नेपाल के गणतांत्रिक लोकतंत्र का सपना अचानक टूटता नज़र आ रहा है। सारे रास्ते बन्द नहीं हुए हैं, पर मई के पहले हफ्ते में जो उम्मीदें बनी थीं, वे बिखर गई हैं। देश के पाँचवें गणतंत्र दिवस यानी 27 मई को समारोहों की झड़ी लगने के बजाय, असमंजस और अनिश्चय के बादल छाए रहे। उम्मीद थी कि उस रोज नया संविधान लागू हो जाएगा और एक नई अंतरिम सरकार चुनाव की घोषणा करेगी। ऐसा नहीं हुआ, बल्कि संविधान सभा का कार्यकाल खत्म हो गया। और एक अंतरिम प्रधानमंत्री ने नई संविधान सभा के लिए चुनाव की घोषणा कर दी। पिछले चार साल की जद्दो-जेहद और तकरीबन नौ अरब रुपए के खर्च के बाद नतीज़ा सिफर रहा। चार साल के विचार-विमर्श के बावजूद तमाम राजनीतिक शक्तियाँ सर्व-स्वीकृत संविधान बनाने में कामयाब नहीं हो पाईं हैं। यह संविधान दो साल पहले ही बन जाना चाहिए था। दो साल में काम पूरा न हो पाने पर संविधान सभा का कार्यकाल दो साल के लिए और बढ़ाया गया। इन दो साल यानी 730 दिन में संविधान सभा सिर्फ 101 दिन ही बैठक कर पाई। विडंबना यह है कि मसला बेहद मामूली जगह पर जाकर अटका। मसला यह है कि कितने प्रदेश हों और उनके नाम क्या हों, इसे लेकर आम राय नहीं बन पाई।
Monday, June 4, 2012
Friday, June 1, 2012
राजनीति में लू-लपट का दौर
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हिन्दू में केशव का कार्टून |
दूसरे मंत्रियों की बात छोड़ दें तो प्रधानमंत्री पर जो आरोप लगाए गए हैं वे सन 2006 से 2009 के बीच कोयला खानों के 155 ब्लॉक्स के बारे में हैं जिन्हें बहुत कम फीस पर दे दिया गया। उस दौरान कोयला मंत्रालय प्रधानमंत्री के अधीन था। पहली नज़र में यह बात महत्वपूर्ण लगती है। खासतौर से कुछ महीने पहले एक अखबार में सीएजी की रपट इस अंदाज़ में प्रकाशित हुई थी कि कोई बहुत बड़ा घोटाला सामने आया है। सीएजी की ड्राफ्ट रपट में 10.67 लाख करोड़ के नुकसान का दावा किया गया था। इस लिहाज से यह टूजी मामले से कहीं बड़ा मामला है। पर क्या यह घोटाला है? क्या इसमें प्रधानमंत्री की भूमिका है? क्या इसके आधार पर कोई अदालती मामला बनाया जा सकता है? इन सब बातों पर विचार करने के बजाय सीधे प्रधानमंत्री को आरोप के घेरे में खड़ा करना उचित नहीं है। इसके साथ ही उनके लिए प्रयुक्त शब्द भी सामान्य मर्यादाओं के खिलाफ हैं।
Friday, May 25, 2012
आग सिर्फ पेट्रोल में नहीं लगी है
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हिन्दू में सुरेन्द्र का कार्टून |
Monday, May 21, 2012
वैश्विक आर्थिक संकट और अफगानिस्तान
जिस वक्त आप ये पंक्तियाँ पढ़ रहे हैं उस वक्त तक अफगानिस्तान में पाकिस्तान के रास्ते नेटो सेना की रसद सप्लाई पर लगी रोक हट चुकी होगी या हटाने की घोषणा हो चुकी होगी। या उसका रास्ता साफ हो चुका होगा। शिकागो में नेटो का शिखर सम्मेलन शुरू हो गया है जिसमें पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी शिरकत कर रहे हैं। विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर उनके साथ हैं। पाकिस्तानी राजनीति अमेरिका के साथ रिश्तों को आज भी ठीक से परिभाषित नहीं कर पाई है, पर किसी में हिम्मत नहीं है कि अमेरिका के रिश्ते पूरी तरह तोड़ सके। पिछले साल नवंबर में नेटो सेना के हैलिकॉप्टरों ने कबायली इलाके मोहमंद एजेंसी में पाकिस्तानी फौजी चौकियों पर हमला किया था, जिसमें 24 सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तानी सरकार ने उस हमले का कड़ा विरोध किया था और नेटो सेना की सप्लाई पर रोक लगा दी थी। इन दिनों नेटो के सैकड़ों वाहन पाकिस्तान के विभिन्न इलाकों में अफगानिस्तान जाने का इंतजार कर रहे हैं। समझौते की घोषणा होते ही वे चल पड़ेंगे। हालांकि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में पड़ी खटास का यह दौर फिलहाल खत्म हो जाएगा, पर दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास घर कर चुका है और लम्बे समय तक इसके दूर होने की आशा नहीं है।
Sunday, May 20, 2012
जेंटलमैंस गेम से कल्चरल क्राइम तक क्रिकेट
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हिन्दू में केशव का कार्टून |
एक ज़माने तक देश के सबसे लोकप्रिय खेल हॉकी और फुटब़ॉल होते थे। आज क्रिकेट है। ठीक है। देश के लोगों को पसंद है तो अच्छी बात है। अब यह सारे मीडिया पर हावी है। क्रिकेट की खबरें, क्रिकेट के विज्ञापन। बॉलीवुड के अभिनेता, अभिनेत्री क्रिकेट में और सारे देश के नेता क्रिकेट में। पिछले हफ्ते की कुछ खबरों को आधार बनाया जाए तो सारे अपराधी क्रिकेट में और सारे अपराध क्रिकेट में। पिछले हफ्ते बुधवार की रात मुम्बई के वानखेड़े स्टेडियम में कोलकाता नाइट रायडर्स टीम के मालिक शाहरुख खान और स्टेडियम के सिक्योरिटी स्टाफ के बीच ऐसी ठनी कि शाहरुख के वानखेड़े स्टेडियम में प्रवेश पर पाँच साल के लिए पाबंदी लगा दी गई। शाहरुख का रुख और बदले में की गई कार्रवाई दोनों के पीछे गुरूर नज़र आता है। लगता है मुफ्त की कमाई ने सबके दिमागों में अहंकार की आग भर दी है।
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