक देश है.   

सेना की भूमिका

देश में 1973 में बनाए गए संविधान के अनुच्छेद 243 के अनुसार संघीय सरकार का सशस्त्र बलों पर नियंत्रण और कमान होती है. देश के राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं. प्रधानमंत्री की सलाह पर सशस्त्र बलों के प्रमुखों (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, आदि) की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं.

2025 के 27वें संशोधन से इसमें महत्वपूर्ण बदलाव आया है. सेना प्रमुख (आर्मी चीफ) को चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (सीडीएफ) का पद दिया गया है, जिससे वह तीनों सेनाओं (आर्मी, नेवी और एयर फोर्स) पर पूर्ण कमान रखता है.

यह पद थलसेना प्रमुख के साथ जुड़ा हुआ है, और फाइव-स्टार रैंक (जैसे फील्ड मार्शल) वाले अधिकारी को आजीवन विशेषाधिकार और मुकदमे से छूट मिलेगी.

 राष्ट्रपति अब भी सिद्धांततः तीनों सेनाओं के कमांडर हैं, पर जब वे सेवा निवृत्त होंगे, तब उन्हें कानूनी-संरक्षण मिलना बंद हो जाएगा, जबकि वहाँ के फील्ड मार्शल को आजीवन संरक्षण मिलेगा, जो अब तीनों सेनाओं के वास्तविक कमांडर भी हैं.

समझा जा सकता है कि शासन किसका है और किसका नहीं है. हालाँकि अदालतों ने देश में तीन बार हुए फौजी तख्ता पलट के विरुद्ध कोई टिप्पणी नहीं की और सेना के अधिकार बढ़ाने के हर कदम को स्वीकार कर लिया, फिर भी 27वें संशोधन ने वहाँ सुप्रीम कोर्ट के ऊपर एक और अदालत बना दी है. वहाँ नागरिकों पर मुकदमे सैनिक अदालतों में चलते हैं, जिनकी कार्यवाही सार्वजनिक नहीं होती.

Wednesday, December 24, 2025

उस्मान हादी की हत्या को ‘भारत-विरोधी’ मोड़


बांग्लादेश में उस्मान हादी और एक हिंदू युवक की हत्या के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव फिर बढ़ गया है. ढाका में भारतीय उच्चायोग और देश के दूसरे हिस्सों में भारत से जुड़ी संस्थाओं और व्यक्तियों को धमकियों का सामना करना पड़ रहा है.

गुरुवार को मैमनसिंह ज़िले के भालुका में धर्म का 'अपमान' करने के आरोप में भीड़ ने एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को पीट-पीटकर मार डाला था. भालुका पुलिस स्टेशन के ड्यूटी ऑफिसर ने बीबीसी बांग्ला को बताया था कि युवक को  मार डालने के बाद उसके शव को एक पेड़ से बाँधकर आग लगा दी गई थी.

युवक की हत्या और उसे जलाने की घटना के विरोध में दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के सामने हुए प्रदर्शन पर बांग्लादेश ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, जबकि भारत के विदेश विभाग का कहना है कि 20-25 लोगों के उस प्रदर्शन में ऐसा कुछ नहीं था, जिसे तूल दिया जाए. इन घटनाओं के वीडियो और तस्वीरें सार्वजनिक रूप से मौजूद हैं और इन्हें कोई भी देख सकता है.

भारत की चिंता इस आशंका से और भी ज्यादा है कि हिंसा के बहाने फरवरी में होने वाले चुनावों को टाल न दिया जाए. अगले साल अप्रैल-मई में पश्चिम बंगाल में भी चुनाव होने वाले हैं. इस हिंसा का असर हमारी घरेलू राजनीति पर भी पड़ सकता है.

हादी की हत्या

नवीनतम हिंसा की वजह है इंकलाब मंच के नेता 32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी की 12 दिसंबर को गोली मारकर हुई हत्या. उनकी प्रसिद्धि आक्रामक भारत-विरोधी छात्र नेता के रूप में थी.

बांग्लादेश सरकार ने भावनात्मक आवेग का लाभ उठाते हुए न केवल उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया, देश में राष्ट्रीय शोक भी घोषित किया.

