Sunday, June 28, 2015

भारत को बदनाम करने की पाक-हड़बड़ी

पाकिस्तानी मीडिया में छह पेज का एक दस्तावेज प्रकाशित हुआ है, जो दरअसल ब्रिटेन की पुलिस के सामने दिया गया एक बयान है। इसमें मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट के वरिष्ठ नेता तारिक मीर ने स्वीकार किया है कि भारतीय खुफिया संगठन रॉ ने हमें पैसा दिया और हमारे कार्यकर्ताओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी दी। यह दस्तावेज आज के इंडियन एक्सप्रेस में भी छपा है। इस दस्तावेज को जारी करने वाले ने इसके काफी हिस्सों को छिपाकर केवल कुछ हिस्से ही जारी किए हैं। इतना समझ में आता है कि ये दस्तावेज़ पाकिस्तान सरकार के इशारे पर जारी हुए हैं। इसके दो-तीन दिन पहले बीबीसी टीवी और वैब पर एक खबर प्रसारित हुई थी, जिसमें इसी आशय की जानकारी थी। पाकिस्तानी मीडिया में इस दस्तावेज के अलावा बैंक एकाउंट वगैरह की जानकारी भी छपी है। जब तक इन बातों की पुष्टि नहीं होती, यह कहना मुश्किल है कि जानकारियाँ सही हैं या नहीं। अलबत्ता पाकिस्तान सरकार अपने देश में लोगों को यह समझाने में कामयाब हो रही है कि भारतीय खुफिया संगठन उनके यहाँ गड़बड़ी फैलाने के लिए सक्रिय है। इससे उसके दो काम हो रहे हैं। एक तो भारत बदनाम हो रहा है और दूसरे एमक्यूएम की साख गिर रही है। अभी तक पाकिस्तान के खुफिया अभियानों की जानकारी ज्यादातर मिलती थी। इस बार भारत के बारे में जानकारी सामने आई है। फिलहाल वह पुष्ट नहीं है, पर यह समझने की जरूरत है कि ये बातें इस वक्त क्यों सामने आईं और बीबीसी ने इसे क्यों उठाया, जबकि जानकारियाँ पाकिस्तान सरकार ने उपलब्ध कराईं।


कोई दिन नहीं जाता जब दुनिया में दहशतगर्दी से जुड़ी वारदात होती न हो। पर शुक्रवार को तीन महाद्वीपों में एक साथ हुई तीन वारदात ने खतरनाक संदेश दिया है। फ्रांस, कुवैत और ट्यूनीशिया में हुए आतंकी हमलों से यह भी पता लगता है कि आतंकवाद की जहरीली हवा बड़ी तेजी से दुनिया के उन इलाकों तक फैल रही है, जो अभी तक इससे बचे हुए थे। इन घटनाओं का भारत से वास्ता नहीं, पर भारत के लिहाज से पिछले हफ्ते कुछ परेशान करने वाली खबरें मिलीं।

पहली खबर थी ज़की-उर-रहमान लखवी की पाकिस्तान में हुई रिहाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र में भारतीय शिकायत पर चीन का वीटो। भारत ने शिकायत की थी कि 26/11 के मुंबई हमलों के मुख्य अभियुक्त को रिहा कर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 1267 का उल्लंघन किया है। इस संकल्प के तहत सभी सदस्य देशों को किसी भी घोषित चरमपंथी संगठन, उससे जुड़े लोगों की आवाजाही और पैसा जमा करने के रास्तों को पूरी तरह बंद करना होता है। लखवी के संगठन लश्करे तैयबा को संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित संगठन घोषित कर रखा है, फिर भी चीन ने इस मामले में विशेषाधिकार का इस्तेमाल किया।

यह पहला मौका नहीं है जब चीन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर गैर-दोस्ताना हरकत की है। दो दशक पहले तक अमेरिका भी पाकिस्तानी आतंकवाद की इसी तरह अनदेखी करता था। पिछले हफ्ते की एक और खबर इस सिलसिले में सोचने को मजबूर करती है। बीबीसी टेलीविजन ने फ्रीलांस पत्रकार ओवेन बेनेट जोन्स की एक रिपोर्ट प्रसारित की जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान की पार्टी मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के नेताओं ने ब्रिटिश अधिकारियों को बताया है कि उन्हें भारत सरकार से फंडिंग मिली। एक पाकिस्तानी अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि पिछले 10 साल में भारत ने सैकड़ों एमक्यूएम चरमपंथियों को ट्रेनिंग दी है। पाकिस्तानी अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि भारत ने एमक्यूएम के सैकड़ों चरमपंथियों को विस्फोटकों, हथियारों और विध्वंसक गतिविधियों की ट्रेनिंग पूर्वोत्तर और उत्तर भारत के कैम्पों में दी है। ऐसा ही दावा कराची पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी राव अनवर ने अप्रैल में किया था।

