पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के करीब कामरा में वायुसेना के मिनहास बेस पर हमला काफी गम्भीर होती स्थितियों की ओर इशारा कर रहा है। पाकिस्तान का यह सबसे बड़ा एयरबेस होने के साथ-साथ यहाँ एटमी हथियार भी रखे गए हैं। जो शुरूआती जानकारी हासिल हुई है उसके अनुसार तकरीबन बारह हमलावर हवाई अड्डे में दाखिल हुए। इनमें से ज्यादातर ने आत्मघाती विस्फोट बेल्ट पहन रखे थे और एक ने खुद को उड़ा भी दिया था। सवाल केवल हवाई अड्डे की सुरक्षा का नहीं है, बल्कि ताकत का है जो इस तरह के हमलों की योजना बना रही है। अभी तक किसी ने इसकी ज़िम्मेदारी नहीं ली है, पर इसके पीछे तहरीके तालिबान पाकिस्तान का हाथ लगता है। इस्लामी चरपंथियों ने इससे पहले भी पाकिस्तान के फौजी ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें सबसे बड़ा हमला मई 2011 में कराची के पास मेहरान हवाई ठिकाने पर हुआ था। उसमें दस फौजी मारे गए थे, पर सबसे बड़ा नुकसान पी-3 ओरियन विमान को हुआ था, जो अत्याधुनिक टोही विमान है, जिसे अमेरिका ने गिफ्ट में दिया था।
Saturday, August 18, 2012
Monday, August 13, 2012
खेलों को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से नहीं जोड़ पाए हैं हम
लंदन ओलिम्पिक खेल भारत के लिए अब तक के सफलतम ओलिम्पिक्स थे। इससे पहले बीजिंग में हमने तीन मेडल जीते थे। इस बार उससे ज्यादा जीतने में सफल रहे। पर हम उतनी सफलता हासिल नही कर पाए, जिसकी उम्मीद थी। खास तौर से हमारी हॉकी टीम का प्रदर्शन बेहद खराब था। अभी तक हॉकी में हमारी टीम की स्थिति दुनिया में दसवें नम्बर पर थी जो इस बार उससे भी नीचे चली गई। पर इस लेख का उद्देश्य खेल-समीक्षा नहीं है, बल्कि इस ओलिम्पिक के बहाने खेल और समाज के रिश्तों को समझना है। ओलिम्पिक खेल राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जुड़ते हैं। पर मामला केवल प्रतिष्ठा का नहीं है। सामाजिक, सांस्कृतिक संरचना का परिचय भी खेलों से मिलता है।
Monday, August 6, 2012
पाकिस्तान के साथ कारोबारी राह पर चलने में समझदारी है
पिछले बुधवार को भारत सरकार ने पाकिस्तान के निवेशकों पर भारत में लगी रोक हटा ली। अब पाकिस्तानी निवेशक रक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष कार्यक्रमों के अलावा अन्य कारोबारों में निवेश कर सकेंगे। हालांकि यह घोषणा अचानक हुई लगती है पर ऐसा नहीं है। पाकिस्तानी निवेश को स्वीकार करने का फैसला दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रियों की अप्रेल में दिल्ली में हुई बैठक में कर लिया गया था। परोक्ष रूप में यह आर्थिक निर्णय लगता है और इसके तमाम महत्वपूर्ण आर्थिक पहलू हैं भी। फिर भी यह फैसला राजनीतिक है। उसी तरह जैसे पाकिस्तान की क्रिकेट टीम को भारत बुलाने का फैसला। दोनों देशों के रिश्ते बहुत मीठे न भी नज़र आते हों, पर ऐसा लगता है कि दोनों नागरिक सरकारों के बीच संवाद काफी अच्छे स्तर पर है। पाकिस्तान में एक बड़ा तबका भारत से रिश्ते बनाने के काम में लगातार अड़ंगे लगाता है। पर लगता है कि खेल, संगीत और कारोबारी रिश्ते दोनों देशों के बीच भरोसा कायम करने में मददगार होंगे।
Saturday, August 4, 2012
नए धमाके, पुराने सवाल
पुणे में एक घंटे के भीतर हुए चार धमाकों का संदेश क्या है? क्या यह नए गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को सम्बोधित हैं? कल ही भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने घोषणा की थी कि पाकिस्तानी नागरिक और कम्पनियाँ भारत में निवेश कर सकेंगी। क्या किसी को सम्बन्ध सामान्य बनाना पसन्द नहीं? या फिर कोई और बात है। किसी ने इसका सम्बन्ध अन्ना हज़ारे के आन्दोलन से जोड़ने की कोशिश भी की है। अटकलबाज़ियों में हमारा जवाब नहीं। किसी ने उत्तरी ग्रिड फेल होने को भी अन्ना आंदोलन को फेल करने की सरकारी साज़िश साबित कर दिया था। बहरहाल पुणे के धमाकों का असर इसीलिए मामूली नहीं मानना चाहिए कि उसमें किसी की मौत नहीं हुई। धमाके करने वाला यह संदेश भी देना चाहता है कि वह बड़े धमाके भी कर सकता था। पर पहले यह निश्चित करना चाहिए कि इसके पीछे किसी पाकिस्तान परस्त गिरोह का हाथ है या कोई और बात है।
Friday, August 3, 2012
किसने बिगाड़ा हमारा खेल
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| हिन्दू में केशव का कार्टून |
किसने सोख ली हमारी खेल प्रतिभा?
