दिल्ली सरकार के आबकारी मामले में अदालत से छुट्टी पाने के बाद आम आदमी पार्टी ने बड़ी तेजी से गतिविधियाँ शुरू कर दी हैं, जिसकी शुरुआत रविवार 1 मार्च को जंतर-मंतर पर मेगा रैली से होगी। पार्टी का कहना है कि इसमें मोहल्ला क्लीनिक से हटाए गए डॉक्टर, नर्स और दस हजार बस मार्शल भी शामिल होंगे, जिन्होंने अपनी नौकरी खो दी। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया, कंडक्टरों, बस मार्शलों, डॉक्टरों और फार्मेसिस्टों की ओर से मुद्दे उठाएँगे।
2025 के विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद अरविंद
केजरीवाल खामोश हो गए थे, तब उन्होंने कहा था कि जब तक अदालत उन्हें निर्दोष साबित
नहीं कर देती, तब तक उन्होंने चुप रहने का फैसला किया है। चूँकि अदालत ने उन्हें
क्लीन चिट दे दी है, इसलिए संभवतः वे फिर से गरजते-बरसते दिखी पड़ेंगे। दिल्ली में
विधानसभा चुनाव 2030 में होंगे, इसलिए फिलहाल उनकी सक्रियता का एक लक्ष्य राष्ट्रीय
स्तर पर संगठन को मजबूत करने का होगा। दूसरे वे 2027 में पंजाब और गुजरात के चुनाव
की तैयारी करेंगे, जहाँ उनकी पार्टी ने अपनी जगह बना ली है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस की शुरुआती प्रतिक्रिया से लगता है कि वह केजरीवाल की वापसी को वह बीजेपी की साजिश मानती है। बीजेपी देश भर में मुख्य विरोधी दल के रूप में ‘आप’ को खड़ा करना चाहती है। कांग्रेस की तरफ से पवन खेड़ा ने इस मुद्दे को लेकर मोर्चा खोला है। उन्होंने केजरीवाल के बरी होने को भाजपा के कांग्रेस मुक्त अभियान का हिस्सा बता दिया। उन्होंने कहा, भाजपा की तरफ से कांग्रेस मुक्त भारत का अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत केजरीवाल और सिसोदिया को रिहा किया गया है। उन्होंने कहा, अब आम आदमी पार्टी पंजाब, तमिलनाडु हर जगह चुनाव लड़ेगी। खेड़ा ने कहा कि भाजपा चुनाव के लिए केजरीवाल को धोकर लाई है और विपक्ष में कौन होगा, यह भी बीजेपी तय करना चाहती है। राष्ट्रीय राजनीति में, चूंकि इंडिया ब्लॉक के कई घटक दल कई मुद्दों पर कांग्रेस से सहमत नहीं हैं, इसलिए केजरीवाल के फिर से जोश में लौटने से आम आदमी पार्टी की स्थिति अब और भी मजबूत होगी।
माना जा रहा है कि अदालत के फैसले के बाद केजरीवाल की छवि में अचानक भारी
बदलाव आएगा। उनका कार्यकर्ता मानता है कि यह आदमी टेस्ट में पास हो गया है,
जेल से सजा काट कर लौटा है। उनके घर में नौकरों सहित किसी को भी
नहीं बख्शा गया, छापेमारी का सामना करना पड़ा और कुछ भी नहीं
मिला। पार्टी अब घर-घर जाकर लोगों को इस फैसले के बारे में बताएगी।
पार्टी ने पहले ही दिल्ली में मंडल स्तर पर
अभियान और सभाएँ शुरू कर दी हैं। पिछली 21 फरवरी से ऐसी 50-60 सभाएँ और बैठकें हो
रही हैं। अब जब फैसला आ गया है तो लोगों को इसके बारे में भी बताने का कार्यक्रम
बन रहा है।
लगता है कि अब यह घटनाक्रम ‘आप’ को और मजबूती प्रदान करेगा, जो राष्ट्रीय स्तर पर अपना विस्तार करना चाहती है और साथ ही पंजाब राज्य
में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है, जो अब तक उसका एकमात्र
गढ़ रहा है। इसका दिल्ली में पार्टी के संगठन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जहाँ केजरीवाल संभवतः अपने इस्तीफे की घोषणा के समय की तरह ही आत्मविश्वास
के साथ राजनीतिक सुर्खियों में लौटेंगे। इससे गोवा जैसे राज्यों में भी पार्टी के
संगठन निर्माण में तेजी आएगी, जहाँ पार्टी सत्ता परिवर्तन की
उम्मीद लगाए बैठी है।
पार्टी को सबसे बड़ा राजनीतिक लाभ गुजरात से मिल
सकता है, जहां केजरीवाल पार्टी के संगठनात्मक मोर्चे को खड़ा
करने में व्यक्तिगत रूप से निवेश कर रहे हैं, जिसे उन्होंने
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार भाजपा की तरह ही तैयार किया है।
अदालत का फैसला
दिल्ली की एक निचली अदालत ने कथित शराब नीति
घोटाले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो के मामले में शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री
अरविंद केजरीवाल और उनके पूर्व डिप्टी मनीष सिसौदिया समेत 21 अन्य को आरोप-मुक्त
कर दिया। यह मामला जुलाई 2022 में मुख्य सचिव नरेश कुमार की एक रिपोर्ट से सामने
