स्पॉट फिक्सिंग सिर्फ क्रिकेट का मामला नहीं है। अब यह हमारे
खून में शामिल हो गई है। जबसे आईपीएल शुरू हुआ है यह बेशर्मी से चीयर गर्ल्स के साथ
नाचने लगी है। पिछले साल इन्हीं दिनों आईपीएल से जुड़े कुछ खिलाड़ियों पर स्पॉट फिक्सिंग
के आरोप लगे थे।
एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद पुणे वारियर्स के मोहनीश मिश्रा, किंग्स इलेवन पंजाब के शलभ श्रीवास्तव, डेकन चार्जर्स के
टी. पी. सुधींद्र,
किंग्स इलेवन पंजाब के अमित यादव और दिल्ली के अभिनव बाली को
सस्पेंड किया गया था। जाँच के बाद टीपी सुधीन्द्र को जीवन भर के लिए और शलभ श्रीवास्तव को पाँच साल के लिए बैन कर दिया गया।
बाकी तीन खिलाड़ियों
को लूज़ टॉक के कारण एक-एक साल के लिए बैन किया गया। एक साल का यह बैन इसी बुधवार को
खत्म हुआ था। यानी जिस दिन श्रीसंत एंड कम्पनी का मामला सामने आया।
उसी दिन अंतरऱाष्ट्रीय
ओलिम्पिक महासंघ के साथ भारत की ओलिम्पिक खेलों में वापसी को लेकर सकारात्मक बात हुई
थी। ओलिम्पिक खेलों का आईपीएल से कोई रिश्ता नहीं है, पर भारत में खेलों का जो कचूमर
निकला है उसमें आईपीएल कल्चर का हाथ है।
सन 2008 में जबसे आईपीएल शुरू हुआ है कोई साल ऐसा नहीं जाता
जब कोई विवाद खड़ा नहीं होता हो। बीसीसीआई ने कभी इसे गम्भीरता से नहीं लिया। पिछले
साल इस मामले में पुलिस जाँच की ज़रूरत नहीं समझी गई। उन दिनों अमित यादव ने मीडिया
के सामने ऐसा इशारा किया था कि टीम फ्रैंचाइज़ी खुद ही फिक्स कर देते हैं।


