Wednesday, February 4, 2026

पश्चिम एशिया की भूल-भुलैया में भारत


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महीने संभावित इसराइल-यात्रा से पहले, पिछले शनिवार को अरब विदेश मंत्रियों के साथ दूसरी बैठक की मेजबानी करके भारत ने स्पष्ट कर दिया कि पश्चिम एशिया में हमारी गहरी दिलचस्पी है और इस इलाके के आर्थिक-विकास में हम भी भागीदार हैं.

केवल इस इलाके की बात ही नहीं है, बल्कि विश्व-राजनीति में भी भारत की सक्रिय भूमिका बढ़ने जा रही है. यूके, ईयू और अमेरिका के साथ व्यापार और दीर्घकालीन नीतिगत समझौते होने के बाद यह स्पष्ट होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था पश्चिमी देशों के साथ ज्यादा बड़े स्तर पर जुड़ने जा रहा है.

बेहतर तरीके से वैश्विक-संतुलन बनाने में भारत भी महत्त्वपूर्ण किरदार निभाएगा. अरब विदेशमंत्रियों की बैठक की पृष्ठभूमि में डॉनल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस के गठन और उसमें शामिल होने के लिए भारत को प्राप्त आमंत्रण और उसपर चुप्पी पर भी ध्यान देना होगा. अकसर लोगों को लगता है कि भारत ने प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की. पश्चिम एशिया की जटिलता को देखते हुए तीखी प्रतिक्रियाएँ संभव नहीं है. संज़ीदा डिप्लोमेसी से ऐसी उम्मीद करनी भी नहीं चाहिए.

ध्यान दें कि गज़ा क्षेत्र के पुनर्निर्माण में भारत के लोगों और कंपनियों को भी काम मिलेगा. दूसरी तरफ ईरान में चल रहे आंदोलन और उसे लेकर अमेरिकी धमकियों पर भी हमें निगाहें रखनी होंगी. विदेश-नीति केवल नैतिक-आधारों पर नहीं चलती हैं. वे राष्ट्रीय हितों पर आधारित होती है. पश्चिम एशिया की डगर आसान नहीं है, क्योंकि वहाँ हर कदम पर जोखिम हैं, फिर भी भारतीय डिप्लोमेसी वहाँ संतुलित और शालीन तरीके से आगे बढ़ रही है.

Tuesday, February 3, 2026

राज्यपालों की भूमिका पर फिर खिंचीं तलवारें


तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक विधानसभाओं में राज्यपालों और राज्य सरकारों के बीच टकराव की खबरें इस साल भी आई हैं। ऐसा किसी न किसी रूप में पिछले कुछ वर्षों से हो रहा है। वर्तमान टकराव राज्य सरकारों द्वारा तैयार किए गए अभिभाषणों के पढ़ने से जुड़ा है। प्रत्यक्षतः ऐसा अनजाने में नहीं हो रहा है। इन मामलों से जुड़े सभी पक्ष संवैधानिक व्यवस्थाओं और उनसे जुड़ी मर्यादा-रेखाओं से भली भाँति परिचित हैं। राज्यपाल जानते-समझते हैं और राज्य सरकारें भी। तब ऐसा क्यों होता है?

इन राज्यों में मुख्यमंत्री और राज्यपालों के रिश्ते काफी समय से तनावपूर्ण रहे हैं। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कई बार स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर होने वाले राज्यपालों के ‘एट होम’ कार्यक्रमों का बहिष्कार कर चुके हैं। मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों के बीच सीधा संवाद बहुत कम है। इस वक्त तो चुनाव करीब हैं, इसलिए माहौल में वैसे ही गर्मी भरी है।

दक्षिण के जिन तीन राज्यों में विवाद खड़े हुए हैं, उनमें इंडिया गठबंधन का हिस्सा रही पार्टियों की सरकारें हैं, जो भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में बनी केंद्र सरकार के विरोध में हैं। ऐसे विवाद होते ही तभी हैं, जब केंद्र और राज्य की सरकारों का आपसी विरोध हो। बंगाल और पंजाब में भी इससे मिलते-जुलते प्रकरण हुए हैं।

राज्यपालों या राष्ट्रपति के लिए निर्वाचित सरकारों द्वारा तैयार किए गए भाषणों या विशेष संबोधनों को हूबहू पढ़ना एक संवैधानिक परंपरा है। यह ब्रिटिश परंपरा है, जिसपर आधारित भारत की संसदीय प्रणाली में भी उन्हीं परंपराओं के पालन की उम्मीद की जाती है। ऐसा कभी नहीं हुआ, जब ब्रिटिश राजा या रानी ने आधिकारिक भाषण को लेकर ना-नुकुर की हो।

Monday, February 2, 2026

‘नए हाईस्पीड भारत’ का रचनात्मक बजट


वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण के पहले वाक्य से ही नए भारत के निर्माण की घोषणा की है, जिसमें पाँच नए क्षेत्रीय मेडिकल हब, तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और पाँच विश्वविद्यालय टाउनशिप, सात नए हाई स्पीड ट्रेन कॉरिडोर और एक नया फ्रेट कॉरिडोर शामिल हैं। आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी, तेज शहरीकरण, परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर, सेवा क्षेत्र का विस्तार, उच्च शिक्षा, मेडिकल टूरिज़्म, नाभिकीय ऊर्जा और ज्ञान-आधारित ऑरेंज इकोनॉमीनए भारत के ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद आधुनिकीकरण की ज़रूरतों को देखते हुए रक्षा-व्यय में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है।