Tuesday, December 23, 2025

बढ़ते जाएँगे रोबोट अपराध

 


युद्ध के मैदान में स्वायत्त ड्रोन के उपयोग ने पहले से ही कई संदिग्ध नैतिक प्रश्न खड़े कर दिए हैं। कई विशेषज्ञों और मानवाधिकार समूहों ने किया है हत्यारे रोबोटों के उपयोग की निंदा की , विशेष रूप से जब आप तकनीकी खामियों की संभावनाओं पर विचार करते हैं जिसके परिणामस्वरूप निर्दोष लोगों की मृत्यु होती है - बिना किसी प्रत्यक्ष मानवीय भागीदारी के अत्याचार करने के लिए तकनीक का उपयोग करने का तो जिक्र ही नहीं।

लेकिन क्या होगा अगर ऐसी तकनीक आतंकवादियों और अपराधियों के हाथों में चली जाए, जो नैतिक मानदंडों  को मानते ही नहीं ? एक नई रिपोर्ट  में पैन-यूरोपीय पुलिस एजेंसी यूरोपोल की इनोवेशन लैब ने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की है, जिसमें अपराधी अराजकता फैलाने के लिए स्वायत्त वाहनों, ड्रोन और ह्यूमनॉइड रोबोटों का इस्तेमाल  कर सकते हैं और इसके परिणामस्वरूप कानून लागू करने वाली एजेसियों को कैसे कदम उठाने होंगे।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कानून प्रवर्तन विभागों को वर्ष 2035 तक, "रोबोटों द्वारा किए जाने वाले अपराध, जैसे कि ड्रोन"से निपटने की आवश्यकता होगी, जिनका उपयोग "चोरी में उपकरण के रूप में किया जाता है", "पैदल यात्रियों को चोट पहुँचाने वाले स्वचालित वाहनों"का उल्लेख नहीं किया जाना चाहिए - एक ऐसी स्थिति जो हम बहुत मामलों  में पहले ही देख चुके हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ह्यूमनॉइड रोबोट भी मामलों को जटिल बना सकते हैं "क्योंकि उन्हें मनुष्यों के साथ अधिक परिष्कृत तरीके से बातचीत करने के लिए डिज़ाइन किया जा सकता है, जिससे संभावित रूप से जानबूझकर और आकस्मिक व्यवहार के बीच अंतर करना अधिक कठिन हो जाता है।"

इससे भी बदतर, स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग्स में सहायता के लिए डिज़ाइन किए गए रोबोटों को हैक किया जा सकता है, जिससे मरीज़ हमलावरों के प्रति असुरक्षित हो जाते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, साइबरपंक डायस्टोपिया वाइब्स को पूरा करने के लिए, स्वचालन के परिणामस्वरूप नौकरी से निकाले गए सभी लोगों को जीवित रहने के लिए "साइबर अपराध, बर्बरता और संगठित चोरी, अक्सर रोबोटिक बुनियादी ढांचे को लक्षित"करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

फ्यूचरिज़्म में पढ़ें पूरा आलेख

भारत की राष्ट्रीय-शक्ति में निरंतर निखार


लोवी इंस्टीट्यूट का एशिया पावर इंडेक्स

ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक लोवी इंस्टीट्यूट द्वारा जारी एशिया पावर इंडेक्स के 2025 संस्करण के अनुसार, अमेरिका और चीन के बाद, भारत एशिया की तीसरी प्रमुख शक्ति है। 40 अंक से अधिक के समग्र शक्ति स्कोर के साथ, जो ‘प्रमुख शक्ति (मेजर पावर)’ का दर्जा पाने की प्रारंभिक सीमा है, भारत ने अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर अपनी जगह बना ली है। हालाँकि भारत को तीसरा स्थान पिछले साल ही मिल गया था, पर 'प्रमुख शक्ति' के रूप में पहली बार मान्यता मिली है।

एशिया का देश अमेरिका नहीं है, पर उसकी एशिया में उपस्थिति है, इस वजह से उसे रैंकिंग में रखा गया। ऐसा ही रूस के साथ है। इस वर्ष डॉनल्ड ट्रंप की नीतियों के कारण अमेरिकी शक्ति में गिरावट आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप प्रशासन की नीतियां एशिया में अमेरिकी शक्ति के लिए कुल मिलाकर नकारात्मक रही हैं, लेकिन उनका वास्तविक प्रभाव आने वाले वर्षों में ही महसूस किया जाएगा।’ एक वर्ष में अमेरिका के समग्र शक्ति स्कोर में 1.2 अंक की गिरावट आई, जबकि चीन के स्कोर में 1 अंक की वृद्धि हुई है।