आया था। नवंबर 2021 में राज्य में नई शराब नीति लागू की गई थी।
इस नीति के लागू होने के कुछ दिन बाद ही दिल्ली
पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को इस मामले में
गड़बड़ी की आशंका हुई। इसी अंदेशे के मद्देनज़र और जुलाई 2022 में दिल्ली के मुख्य
सचिव की रिपोर्ट के आधार पर मनीष सिसोदिया पर नियमों को तोड़ने-मरोड़ने और शराब के
लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ प्रदान करने का आरोप लगाते हुए, राज्यपाल ने सीबीआई जाँच के आदेश दिए।
मुख्य सचिव की रिपोर्ट में शराब नीति में
गड़बड़ी होने के साथ ही तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सिसोदिया पर शराब कारोबारियों को
अनुचित लाभ पहुँचाने का आरोप लगाया गया था। आरोप था कि आबकारी नीति को संशोधित
करने में अनियमितता बरती गई और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ दिया गया। नई नीति के
जरिए कोरोना के बहाने लाइसेंस की फीस माफ की गई। इस नीति से सरकारी खजाने को
144.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। रिश्वत के बदले शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाया
गया। यह नीति नवंबर 2021 में लागू हुई, लेकिन जुलाई 2022 में
इसे ख़त्म कर दिया गया।
विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने कहा कि आरोप
पत्र में कई खामियाँ थीं, जिनके पीछे सबूतों का आधार नहीं था। इस फैसले के बाद मीडिया
को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि भ्रष्टाचार का मामला स्वतंत्र भारत में ‘सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश’ थी। 2012 में एक राजनीतिक
दल के रूप में AAP का तेजी से उदय, कुछ
हद तक, उसके भ्रष्टाचार विरोधी मंच से जुड़ा था और 2025 के
विधान सभा चुनावों से पहले इस मामले ने भी महत्व प्राप्त किया था।
दो मामले
दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति के संबंध में पंजीकृत दो
मामले थे। एक सीबीआई द्वारा, और दूसरा, कथित मनी लॉन्ड्रिंग पर, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)
द्वारा। अदालत ने सीबीआई वाले मामले को खत्म कर दिया है। अभी ईडी वाला मामला बाकी
है। पार्टी के लगभग सभी शीर्ष नेता एक समय आबकारी नीति मामले में जेल में थे,
जिनमें केजरीवाल, सिसौदिया और सांसद संजय सिंह
शामिल थे।
इसके बाद दो समानांतर जाँचें हुईं: भ्रष्टाचार
निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत सीबीआई मामला, आधिकारिक
पद के कथित दुरुपयोग और आपराधिक साजिश की जांच, और धन शोधन
निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जाँच कि क्या कथित
अवैध लाभ अपराध की आय है। भारतीय कानून के तहत, मनी-लॉन्ड्रिंग
की कार्यवाही एक विधेय अपराध के अस्तित्व पर निर्भर करती है जो अवैध आय उत्पन्न
करती है। इस मामले में, भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई
द्वारा की जाती है।
विशेष रूप से, चूंकि
पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही एक अंतर्निहित अनुसूचित अपराध से
जुड़ी हुई है, इसलिए सीबीआई मामले में बरी होने से ईडी के
मामले पर काफी असर पड़ सकता है, हालाँकि इसकी निरंतरता आगे
की कार्यवाही में अनुमानित आरोपों की स्थिति पर निर्भर करेगी।
केजरीवाल का नाम मूल सीबीआई एफआईआर में नहीं था
लेकिन जाँच के बाद के चरणों के दौरान उनका नाम भी इसमें शामिल कर लिया गया। ईडी ने
अदालत में कहा कि आप प्रमुख दिल्ली उत्पाद शुल्क घोटाले के सरगना और मुख्य
साजिशकर्ता थे। ईडी ने कहा, वे आम आदमी पार्टी के गोवा चुनाव
अभियान में अपराध की आय के इस्तेमाल में भी शामिल थे, जिसके
वे...अंतिम निर्णयकर्ता हैं।
केजरीवाल ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि
जांचकर्ता उन्हें किसी भी रिश्वत या मौद्रिक लेनदेन से जोड़ने वाले प्रत्यक्ष सबूत
पेश करने में विफल रहे। उन्हें पहले से ही हिरासत में रहते हुए मार्च 2024 में ईडी
द्वारा और बाद में जून 2024 में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किया गया था।
राजनीतिक लाभ
अदालत के इस फैसले का सीधा असर अब 2027 के
गुजरात और पंजाब के चुनावों पर पड़ सकता है। 2022 के गुजरात विधानसभा के चुनाव का