दो-दो एटम बमों से तबाह जापान ने विश्व युद्द के बाद बीस साल में जो चमत्कार किया उसे दिखाने के लिए उसने 1964 के तोक्यो ओलंपिक खेलों का इस्तेमाल किया। उस मौके का प्रतीक थी बुलेट ट्रेन जो ओलंपिक के मौके पर शुरू की गई थी। दूसरा विश्वयुद्ध न रोकता तो 1940 के ओलंपिक तोक्यो में होते। बहरहाल खेल और समाज का रिश्ता है। इस रिश्ते को जापान के बाद 1988 में दक्षिण कोरिया ने और 2008 में चीन ने शोकेस किया। ऐसी ही कोशिश 2010 के कॉमनवैल्थ गेम्स के मार्फत भारत ने की थी। सब कुछ ठीक रहता तो 2020 के ओलंपिक खेल भारत में कराने की पहल होती। पर अब ऐसा सम्भव नहीं है। 2016 के खेल ब्राज़ील में होंगे जिसे इस वक्त नई अर्थव्यवस्थाओं में भारत के साथ खड़ा किया जाता है। 2020 के खेल कहाँ होंगे इसका फैसला अगले साल सितम्बर में होगा। दावेदारों में इस्तांबूल और मैड्रिड के साथ तोक्यो भी है, भारत नहीं।
Tuesday, July 24, 2012
Amelia Earhart in Google Logo गूगल लोगो पर अमेलिया इयरहार्ट
आज का गूगल लोगो अमेलिया इयरहार्ट पर है। इस जाँबाज़ हवाबाज़ को पहली बार अकेले अटलांटिक महासागर पार करने का श्रेय जाता है। 1937 में यह दुनिया का चक्कर लगाने के प्रयास में प्रशांत महासागर के ऊपर कहीं लापता हो गई और आजतक यादों में है। गूगल लोगो के सहारे मनोरंजन और ज्ञानवर्धन दोनों होते हैं। मैने इसके पहले अनंत पै के गूगल लोगों पर पोस्ट लिखी थी।
Amelia Mary Earhart (/ˈɛərhɑrt/ air-hart; July 24, 1897 – disappeared 1937) was a noted American aviation pioneer and author.[1][N 1] Earhart was the first aviatrix to fly solo across the Atlantic Ocean[3]. She received the U.S. Distinguished Flying Cross for this record.[4].She set many other records,[2] wrote best-selling books about her flying experiences and was instrumental in the formation of The Ninety-Nines, an organization for female pilots.[5] Earhart joined the faculty of the Purdue University aviation department in 1935 as a visiting faculty member to counsel women on careers and help inspire others with her love for aviation. She was also a member of the National Woman's Party, and an early supporter of the Equal Rights Amendment.[6][7]
During an attempt to make a circumnavigational flight of the globe in 1937 in a Purdue-funded Lockheed Model 10 Electra, Earhart disappeared over the central Pacific Ocean near Howland Island. Fascination with her life, career and disappearance continues to this day.[N 2]
Friday, July 20, 2012
राहुल को चाहिए एक जादू की छड़ी
राहुल ने नौ साल लगाए राजनीति में ज्यादा बड़ी भूमिका स्वीकार करने में। उनका यह विचार बेहतर था कि पहले ज़मीनी काम किया जाए, फिर सक्रिय भूमिका निभाई जाए। पर यह आदर्श बात है। हमारी राजनीति आदर्श पर नहीं चलती। और न राहुल किसी आदर्श के कारण महत्वपूर्ण हैं। वे तमाम राजनेताओं से बेहतर साबित होते बशर्ते वे उस कांग्रेस की उस संस्कृति से बाहर आ पाते जिसमें नेता को तमाम लोग घेर लेते हैं। बहरहाल अब राहुल सामने आ रहे हैं तो अच्छा है, पर काम मुश्किल है। नीचे पढ़ें जनवाणी में प्रकाशित मेरा लेख
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| हिन्दू में सुरेन्द्र का कार्टून |
Monday, July 16, 2012
इस बार भी वक्त से पहले दम तोड़ेगी पाकिस्तान की नागरिक सरकार
Wednesday, July 11, 2012
Hanging Temple of Henseng, China चीन की हेंगसेंग पहाड़ी पर हैंगिग बुद्ध मंदिर
अद्भुत विश्व-1
Amazing World-1