हालांकि भारतीय अधिकारियों ने इसे पूरी तरह आधारहीन बताया, पर सवाल पैदा होता है कि जब यह खबर पाकिस्तानी सूत्रों पर ही आधारित थी और इसमें बीबीसी की पड़ताल नहीं थी, तब इसके प्रसारण की जरूरत क्या थी? पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान ‘उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे’ की तर्ज पर आरोप लगा रहा है कि भारत उनके देश में आतंकी गतिविधियों को चला रहा है। क्या यह पाकिस्तानी प्रचार के लिए बीबीसी का मंच उपलब्ध कराना नहीं है? बीबीसी की इस रिपोर्ट ने पाकिस्तान की सरकार और मीडिया में जान डाल दी है। कई महीनों से पाकिस्तानी सेना और सरकार ने भारत की खुफिया एजेंसी रॉ (रिसर्च-एनालिसिस विंग) को लेकर आसमान सिर पर उठ रखा है। हाल में पाकिस्तानी पंजाब की असेम्बली में गृहमंत्री शुज़ा खानज़ादा ने आरोप लगाया कि जिम्बाब्वे की क्रिकेट टीम के पाकिस्तान दौरे को रोकने के लिए रॉ ने साज़िश की थी। हर तरह की साजिश में रॉ का नाम।

अचानक रॉ को लेकर पाकिस्तान व्यग्र क्यों है? इसमें दो राय नहीं कि दुनिया के तकरीबन सभी देशों के खुफिया संगठन हैं। एमक्यूएम के बाबत लंदन में जिस रकम का उल्लेख खबरों में हुआ है वह बेहद मामूली है। एमक्यूएम का अपना वसूली-नेटवर्क है। वह पाकिस्तान के भीतर ही काफी बड़ी रकम एकत्र करने में सफल है। पाकिस्तानी हड़बोंग की वजह कुछ और लगती है। इस साल संयुक्त राष्ट्र की 70वीं जयंती है। पिछले साल की महासभा में भारत के प्रधानमंत्री के निवेदन के बाद संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को स्वीकार कर लिया। इस साल भारत आतंकवाद के खिलाफ एक वैश्विक संधि की पेशकश करने जा रहा है। पाकिस्तान सरकार ऐसी संधि नहीं चाहती। उसकी पेशबंदी में वह भारत को आतंकवादी देश के रूप में बदनाम करना चाहती है।

पाकिस्तानी प्रतिष्ठान ने पहले अपने मीडिया का सहारा लिया। इसके बाद पाकिस्तान ने बीबीसी के एक पूर्व संवाददाता ओवेन बेनेट जोन्स का सहारा लिया है। ओवेन बेनेट जोन्स इस इलाके में सक्रिय हैं और पाकिस्तानी मीडिया में लिखते रहे हैं। उन्होंने सन 2002 में ‘पाकिस्तान : आइ ऑफ द स्टॉर्म’ नाम से एक किताब भी लिखी है। पाकिस्तान पश्चिमी देशों के लेखकों का इस्तेमाल करता रहा है। पाकिस्तानी सूत्रों और पाकिस्तानी आरोपों से लैस इस खबर में केवल कुछ तथ्यों का विवरण है। यह बात खबर में कही गई है। सवाल है कि क्या बीबीसी ने इस खबर को प्रसारित करने के पहले यह सोचा नहीं कि क्या उसका इस्तेमाल हो रहा है?

भारत का रॉ क्या करता है और कितना प्रभावशाली है, इसके बारे में भी हमें ज्यादा जानकारी नहीं है। पर वह उतने व्यापक स्तर पर काम नहीं करता होगा, जितना आईएसआई करता है। आईएसआई की स्थापना 1948 में हुई थी। पाकिस्तानी सेना की जन सम्पर्क शाखा आईएसपीआऱ (इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशंस) की स्थापना उसके पहले हो गई थी। उसका प्रमुख मेजर जनरल रैंक का अधिकारी होता है। भारत में रॉ की स्थापना 1962 और 1965 की लड़ाई के बाद 1968 में हुई थी। उसका काम फॉरेन इंटेलिजेंस का है। आईएसआई और आईएसपीआर देश और विदेश, जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय हैं और केवल इंटेलिजेंस एजेंसियाँ नहीं हैं। ये संगठन जनमत बनाने का काम भी करते हैं। सोशल मीडिया में भी उनका गहरा हस्तक्षेप है।

पाकिस्तान में भारत की नकारात्मक छवि किस प्रकार तैयार की जाती है इसका पता पिछले हफ्ते एक और खबर से मिलता है। इन दिनों कराची में जबर्दस्त गर्मी का प्रकोप है। एक हजार से ज्यादा मौतें हो चुकीं हैं। कराची के मुर्दाघरों में लाशें रखने तक की जगह नहीं बची। ऐसे में पाकिस्तान के 'मौसम बदलाव' महकमे के मंत्री मुशाहिदुल्ला ख़ान ने भीषण गर्मी के लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान के सिंध से सटे राजस्थान में भारत ने कोयला आधारित कई बिजलीघर लगाए हैं जिनसे कराची जैसे शहर को गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अगर भारत दोषी साबित हुआ तो वे इस मामले को संयुक्त राष्ट्र तक ले जाएंगे। हाल में नरेंद्र मोदी के ढाका वक्तव्य, राज्यवर्धन सिंह के म्यांमार ऑपरेशन और रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के ‘काँटे से काँटा’ निकालने वाले बयानों को पाकिस्तान ने तिल का ताड़ बना दिया। यह किसी योजना के तहत है और इसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय फोरमों पर भारत को कलंकित करना है।

हरिभूमि में प्रकाशित

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