एक बड़ा परिणाम था ‘आप’ का राष्ट्रीय मंच पर प्रवेश। गुजरात चुनावों में 12.9
प्रतिशत मत पाकर वह अब राष्ट्रीय पार्टी बनने की हकदार हो गई है। राष्ट्रीय पार्टी
बनने के लिए किसी दल को कुछ अन्य शर्तों के अलावा कम से कम चार राज्यों में अच्छी
उपस्थिति दर्शानी होती है तथा वहां के विधानसभा चुनाव में कम से कम दो सीट और छह
फीसदी मत हासिल करने होते हैं।
पार्टी उस वक्त दिल्ली और पंजाब में सत्ता में थी
और गोवा विधानसभा में उसे दो सीटों पर जीत मिली थी। पार्टी ने अपनी स्थापना के 10
साल से कम समय में यह मुकाम हासिल किया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में वह प्रमुख
विरोधी दल बनने की तरफ कदम बढ़ा सकती है। 2017 में कांग्रेस का वोट शेयर 41.44
फ़ीसदी था, जो इसबार 14.14 फ़ीसदी गिरकर 27.30 हो गया,
जो करीब पूरा का पूरा आम आदमी पार्टी के पास चला गया है। 2017 में
आप केवल 0.6 फ़ीसदी वोट हासिल कर सकी थी, और 2022 में उसे तकरीबन
13.0 फ़ीसदी वोट मिले।
2024 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले अप्रेल 2023
में आम आदमी पार्टी को चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता दे दी। उधर
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी
(एनसीपी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने अपनी राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा
खो दिया। चुनाव आयोग का निर्णय पार्टियों के चुनाव प्रदर्शन की समीक्षा पर आधारित
था। देश में अब छह राष्ट्रीय पार्टियाँ हैं - भाजपा, कांग्रेस,
बहुजन समाज पार्टी (बसपा), सीपीआई (एम),
नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और ‘आप’।
17 सितंबर, 2024 को
भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम चलाने वाले और बाद में दिल्ली के मुख्यमंत्री बने अरविंद
केजरीवाल ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। दिल्ली चुनाव कुछ ही महीनों
दूर थे, ऐसे में इस कदम को आम आदमी पार्टी (आप) और उसके
प्रमुख के लिए ‘अग्निपरीक्षा’ बताया गया, लेकिन
वास्तव में यह केजरीवाल की आबकारी नीति मामले में जेल से रिहाई के तुरंत बाद उठाया
गया एक राजनीतिक दाँव था। इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा क्योंकि आम आदमी पार्टी सत्ता
से बेदखल हो गई। भाजपा के जोरदार चुनावी अभियान में पार्टी और खुद केजरीवाल को उसी
भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया गया था, जिसके खिलाफ लड़ने का वे
दावा कर रहे थे।
सरकार के 11 साल के
कार्यकाल के दौरान स्कूल भवनों और अस्पतालों के निर्माण से लेकर जल आपूर्ति और
बिजली क्षेत्र में घोटालों तक के आरोप लगे, लेकिन शहर में
राजनीतिक माहौल तब बदलना शुरू हुआ जब आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ आरोप अधिक
तीखे और विशिष्ट हो गए। सत्येंद्र जैन से लेकर मनीष सिसोदिया और अंत में खुद
केजरीवाल तक, जिन पर एक ‘शीशमहल’ के निर्माण के मामले में आँखें मूँद लेने का आरोप लगा, ठीक वैसे ही जैसे आबकारी नीति के माध्यम से आम आदमी पार्टी के लिए रिश्वत के
मामले में हुआ था।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस की शुरुआती प्रतिक्रिया से लगता है कि
वह केजरीवाल की वापसी को वह बीजेपी की साजिश मानती है। बीजेपी देश भर में मुख्य
विरोधी दल के रूप में ‘आप’ को खड़ा करना चाहती है। कांग्रेस की तरफ से पवन
खेड़ा ने इस मुद्दे को लेकर मोर्चा खोला है। उन्होंने केजरीवाल के बरी होने को
भाजपा के कांग्रेस मुक्त अभियान का हिस्सा बता दिया। उन्होंने कहा, भाजपा की तरफ से कांग्रेस मुक्त भारत का अभियान चलाया जा रहा है। इसी
अभियान के तहत केजरीवाल और सिसोदिया को रिहा किया गया है। उन्होंने कहा, अब आम आदमी पार्टी पंजाब, तमिलनाडु हर जगह चुनाव
लड़ेगी। खेड़ा ने कहा कि भाजपा चुनाव के लिए केजरीवाल को धोकर लाई है और विपक्ष
में कौन होगा, यह भी बीजेपी तय करना चाहती है। राष्ट्रीय
राजनीति में, चूंकि इंडिया ब्लॉक के कई घटक दल कई मुद्दों पर
कांग्रेस से सहमत नहीं हैं, इसलिए केजरीवाल के फिर से जोश
में लौटने से आम आदमी पार्टी की स्थिति अब और भी मजबूत होगी।

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