चीन का उभार

सैन्य क्षमता के मामले में भी अमेरिका की बढ़त को चीन लगातार कम करता जा रहा है। इस बीच, एशिया में रूस की ताकत भी बढ़ रही है। वह ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़कर एशिया का पाँचवाँ सबसे शक्तिशाली देश बन गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘एशिया में रूस की ताकत बढ़ रही है, जिसे उत्तर कोरिया और चीन से समर्थन मिल रहा है।’

पिछले वर्ष, भारत का व्यापक शक्ति स्कोर 39.1 था, जो उसे केवल 'मध्यम शक्ति' का दर्जा देता था। पाकिस्तान, जिसने इस वर्ष मई में भारत के साथ चार दिन का संक्षिप्त युद्ध लड़ा था और वर्तमान में अफगानिस्तान से लड़ रहा है, ताइवान, फिलीपींस, न्यूजीलैंड, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों से पीछे 16वें स्थान पर है।

Sunday, December 21, 2025

2025: महत्त्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरता भारत


2025 में भारत की विदेश नीति महाशक्तियों अमेरिका, चीन और रूस के साथ संतुलन बैठाने, दक्षिण एशिया में अपनी उपस्थिति को मज़बूत करने और ग्लोबल साउथ के साथ रिश्तों को बेहतर बनाने पर केंद्रित रही.

पुतिन की यात्रा के साथ, जहाँ रूस के साथ खड़े होकर भारत ने अपनी स्वतंत्र-नीति का परिचय दिया, वहीं धैर्य का परिचय देते हुए अंततः अमेरिका के साथ व्यापार-समझौते का आधार तैयार करके व्यावहारिक राजनीति का परिचय भी दिया.

यूक्रेन के युद्ध में हालाँकि भारत ने रूस की प्रकट आलोचना नहीं की, पर प्रकारांतर से यह संदेश देने में देरी भी नहीं की कि यह वक्त लड़ाइयों का नहीं है. पुतिन की यात्रा के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति की भारत-यात्रा इस संतुलन को प्रकट करती है. इस साल चीन के साथ भारत के रिश्तों में भी बर्फ पिघली है.

वैश्विक-राजनीति में संतुलन बैठाते हुए भारत ने हार्ड-डिप्लोमेसी, आर्थिक लचीलेपन और सामरिक-शक्ति को बढ़ाने पर जोर दिया. इस साल वह विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है.

भारत सक्रिय रूप से ग्लोबल साउथके एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में सुधारों की वकालत कर रहा है. अपनी वैश्विक स्थिति को बढ़ाने के लिए जी20, ब्रिक्स और एससीओ जैसे मंचों का उपयोग कर रहा है.

Friday, December 19, 2025

नाभिकीय-ऊर्जा में निजी-क्षेत्र का रास्ता खुला


संसद ने स्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया विधेयक, 2025’ को पारित कर दिया। इसअंग्रेजी नामाक्षरों के आधार पर शांति-विधेयक कहा गया है। हालाँकि कई विपक्षी सांसदों ने विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजने की माँग की थी, पर सरकार ने इसे राज्यसभा में चर्चा के लिए भेजकर जल्दी पास कराना उचित समझा। अब यह कानून बन जाएगा। दोनों सदनों की राजनीतिक-बहसों पर ध्यान नहीं दें, तो यह स्पष्ट है कि यह कानून यूपीए सरकार में अमेरिका के साथ हुए न्यूक्लियर-डील का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो अब अमेरिका के साथ संभावित व्यापार-समझौते के साथ भी जुड़ा है।