The Hanging Temple or Hanging Monastery (simplified Chinese: 悬空寺; traditional Chinese: 懸空寺; pinyin: Xuánkong Sì) is a temple built into a cliff (75 m or 246 ft above the ground) near Mount Heng in Hunyuan County, Shanxi province, China. The closest city is Datong, 64.23 kilometers to the northwest. Along with the Yungang Grottoes, the Hanging Temple is one of the main tourist attractions and historical sites in the Datong area. Built more than 1,500 years ago, this temple is notable not only for its location on a sheer precipice but also because it includes Buddhist, Taoist, and Confucian elements. The structure is kept in place with oak crossbeams fitted into holes chiseled into the cliffs. The main supportive structure was hidden inside the bedrock.According to the history of Shangshen Mountain, construction of the temple was by only one man, a monk named Liao Ran (了然). Over a history of more than 1,600 years many repairs and extension led to its present day scale.This temple is over 50 meters tall. From Wikipedia
चीन के शांची प्रांत में हेंग पहाड़ी पर बना यह बुद्ध मंदिर हैरत जगाता है। अब से लगभग 1600 साल बने इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसे लियाओ रन नामक भिक्षु ने अकेले बनाया। मंदिर से कम रोचक नहीं है इस तक पहुँचने का रास्ता। कई जगह तो केवल छेनी से चट्टान काटकर इसे बनाया गया है।
Hanging Temple of Mount Heng
Hanging Temple of Mount Heng
Tuesday, July 10, 2012
राष्ट्रपति-चुनाव से जुड़ी अटपटी-चटपटी राजनीति
भारतीय जनता पार्टी ने धमकी दी है कि प्रणव मुखर्जी राष्ट्रपति पद का चुनाव जीत भी गए तो उनके खिलाफ चुनाव याचिका दायर की जाएगी। रिटर्निंग अफसर वीके अग्निहोत्री द्वारा विपक्ष की आपत्ति खारिज किए जाने के बाद अब सोमवार को जनता पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी कुछ नए प्रमाणों के साथ एक नई शिकायत दर्ज कराएंगे। रिटर्निंग अफसर ने विपक्ष की इस आपत्ति को खारिज कर दिया था कि प्रणव मुखर्जी चूंकि भारतीय सांख्यिकी संस्थान के अध्यक्ष पद पर काम कर रहे हैं जो लाभ का पद है इसलिए उनका नामांकन खारिज कर दिया जाए। रिटर्निंग अफसर का कहना है कि प्रणव मुखर्जी ने 20 जून को यह पद छोड़ दिया था।
भाजपा नेता सुषमा स्वराज का कहना है कि प्रणव मुखर्जी नामांकन पत्र दाखिल करने के पहले इस्तीफा नहीं दे पाए थे। यह इस्तीफा बाद में बनाया गया, जिसमें प्रणव मुखर्जी के दस्तखत भी जाली हैं। यह इस्तीफा संस्थान के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। यह 20 जून को लिखा गया, उसी रोज कोलकाता भेजा गया, उसी रोज स्वीकार होकर वापस आ गया। यह फर्जी है। बहरहाल इस मामले में जो भी हो, देखने की बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी इतने तकनीकी आधार पर इस मामले को क्यों उठा रही है? इससे क्या उसे कोई राजनीतिक लाभ मिल पाएगा? दो महीने पहले लगता था कि इस बार कांग्रेस के लिए राष्ट्रपति चुनाव भारी पड़ेगा और एनडीए उसे अर्दब में ले लेगा, पर ऐसा हुआ नहीं। एनडीए ने एक ओर तो अपना प्रत्याशी तय करने में देरी की, फिर अपने दो घटक दलों शिव सेना और जनता दल युनाइटेड को यूपीए प्रत्याशी के समर्थन में जाने से रोक नहीं पाया। और अब यह तकनीकी विरोध बचकाना लगता है। शुरू में सुषमा स्वराज ने कहा था कि हम कांग्रेस प्रत्याशी का समर्थन नहीं करेंगे, क्योंकि 2014 के चुनाव में हम यूपीए से सीधे मुकाबले में हैं। यह हमारे लिए राजनीतिक प्रश्न है।
