Wednesday, February 26, 2025

थरूर का महत्व और सम्मान बढ़ेगा, कम नहीं होगा


शशि थरूर के विचारों को लेकर कांग्रेस के भीतर और बाहर की अटकलों से लगता है कि वे अंततः पार्टी छोड़ देंगे। मुझे नहीं लगता कि वे पार्टी छोड़ेंगे, पर भारतीय-राजनीति में भरोसे के साथ कुछ भी कहना ठीक नहीं। जैसा भी हो, वे पार्टी छोड़ें या नहीं छोड़ें, उनका महत्व कम नहीं होगा, बल्कि बढ़ेगा। अलबत्ता कांग्रेस के आंतरिक-लोकतंत्र को लेकर जो बातें हैं, वे खत्म नहीं होंगी। 2022 में जब मल्लिकार्जुन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे, तब भी दो-तीन बातों की तरफ राजनीतिक-पर्यवेक्षकों का ध्यान गया था। करीब 24 साल बाद कांग्रेस की कमान किसी गैर-गांधी के हाथ में आई थी, पर जिस बदलाव की आशा पार्टी के भीतर और बाहर से की जा रही है, वह केवल इतनी ही नहीं थी। पार्टी के असंतुष्टों की, जिसे जी-23 के नाम से पहचाना गया था, माँग थी कि पार्टी में आंतरिक चुनाव कराए जाएँ। खरगे जी के चुनाव ने एक औपचारिकता को पूरा किया, पर यह सिर्फ औपचारिकता थी। सब जानते थे कि वे ‘परिवार’ के प्रत्याशी हैं। 

खरगे जी के आने के बाद ऐसा कभी नहीं हुआ कि पार्टी की कमान उनके हाथों में आ गई हो। राहुल गांधी निर्विवाद रूप से पार्टी के नेता हैं। अध्यक्ष पद का चुनाव हो गया, पर कार्यसमिति का नहीं हुआ। अब 14 फरवरी को पार्टी ने एक बड़ा संगठनात्मक फेरबदल फिर किया है, जिसमें वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की छाप देखी जा सकती है। राहुल गांधी इस समय अजा-जजा, ओबीसी और मुसलमानों पर आधारित राजनीति  पर चल रहे हैं। यह राह उन्हें उत्तर भारत में सपा और राजद जैसी पार्टियों की प्रतिस्पर्धा में ले जाएँगी, जो सही राह है। बहरहाल इस आलेख का उद्देश्य पार्टी के आंतरिक-लोकतंत्र पर या पार्टी के राजनीतिक एजेंडा पर विचार करना नहीं है, बल्कि शशि थरूर की वह टिप्पणी है, जो उन्होंने केरल की वाममोर्चा सरकार के बारे में लिखे गए अपने एक लेख में की है। 

इस लेख में उन्होंने राज्य में कारोबारियों को दी जा रही सुविधाओं की तारीफ करते हुए लिखा है कि भारत की, और खासतौर से केरल की अर्थव्यवस्था स्टार्टअप छा गए हैं। 2024 ग्लोबल स्टार्टअप इकोसिस्टम रिपोर्ट के अनुसार, जिसने 300 से ज़्यादा उद्यमी नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों में 4.5 मिलियन से ज़्यादा कंपनियों के डेटा का विश्लेषण किया, केरल ने एक स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाया है, जिसका पिछले साल 18 महीने की अवधि के अंत में मूल्य 1.7 अरब डॉलर था, जो इसी अवधि के दौरान वैश्विक औसत से पाँच गुना ज़्यादा था। 1 जुलाई, 2021 और 31 दिसंबर, 2023 के बीच, जबकि दुनिया भर में औसत वृद्धि 46 प्रतिशत थी, केरल ने 254 प्रतिशत की चौंका देने वाली चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की: अभूतपूर्व उपलब्धि।

उन्होंने लिखा, एक या दो साल पहले ही कहा गया था कि सिंगापुर या अमेरिका में व्यवसाय खोलने में तीन दिन लगते हैं, जबकि भारत में औसतन 114 दिन लगते हैं, और केरल में 236 दिन। अब कुछ हफ़्ते पहले ही केरल के उद्योग मंत्री पी राजीव ने घोषणा की कि अब केरल में कोई भी व्यक्ति ‘दो मिनट’ में व्यवसाय खोल सकता है…जैसा कि राजीव ने बताया, केरल ने व्यापार करने में आसानी के मामले में अपनी रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार किया है. वह 29 राज्यों में 28वें स्थान पर होता था, और अब शीर्ष पर पहुँच गया है। 

थरूर ने जो कुछ लिखा, उसमें कोई बड़े अचरज की बात नहीं है, सिवा इसके कि आज की भारतीय राजनीति में प्रतिस्पर्धी राजनीतिक दल की प्रशंसा अटपटी लगती है, भले ही वह जायज़ हो। थरूर, इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर चुके हैं। अब पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार की तारीफ करके उन्होंने अपने लिए  मुश्किल मोल ले ली है। लगता नहीं कि उन्होंने ऐसा अनायास या नादानी में किया होगा। उन्होंने अपनी छवि निडरता से विचार व्यक्त करने वाले व्यक्ति की बनाई है। 

इस मामले में विवाद खड़ा होने पर उन्होंने कहा, मैं राजनेता की तरह नहीं सोचता। मेरे पास कभी संकीर्ण राजनीतिक विचार नहीं रहे हैं। मैंने कभी भी किसी ऐसी चीज पर टिप्पणी करने से पहले राजनीतिक निहितार्थों के बारे में नहीं सोचा, जिसके बारे में मैं आश्वस्त हूं। यही कारण है कि मैं कभी-कभी सरकारों या पार्टियों की अच्छी पहलों की प्रशंसा करता हूं जो कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वी हैं। 