यह कानून अनायास ही नहीं बनाया गया है। कई कारणों से न्यूक्लियर-डील अपने अभीप्सित उद्देश्यों में पूरी तरह सफल नहीं हो सका। एक बड़ा अड़ंगा, संभावित-दुर्घटना की क्षतिपूर्ति को लेकर था, जिसके लिए 2010 में पास हुए नागरिक दायित्व अधिनियम से विदेशी-आपूर्तिकर्त्ता सहमत नहीं थे। 2008 में, भाजपा ने मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसका एक कारण यह भी था कि न्यूक्लियर-डील में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, जिससे क्षतिपूर्ति हो सके।

Tuesday, December 16, 2025

ट्रंप की ‘अमेरिका-फर्स्ट’ विदेश-नीति और भारत


अमेरिका के ट्रंप-प्रशासन ने वस्तुतः इस बात की खुली घोषणा कर दी है कि अमेरिकी-प्रभाव के विस्तार के बजाय उसकी आंतरिक-महानता को फिर से स्थापित करना होगा. यानी कि अमेरिका की विदेश-नीति भी मेक अमेरिका ग्रेट अगेन सिद्धांत पर केंद्रित होगी.

अमेरिका की नई राष्ट्रीय सुरक्षा-नीति (एनएसएस) से ऐसा ही आभास मिलता है. हालाँकि यह दस्तावेज़ 25 नवंबर को जारी हुआ था, पर हाल में ही सामने आया है. इस छोटे से दस्तावेज़ में अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय हितों, उन हितों के क्रम और समग्र रूप से बदलती विश्व व्यवस्था पर, अब तक का सबसे स्पष्ट वर्णन किया गया है.

आम बोलचाल की भाषा में लिखे गए, इस दस्तावेज़ में ट्रंप और उनकी टीम की खास शैली झलकती है. शुरुआत से ही, यह दस्तावेज़ रणनीति के वास्तविक अर्थ को परिभाषित करता है.

2021 में अपना पद संभालने के बाद जो बाइडेन ने कहा था, ‘अमेरिका इज़ बैक, हमारी विदेश-नीति के केंद्र में डिप्लोमेसी की वापसी हो रही है।’ वह मानवीय और उदार-अमेरिका था. ट्रंप उस उदार-अमेरिका को तमाम समस्याओं की जड़ मानते हैं.

Wednesday, December 10, 2025

पुतिन की यात्रा और तलवार की धार पर भारत


पुतिन के भारत दौरे से भारत ने अपनी विदेश-नीति की स्वतंत्रता का परिचय दिया वहीं, रूस को अलग-थलग करने की कोशिशों को विफल करने में मदद भी की है. भारत को यह संदेश भी देना है कि हम किसी की दादागीरी के दबाव में नहीं आएँगे और अपनी स्वतंत्र सत्ता को बनाकर रखेंगे.

रूस को अलग-थलग करना इसलिए भी आसान नहीं है, क्योंकि विकासशील देशों के साथ उसके रिश्ते सोवियत-युग से बने हुए हैं. रूस ने बहुत लंबे समय तक इन देशों का साथ दिया है और अब ये देश उसका साथ दे रहे हैं.

इसका अर्थ यह भी नहीं है कि भारत ने अमेरिका से दूरी बनाई है या वह वैश्विक ध्रुवीकरण की प्रक्रिया में किसी एक पाले में जाकर बैठेगा. अलबत्ता यह संकेत ज़रूर दिया कि भारत और रूस की दोस्ती ख़ास है, जो समय की कसौटी पर परखी गई है.

भारत को अमेरिका से रिश्तों में बदलाव आने पर धक्का जरूर लगा है. पिछले दो दशक से भारत यह कोशिश कर रहा था कि अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी विकसित हो. डॉनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत का दर्जा रणनीतिक रूप से घटाया गया है.

ट्रंप प्रशासन ने इस हफ़्ते अपनी बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति जारी की है, जिसे देखते हुए लगता है कि अमेरिका ने एशिया में चीन से शत्रुता को कम करने और यूरोप में अपने प्रभाव को बढ़ाने का फैसला किया है.