उन्होंने डायरेक्ट टैक्स और कस्टम ड्यूटी प्रणाली में बड़े बदलावों की घोषणा की है। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की अनिश्चितता और 50 फीसदी टैरिफ के असर को कम करने के लिए भी उन्होंने कुछ उपायों की घोषणा की है। उन्होंने कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी में कटौती, कंटेनर निर्माण और टेक्सटाइल मशीनरी के आधुनिकीकरण के लिए पूँजीगत सहायता की घोषणा की। हालाँकि आयकर में कमी की कोई घोषणा नहीं है, पर कहा है कि नया इनकम टैक्स क़ानून एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा। आयकर नियमों को और आसान बनाया जा रहा है, जिन्हें जल्द अधिसूचित किया जाएगा।

12.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के भारी पूँजी निवेश के बावज़ूद आगामी वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 4.3 प्रतिशत के नीचे आने की आशा है। कोविड काल में यह घाटा नौ प्रतिशत के ऊपर चला गया था। देश का ऋण-जीडीपी अनुपात घटकर 55.6 प्रतिशत होने की आशा है, जो चालू वित्तवर्ष के संशोधित अनुमानों में 56.1 फीसदी है। इससे पूँजी की उपलब्धता बेहतर होने की आशा है।  

Wednesday, January 28, 2026

‘ट्रंप-टैंट्रम’ के बाद यूरोप से ‘मदर ऑफ ऑल डील्स!’

गणतंत्र दिवस की परेड एक तरफ भारत की सांस्कृतिक-विविधता और सामरिक शक्ति का प्रदर्शन करती है, वहीं विदेश-नीति की झलक भी पेश करती है. कम से कम इस साल ऐसा ही हुआ है.

इस साल मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय संघ को बुलाया गया. यह पहला मौका था, जब 27 देशों के संघ को मुख्य अतिथि बनने का आमंत्रण दिया गया. 27 जनवरी को नई दिल्ली में यूरोपीय संघ के साथ एक व्यापार समझौते पर दस्तखत हो गए.

ईयू का प्रतिनिधित्व, यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय कौंसिल के प्रेसीडेंट एंटोनियो कोस्टा ने किया. उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जहाँ जर्मनी की रक्षामंत्री रह चुकी हैं, वहीं भारतीय मूल के कोस्टा पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री हैं.

स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक फोरम में शिरकत करते हुए उर्सुला वॉन डेर लेयेन कह चुकी हैं कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ होने जा रही है.

रक्षा और रणनीतिक भी

यह केवल व्यापार समझौता ही नहीं होगा, बल्कि रक्षा और दूसरे रणनीतिक मसलों पर भी सहमतियाँ बनने जा रही हैं. उर्सुला ने कहा कि यूरोप, अरब प्रायद्वीप के रास्ते महाद्वीप को भारत से जोड़ने वाले एक नए व्यापारिक गलियारे में निवेश करेगा.

Monday, January 26, 2026

चुनाव आयोग की साख और ममता की आक्रामक राजनीति की परीक्षा


पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया राजनीतिक-विवाद का विषय बन गई है, वैसे ही जैसे बिहार में विधानसभा चुनाव के पहले हुआ था। ममता बनर्जी ने इसे ऐसे राजनीतिक हथियार के रूप में पेश किया है, जो खासतौर से गरीब, प्रवासी, अल्पसंख्यक और अन्य कमजोर समुदायों के मतदाताओं को निशाना बनाता है, जिनके पास अक्सर सही दस्तावेज या स्थिर पते नहीं होते हैं।

निर्वाचन आयोग के अनुसार एसआईआर का उद्देश्य डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाना, त्रुटियों को ठीक करना और यह सुनिश्चित करना है कि पात्र मतदाताओं के नाम ही सूची में रहें। आयोग ने इस बात को भी रेखांकित किया है कि पश्चिम बंगाल में सूची का सत्यापन कर रहे चुनाव-कर्मचारियों के लिए धमकी भरे माहौल में काम करना मुश्किल हो रहा है। उसने राज्य की मुख्यमंत्री पर उत्तेजक भाषण देने, एसआईआर के बारे में भ्रामक दावे करने और जनता के मन में संदेह पैदा करने का आरोप लगाया है।

यह मसला अब सुप्रीम कोर्ट में है, जिसे तय करना है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता की रक्षा कैसे की जाए और उसके अधिकारियों के लिए सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों को कैसे सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी कि वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से कटने से किस प्रकार रोके जाएँ। क्या आयोग की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष है, जिसमें गलत तरीके से हटाए जाने के खिलाफ सुरक्षा उपाय हैं? और यह भी कि राज्य सरकार क्या संविधानिक संस्थाओं की आलोचना से जुड़ी मर्यादा-रेखा पार कर चुकी है?