भाजपा नेता सुषमा स्वराज का कहना है कि प्रणव मुखर्जी नामांकन पत्र दाखिल करने के पहले इस्तीफा नहीं दे पाए थे। यह इस्तीफा बाद में बनाया गया, जिसमें प्रणव मुखर्जी के दस्तखत भी जाली हैं। यह इस्तीफा संस्थान के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। यह 20 जून को लिखा गया, उसी रोज कोलकाता भेजा गया, उसी रोज स्वीकार होकर वापस आ गया। यह फर्जी है। बहरहाल इस मामले में जो भी हो, देखने की बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी इतने तकनीकी आधार पर इस मामले को क्यों उठा रही है? इससे क्या उसे कोई राजनीतिक लाभ मिल पाएगा? दो महीने पहले लगता था कि इस बार कांग्रेस के लिए राष्ट्रपति चुनाव भारी पड़ेगा और एनडीए उसे अर्दब में ले लेगा, पर ऐसा हुआ नहीं। एनडीए ने एक ओर तो अपना प्रत्याशी तय करने में देरी की, फिर अपने दो घटक दलों शिव सेना और जनता दल युनाइटेड को यूपीए प्रत्याशी के समर्थन में जाने से रोक नहीं पाया। और अब यह तकनीकी विरोध बचकाना लगता है। शुरू में सुषमा स्वराज ने कहा था कि हम कांग्रेस प्रत्याशी का समर्थन नहीं करेंगे, क्योंकि 2014 के चुनाव में हम यूपीए से सीधे मुकाबले में हैं। यह हमारे लिए राजनीतिक प्रश्न है।
Monday, July 9, 2012
नया वैश्विक सत्य, उन्माद नहीं सहयोग
दिफाए पाकिस्तान कौंसिल ने रविवार को लाहौर से लांग मार्च शुरू किया है, जिसका उद्देश्य नेटो सेनाओं की रसद सप्लाई पर लगी रोक हटाने के खिलाफ नाराज़गी जताना है। इस बीच अमेरिका ने अफगानिस्तान को गैर-नेटो देशों में अपने सामरिक साझीदारों की सूची में शामिल करके आने वाले समय में इस इलाके के सत्ता संतुलन का संकेत दिया है। पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान को समझ में आने लगा है कि यह वक्त आर्खिक सहयोग का है, टकराव का नहीं, पर वहाँ का कट्टरपंथी तबका इस बात को समझने के लिए तैयार नहीं है।
हाल में भारत आए पाकिस्तान के विदेश सचिव जलील अब्बास जीलानी और भारत के विदेश सचिव रंजन मथाई के बीच दो दिन की बातचीत के बाद हुई प्रेस कांफ्रेस में दोनों सचिवों ने मीडिया से अपील की कि वह दोनों देशों के बीच टकराव का माहौल न बनाए। इस बातचीत का मकसद दोनों देशों के बीच रिश्तों को बेहतर बनाना था, जिसमें जम्मू-कश्मीर, आतंकवाद और भरोसा बढ़ाने वाले कदम (सीबीएम) शामिल हैं। दोनों देशों के रिश्ते जिस भावनात्मक धरातल पर हैं, उसमें सबसे बड़ा सीबीएम मीडिया के हाथ में है। जब भी भारत और पाकिस्तान का मैच खेल के मैदान पर होता है मीडिया में ‘आर्च राइवल्स’, परम्परागत प्रतिद्वंदी, जानी दुश्मन जैसे शब्द हवा में तैरने लगते हैं। किसी एक की विजय पर उस देश में जिस शिद्दत के साथ समारोह मनाया जाता है तकरीबन उसी शिद्दत से हारने वाले देश में शोक मनाया जाता है। इसके विपरीत दोनों देशों के बीच की सरकारी शब्दावली पर जाएं तो उसमें काफी बदलाव आ गया है। ताजा संयुक्त वक्तव्य को पढ़ें तो यह फर्क समझ में आएगा। पर दोनों विदेश सचिवों के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बातें बार-बार अबू जुंदाल पर जा रहीं थीं।
Sunday, July 8, 2012
The Amazing Road Making Machine
Tiger Stone | The Amazing Paving Machine :
Laying down paving bricks is back-breaking, time-consuming work. Henk van Kuijk, director of Dutch industrial company Vanku, evidently decided that squatting/kneeling and shoving the bricks into place on the ground was just a little too slow, so he invented the Tiger Stone paving machine. The road-wide device is fed loose bricks, and lays them out onto the road as it slowly moves along. A quick going-over with a tamper, and you’ve got an instant brick road. It is a brick printer or you can say road laying machine. If this tool is in the hands of some artist and designer it can create artistic roads. This machine could be used to make some insane patterns and murals. Using it to make type or inset lettering into could be super cool as well.
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