संचार साथी: पहले साख बनाएँ, फिर इस्तेमाल करें


दूरसंचार विभाग ने स्मार्टफोन कंपनियों को संचार साथी एप्लीकेशन को अनिवार्य रूप से प्री-लोड करने के अपना आदेश वापस लेकर अच्छा काम किया है। इसे लागू करने का बेहतर तरीका यही था कि लोगों पर छोड़ दिया जाता कि वे चाहें, तो इसे डाउनलोड कर लें और न चाहें, तो न करें। इसके फायदों को देखते हुए वह खुद ही लोकप्रिय हो जाएगा। हाँ, फायदों की जानकारी लोगों को जरूर दी जानी चाहिए थी। इसे लेकर गोपनीयता और संभावित निगरानी को लेकर चिंताएं पैदा हुई, जिनके पीछे भले ही कोई आधार नहीं रहा होगा, पर वे वाजिब थीं। संचार मंत्रालय ने अब बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘सरकार ने मोबाइल निर्माताओं के लिए प्री-इंस्टॉलेशन को अनिवार्य नहीं बनाने का निर्णय लिया है।’

मतलब यह भी नहीं है कि सरकार साइबर अपराधों को रोकने की अपनी जिम्मेदारी से हाथ धो ले। वस्तुतः यह साख का सवाल है। पिछले सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने देशभर से सामने आए डिजिटल अरेस्ट के मामलों की देशभर में जाँच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा, डिजिटल अरेस्ट तेजी से बढ़ता साइबर क्राइम है। इसमें ठग खुद को पुलिस, कोर्ट या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो/ऑडियो कॉल के जरिए पीड़ितों, खासकर सीनियर सिटिजन को धमकाते हैं और उनसे पैसे वसूलते हैं।

शुरू होगा भारत-रूस सहयोग का एक नया दौर


 ऐसे मौके पर जब लग रहा है कि रूस ने यूक्रेन में लड़ाई को डिप्लोमैटिक-मोर्चे पर जीत लिया है, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आ रहे हैं. दूसरी तरफ इसी परिघटना के आगे-पीछे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की भी संभावना है.

इन दोनों खबरों को मिलाकर पढ़ें, तो भारत की दृष्टि से साल का समापन अच्छे माहौल में होने जा रहा है. यूक्रेन में लडाई खत्म हुई, तो एक और बड़ा काम होगा. वह है रूस पर आर्थिक-पाबंदियों में कमी. इनसे भी भारत का रिश्ता है.

दूसरी तरफ अमेरिका-रूस, अमेरिका-चीन और भारत-चीन रिश्ते भी नई शक्ल ले रहे हैं. अक्सर सवाल किया जाता है कि चीन से घनिष्ठता को देखते हुए क्या  रूस भारत के साथ न्याय कर पाएगा. क्यों नहीं? बल्कि रूस संतुलनकारी भूमिका निभा सकता है.

Wednesday, November 26, 2025

वैश्विक-राजनीति क्या जी-20 को विफल कर देगी?


हाल में जोहानेसबर्ग में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन से वैश्विक व्यवस्था के लिए कुछ महत्वपूर्ण संदेश निकले हैं. भारत की दृष्टि से इस सम्मेलन का दो कारणों से महत्व है.

एक, भारत ग्लोबल साउथ के नेता के रूप में उभर रहा है, जिसमें अफ्रीका की बड़ी भूमिका है. 2023 में भारत की जी-20 की अध्यक्षता के दौरान, अफ्रीकी संघ जी-20 का सदस्य बनाने की घोषणा की गई थी. ग्लोबल साउथ में अफ्रीकी देशों की महत्वपूर्ण भूमिका है.

दूसरी तरफ अमेरिकी बहिष्कार के कारण यह सम्मेलन वैश्विक राजनीति का शिकार भी हो गया. कहना मुश्किल है कि आगे की राह कैसी होगी, क्योंकि जी-20 का अगला मेजबान अमेरिका ही है, जिसका कोई प्रतिनिधि अध्यक्षता स्वीकार करने के लिए सम्मेलन में उपस्थित नहीं था.

खाली कुर्सी की अध्यक्षता

अजीब बात है कि वह देश, जिसे अध्यक्षता संभालनी है, सम्मेलन में आया ही नहीं. ऐसे  दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कहा कि हमें यह अध्यक्षता किसी ‘खाली कुर्सी’ को सौंपनी होगी.

दक्षिण अफ्रीका ने ट्रंप के स्थान पर कार्यभार सौंपने के लिए दूतावास के किसी अधिकारी को भेजने के अमेरिकी प्रस्ताव को प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताते हुए अस्वीकार कर दिया. अब शायद किसी और तरीके से इस अध्यक्षता का हस्तांतरण होगा.

