आज, हिंदू के पहले पेज पर एक रोचक तस्वीर छपी है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग टोकरियाँ लेकर एक जलधारा की सफाई करते नज़र आ रहे हैं। यह तस्वीर दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड के पंजाथ नाग गाँव के लोगों की है, जिन्होंने अपने पूर्वजों की सदियों पुरानी परंपरा को आज भी कायम रखा है। यहाँ धान की रोपाई से पहले झरनों की सफाई के साथ-साथ मछली पकड़ने की प्रतियोगिता होती है। यह एक स्थानीय पर्व के रूप में उभरा है, जो अब दूसरे गाँवों के लोगों को भी आकर्षित करता है।
अब यहाँ आसपास के करीब 45 समुदायों के लोग एकत्र
होकर पानी की सफाई करते हैं और निर्धारित मानकों के भीतर रहते हुए मछलियाँ भी
पकड़ते हैं। यह झरना स्थानीय अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है, क्योंकि इससे नीचे की ओर स्थित कई गांवों की सिंचाई होती है और लगभग 25 गाँवों
को पीने का पानी मिलता है।
इस झरने और इसके संरक्षण का उल्लेख कल्हण रचित 12वीं
सदी के ऐतिहासिक ग्रंथ राज तरंगिणी में भी किया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार,
पंजाथ अर्थात पाँच हाथ, जो 500 झरनों का प्रतिनिधित्व करता है,
जिसमें पीर पंजाल की तलहटी पर स्थित झरने भी शामिल हैं। माना जाता
है कि एक समय में इस गाँव में 500 से अधिक प्राकृतिक झरने हुआ करते थे।
पंजाथ झरना काजीगुंड के सैकड़ों परिवारों के लिए
सिंचाई और पीने के पानी का एक मुख्य स्रोत है। हर साल धान की खेती शुरू होने से
पहले स्थानीय निवासी उचित सिंचाई व्यवस्था के लिए गाद और खरपतवार हटाकर जलाशय को
साफ करते हैं। इस उत्सव को देखने 50 किलोमीटर दूर से भी लोग आते हैं।
हर साल मई के तीसरे या चौथे सप्ताह में ग्रामीण
एक दिन चुनते हैं जब सेब, बादाम और अखरोट के बाग फूलों से
भरे होते हैं। 500 मीटर के क्षेत्र में फैले पंजाथ नाग की सफाई करते हैं और मछली
पकड़ते हैं। यह एक ऐसी परंपरा है जो उन्हें पूर्वजों से विरासत में मिली है। लोग
इस दिन पकड़ी गई मछलियों को घर ले जाते हैं और उस दिन दोस्तों और परिवार के लिए
दावत मनाते हैं।