उन्होंने कहा कि निवेश के मुद्दे पर वाम सरकार की सराहना करने वाला उनका लेख तथ्यों पर आधारित है और यदि कोई विपरीत बात मेरी जानकारी में लाई गई, तो मैं अपना रुख बदलने के लिए तैयार हूँ। मैं सिर्फ़ केरल के लिए बोल और लिख रहा हूँ, किसी और के लिए नहीं। हालाँकि उन्होंने इस लेख के प्रकाशन के बाद राहुल गांधी से मुलाकात करके अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, फिर भी कयास हैं कि उन्हें पार्टी ने हाशिए पर डाल दिया है और शायद उन्हें पार्टी छोड़नी पड़े वगैरह। 

पार्टी बदलने के बारे में अफवाहों को नकारते हुए थरूर ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी पार्टी में कुछ बातों से सहमत नहीं है तो पार्टी बदलना सही नहीं होगा। शायद विवाद बढ़ाने वाली बातों के जवाब में उन्होंने कहा कि कांग्रेस को मेरी सेवाओं की जरूरत नहीं है, तो मेरे पास ‘विकल्प’ हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या वे खरगे के खिलाफ पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के बाद उपेक्षित महसूस कर रहे थे, थरूर ने कहा कि नेतृत्व ने उसके बाद मुझे कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) का सदस्य बनाने की कृपा की थी।

कांग्रेस के नेताओं ने भी उनके पाला बदलने की अटकलों को खारिज किया है, वहीं एलडीएफ नेताओं ने उनकी सराहना की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नीथला ने कहा कि थरूर ने राहुल गांधी से मिलने से पहले यह बात कही है। पार्टी के नेता केएम मुरलीधरन ने कहा, शशि थरूर को कांग्रेस पार्टी से कोई समस्या है, तो उसे पार्टी के भीतर ही सुलझाया जाना चाहिए। किसी को भी पार्टी नहीं छोड़नी चाहिए। वह संसद में बहस के दौरान और खासकर राष्ट्रीय राजनीति में अच्छा योगदान दे सकते हैं। ऐसे समय में जब निजी विश्वविद्यालयों और उद्योगों में वृद्धि हो रही है, थरूर युवाओं का समर्थन हासिल कर सकते हैं।

इस दौरान थरूर की बातों पर ध्यान देने की जरूरत भी है। 2024 के लोकसभा चुनावों में हल्की सी बढ़त मिलने के बाद कांग्रेस को लगातार विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में थरूर ने कहा कि पार्टी को अपने प्रतिबद्ध मतदाता आधार से परे लोगों को आकर्षित करने की जरूरत है और कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से जो समर्थन मिला वह इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस ने अपनी अपील बढ़ाने की कोशिश नहीं की, तो वह केरल में लगातार तीसरी बार विपक्ष में बैठेगी, जहाँ अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। 

उन्होंने कहा राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर, कांग्रेस केवल अपने प्रतिबद्ध वोट आधार के साथ नहीं जीत सकती। यह एक वास्तविकता है। अगर आप राष्ट्रीय स्तर पर देखें, तो कांग्रेस का वोट लगभग 19% था। क्या हम अपने स्वयं के वोट आधार के साथ ठीक रहेंगे? अगर हमें 26-27% अतिरिक्त मिलता है, तो ही हम सत्ता में आ सकते हैं। इसलिए, हमें उन लोगों की ज़रूरत है जिन्होंने पिछले दो चुनावों में हमारा समर्थन नहीं किया है। अलबत्ता उन्होंने पार्टी की विचारधारा और विचारों को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस के भीतर एक मजबूत संगठनात्मक ढांचे की भी माँग की और कहा कि भाजपा इस मामले में सभी राज्यों में पार्टी से आगे है।

थरूर का महत्व

कांग्रेस में शशि थरूर 2009 में शामिल हुए थे। इस लिहाज से वे नए नेता हैं। खरगे के खिलाफ चुनाव में वे हार जरूर गए, पर महत्वपूर्ण नेता बनकर उभरे हैं। उन्हें मिले 1,072 वोट भले ही बहुत ज्यादा नहीं थे, पर इतने कम भी नहीं कि उनकी अनदेखी की जाए। 1997 में हुए पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में सीताराम केसरी के खिलाफ शरद पवार को 882 और राजेश पायलट को 354 वोट मिले थे। इसके बाद 2000 में सोनिया गांधी के मुकाबले जितेंद्र प्रसाद को 94 वोट मिले थे। चुनाव प्रचार के दौरान खबरें थीं कि किसी स्तर पर कार्यकर्ताओं पर दबाव था कि वे खरगे को वोट दें। साफ है कि पार्टी के 12 फीसदी के आसपास कार्यकर्ताओं ने दबाव का सामना भी किया और वे बदलाव चाहते हैं। यह पूरी तरह स्पष्ट था कि खरगे हाईकमान के प्रत्याशी हैं। शशि थरूर ने इस बात को स्थापित किया कि वे परिवार के प्रभामंडल से बाहर रहते हुए भी कांग्रेस के प्रतिबद्ध कार्यकर्ता बने रह सकते हैं। उनकी बातों को अब ज्यादा गौर से सुना जाएगा। 



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