Sunday, November 23, 2025

तमिल राजनीति और केंद्र-राज्य टकराव


सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 20 नवंबर को राष्ट्रपति और राज्यपालों द्वारा विधेयकों पर स्वीकृति देने के लिए पहले इसी अदालत द्वारा निर्धारित अपनी ही समय-सीमा वापस ज़रूर ले ली, पर असाधारण स्थितियों में राज्यों के लिए अदालत का दरवाज़ा भी खुला रहने दिया है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाले पीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि न्यायालय कार्यपालिका की शक्तियों का अतिक्रमण नहीं कर सकता।

न्यायालय ने यह भी कहा है जब कोई राज्यपाल कानून बनाने की प्रक्रिया में ‘लंबी, अस्पष्ट और अनिश्चित’ देरी का कारण बने, तब राज्य सरकार अदालत की शरण ले सकती है। इस तरह से अदालत ने केंद्र और राज्यों के बीच एक जटिल राजनीतिक मुद्दे में नाज़ुक संतुलन बनाने की कोशिश की है। अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि 8 अप्रैल के फैसले के कारण तमिलनाडु के जिन 10 कानूनों पर राज्यपाल की स्वीकृति मान ली गई थी, उनकी स्थिति क्या होगी। कुछ संविधान विशेषज्ञ मानते हैं कि वे कानून बन चुके हैं और उनकी अधिसूचना गजट में भी हो चुकी है, इसलिए उन्हें स्वीकृत मान लेना चाहिए।

Wednesday, November 19, 2025

सेना की जागीर बनता पाकिस्तान


पाकिस्तान की संसद ने अपने थलसेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को असाधारण शक्तियां देने तथा देश के सुप्रीम कोर्ट को दूसरे दर्जे पर रखने के इरादे से तुर्त-फुर्त एक संविधान संशोधन किया है, जो फौरन लागू भी हो गया.

संविधान में 27वाँ संशोधन गुरुवार 13 नवंबर को राष्ट्रपति के दस्तखत होने के बाद कानून बन गया, जिससे देश की व्यवस्था बुनियादी तौर पर बदल गई है. पहले कहा जाता था कि दुनिया में पाकिस्तान की सेना ऐसी है, जो एक देश की मालिक है. अब कहा जा सकता है कि आसिम मुनीर ऐसे सेनाध्यक्ष हैं, जो पाकिस्तान के मालिक हैं.

पाकिस्तानी सेना ने लंबे समय से देश की वास्तविक सत्ता भोगी, कभी तख्तापलट के माध्यम से सत्ता पर कब्जा किया है तो कभी पर्दे के पीछे से प्रभाव डाला है. पर अब जो हुआ है, वह हैरतंगेज़ है.

सेना का नया पद

नेशनल असेंबली ने बुधवार 12 नवंबर को हंगामे से भरे सत्र के दौरान दो-तिहाई बहुमत से विवादास्पद 27वें संविधान संशोधन विधेयक को पास कर दिया. इस संशोधन का उद्देश्य रक्षा बलों के प्रमुख का एक नया पद सृजित करना और एक संवैधानिक न्यायालय की स्थापना करना है.

अब वहाँ के सेनाध्यक्ष देश के सबसे ताकतवर व्यक्ति बन गए हैं. एक और संशोधन के कारण सुप्रीम कोर्ट अब संविधान से जुड़े मुकदमों की सुनवाई नहीं कर सकेगा. उसकी जगह एक नए संघीय संवैधानिक न्यायालय का गठन शुरू हो गया है.  

Wednesday, November 12, 2025

बांग्लादेश के चुनाव से जुड़े हैं भारत से रिश्ते


बांग्लादेश में फरवरी में चुनाव कराए जाने की घोषणा के बाद से घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है. वहाँ के राजनीतिक अंतर्विरोध तेजी से खुल रहे हैं. यह स्पष्ट हो रहा है कि वहाँ के समाज और राजनीति में कई धाराएँ एक साथ बहती हैं.

बुनियादी सवाल अब भी अपनी जगह है. चुनाव होंगे या नहीं और हुए तो परिणाम क्या होगा, कैसी सरकार बनेगी? अंतरिम सरकार को जो आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयाँ विरासत में मिली हैं, वे अब और बढ़ गई हैं, जो आने वाली सरकार के मत्थे मढ़ी जाएँगी. भारत के साथ रिश्ते भी इन चुनाव-परिणामों पर निर्भर करेंगे.

नई सरकार को राजनीतिक असंतोष, ऊँची मुद्रास्फीति और राजनीतिक-समूहों के तूफान का सामना करना होगा. देश की अर्थव्यवस्था भारत के साथ संबंधों पर भी निर्भर करती है. ये संबंध बिगड़े हुए हैं और कहना मुश्किल है कि नई सरकार का इस मामले में नज़रिया क्या होगा.

बढ़ती अराजकता

डॉ यूनुस की अंतरिम सरकार ने चुनाव की तारीख की घोषणा पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और इस्लामी जमात-ए-इस्लामी के साथ विचार-विमर्श के बाद की है. फिर भी अधूरे सुधारों और बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था के कारण चुनाव की समय-सीमा खिसक जाए, तो हैरत नहीं होगी.

भीड़ की हिंसा बेरोकटोक जारी है, दिन-दहाड़े गोलीबारी और लिंचिंग की खबरें आ रही हैं. अवामी लीग को निशाना बनाकर राजनीतिक स्वतंत्रता पर भी अंकुश लगाए जा रहे हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी मई 2025 की रिपोर्ट में, इसे लेकर चिंता व्यक्त की है.

Saturday, November 8, 2025

‘वोट चोरी’ की साज़िश या कुछ और…


नवोदय टाइम्स में 8 नवंबर 2025 को प्रकाशित लेख का संवर्धित संस्करण

वोट चोरी के आरोपों पर ध्यान नहीं दें, तब भी मतदाता सूचियों में गड़बड़ियाँ हैं। ये गड़बड़ियाँ क्या सरकार और चुनाव आयोग की मिलीभगत की वजह से हैं? ऐसा है, तो फिर यह लोकतंत्र को कलंकित करने वाली घटना है, पर साज़िश का आरोप मामूली बात नहीं है। इसकी पड़ताल होनी ही चाहिए। साज़िश साबित नहीं हुई और प्रशासनिक-अव्यवस्था, अकुशलता या ज्यादा से ज्यादा विघ्नसंतोषियों की साज़िश साबित हुई, तब क्या होगा?

सवाल यह भी है कि कौन करेगा, इसकी जाँच? वस्तुतः यह मसला चुनाव-सुधारों और खासतौर से चुनाव-आयोग को स्वतंत्र संस्था बनाने से जुड़ा है। क्या देश के राजनीतिक दल इन दोनों बातों से सहमत हैं? इसे भी याद रखना चाहिए कि ज्यादातर चुनाव-सुधार से जुड़े काम, राजनीतिक दलों के अड़ंगों के बावज़ूद हुए हैं।

राहुल गांधी दो बार पीपीटी प्रेजेंटेशन कर चुके हैं। बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में उनसे पूछा गया कि आप इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में क्यों नहीं ले जाते, इसपर उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट सहित सब देख रहे हैं। हम यह सब बंद कमरे में नहीं कर रहे हैं। मीडिया के सामने कर रहे हैं। यह चुनाव आयोग का डेटा है, हमारा नहीं। अगस्त में राहुल गांधी ने कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची को लेकर कहा था कि आयोग और बीजेपी की मिलीभगत से ‘वोट चोरी’ हुई है। अब हरियाणा का मामला उन्होंने उठाया है।

Thursday, November 6, 2025

हैवी लिफ्ट अंतरिक्ष प्रक्षेपण के दरवाज़े खुले


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 2 नवंबर को, भारतीय नौसेना के लिए जीसैट-7आर का प्रक्षेपण करके अपनी दक्षता को एक बार फिर से साबित किया है। दक्षता इसलिए क्योंकि देश के सबसे शक्तिशाली रॉकेट लॉन्च वेहिकल मार्क-3 (एलवीएम-3) का इसमें इस्तेमाल हुआ था, जिसकी भार वहन क्षमता मोटे तौर पर 4000 किलोग्राम की थी, पर उसने जिस उपग्रह का प्रक्षेपण किया, उसका भार 4,410 किलोग्राम था। भारतीय धरती से प्रक्षेपित यह अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह है।

सीएमएस-03 (जीसैट-7आर) सैन्य संचार उपग्रह है, जिसका वित्तपोषण पूरी तरह से रक्षा मंत्रालय ने किया है। इसे हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षित, मल्टी-बैंड संचार लिंक प्रदान करने के लिए भारतीय नौसेना के उपयोग के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है। यह उपग्रह पोतों, पनडुब्बियों और विमानों के बीच आवाज, डेटा और वीडियो लिंक के लिए संचार नेटवर्क का काम करेगा। मुख्य मिशन के रूप में इसका काम समुद्री सुरक्षा और निगरानी है। यह पुराने जीसैट-7 (रुक्मिणी) की जगह लेगा, जो 2013 से सेवा में है। जीसैट-7 और जीसैट-7ए देश के समर्पित सैन्य संचार उपग्रह हैं। दिसंबर 2018 में प्रक्षेपित जीसैट-7, मुख्यतः वायुसेना के लिए डिज़ाइन किया गया है। थलसेना आंशिक रूप से इसकी लगभग 30 प्रतिशत क्षमता का उपयोग करती है।

हमारे संचार उपग्रह अपेक्षाकृत भारी होते हैं। इसरो की कोशिश होती है कि एक ही अंतरिक्ष यान में व्यापक कवरेज, उच्च शक्ति और लंबी सेवा अवधि का मेल हो। पूरे देश और आस-पास के समुद्रों की कवरेज के लिए, संचार पेलोड को कई आवृत्ति बैंडों में कई चैनलों की आवश्यकता होती है। इसके लिए कई बड़े एंटेना, उच्च-शक्ति एम्पलीफायर, वेवगाइड, फ़िल्टर, स्विच कई एनालॉग ट्रांसपोंडरों या लचीले डिजिटल प्रोसेसर की आवश्यकता होती है। 12 से 15 साल तक कई किलोवाट बिजली की आपूर्ति के लिए, उपग्रहों में बड़े सौर पैनल, पर्याप्त बड़ी बैटरियाँ और पावर कंडीशनिंग इकाइयाँ होती हैं। इस वजह से वजन बढ़ता है।

चार हजार किलोग्राम से अधिक वज़न वाला जीसैट-7आर इसरो का यह पहला उपग्रह है, जिसे देश की धरती से दूरस्थ भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा में स्थापित किया गया है। इस प्रक्षेपण ने उस बाधा को तोड़ा, जो अपने प्रक्षेपकों की मदद से भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण से हमें रोकती थी।

Wednesday, November 5, 2025

बदलती भू-राजनीति और भारत-अमेरिका-चीन त्रिकोण


अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बयानों और टैरिफ को लेकर भारत और अमेरिका के बीच चलती तनातनी के दौरान दो-तीन घटनाएँ ऐसी हुई हैं, जो इस चलन के विपरीत हैं.

एक है, दोनों देशों के बीच दस साल के रक्षा-समझौते का नवीकरण और दूसरी चाबहार पर अमेरिकी पाबंदियों में छह महीने की छूट. इसके अलावा दोनों देश एक व्यापार-समझौते पर बात कर रहे हैं, जो इसी महीने होना है.

इन बातों को देखते हुए पहेली जैसा सवाल जन्म लेता है कि एक तरफ दोनों देशों के बीच आर्थिक-प्रश्नों को लेकर तीखे मतभेद हैं, तो सामरिक और भू-राजनीतिक रिश्ते मजबूत क्यों हो रहे हैं? उधर अमेरिका और चीन का एक-दूसरे के करीब आना भी पहेली की तरह है.

डॉनल्ड ट्रंप और शी चिनफिंग के बीच मुलाकात के बाद कुछ दिनों के भीतर  अमेरिकी युद्धमंत्री (या रक्षामंत्री) पीट हैगसैथ ने रविवार को बताया कि उन्होंने चीन के रक्षामंत्री एडमिरल दोंग जून से मुलाकात की और दोनों ने आपसी संपर्क को मजबूत करने और सैनिक-चैनल स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है.