Thursday, January 1, 2026

इंडिगो संकट ने नागरिक विमानन की खोली पोल

दिसंबर की शुरुआत बेहद मुश्किल भरी रही, जब चालक दल के आराम और ड्यूटी की अवधि से जुड़े नए नियमों को लेकर भारत की सबसे बड़ी एयरलाइंस इंडिगो का संचालन अचानक ठप हो गया। बहरहाल अब उसकी सेवा सामान्य हो गई है।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा दी गई अस्थायी छूट का लाभ उठाते हुए, इंडिगो ने अपने संचालन को स्थिर करने और दैनिक उड़ानों को लगातार बढ़ाने में कामयाबी हासिल कर ली है। पर सवाल अनेक बचे हैं। यह किसी एक एयरलाइंस का मसला नहीं हैं। अस्थायी तौर पर समस्या का समाधान हो गया है, पर यह दीर्घकालीन समाधान की गारंटी नहीं है। सवाल यह है कि तेजी से बदलती परिस्थितियों में परिवहन सेवाओं का विस्तार किस तरह होगा?

संकट के क्षणों में उसकी उड़ानें लगभग 700 के आसपास पहुँच चुकी थीं, जो अब दो हजार के ऊपर आ गई हैं, जो सामान्य है। बेशक यह सवाल अपनी जगह पर है कि फरवरी में जब उसे इस व्यवस्था को लागू करना होगा, तब क्या यह एयरलाइंस अपने संचालन को सामान्य करने में सफल हो पाएगी?

इंडिगो एयरलाइंस को सफलता का पर्याय माना जाता है। देश में कम लागत वाले विमानन क्षेत्र में यह एयरलाइंस तेजी से बढ़ रही है। इसका उदय किसी चमत्कार से कम नहीं है। 4 अगस्त, 2006 को लॉन्च हुई इस कंपनी का संकट शुरू होने से पहले भारत के घरेलू बाजार के लगभग 64 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा था। इसके बेड़े में मुख्य रूप से एयरबस ए320 परिवार के 400 से अधिक विमान हैं और यह प्रतिदिन लगभग 2,200-2,300 उड़ानें संचालित करती है।

पिछले 15 वर्षों में, कई भारतीय एयरलाइंस (जेट एयरवेज और किंगफिशर से लेकर गोएयर तक) कर्ज के कारण या बढ़ती लागत के कारण ढह गई हैं। जैसे-जैसे प्रतिद्वंद्वी दूर होते गए, इंडिगो ने तेजी से उनकी जगह ले ली। छोटे शहरों और माध्यमिक मार्गों में विस्तार किया, जहाँ उसके नीले और सफेद विमान हवाई यात्रा का पर्याय बन गए।

इस एयरलाइंस ने कड़ी मेहनत से देश की सबसे विश्वसनीय, बिना किसी तामझाम वाले वाहक के रूप में प्रतिष्ठा हासिल कर ली है, जिसके खोने का अब खतरा है। रेटिंग एजेंसी मूडीज़ के अनुसार उड़ान रद्द होने, प्रभावित ग्राहकों को रिफंड और अन्य मुआवजे के साथ-साथ डीजीसीए द्वारा लगाए गए संभावित दंड के कारण इंडिगो को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।’ इस समस्या का समाधान मशीनी तरीके से संभव नहीं है। इसके लिए नियामक पक्ष की ओर से विमानन सुरक्षा के लिए जिम्मेदार मानवीय कारकों की समझ को व्यापक बनाने की आवश्यकता है और साथ ही कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को मालिक-सेवक मानकर खारिज नहीं कर दिया जाना चाहिए।

पायलटों पर दबाव

एक और गंभीर समस्या पायलट प्रशिक्षण है। इंडिगो और एयर इंडिया के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की  लागत क्रमशः 1.2 करोड़ और 1.5 करोड़ रुपये है। यह बाजार में प्रचलित खर्च से 50 फीसदी ज्यादा है और अक्सर विदेशी स्कूलों की फीस के बराबर है। इस वजह से युवा पायलट दशकों तक कर्ज के जाल में फँस जाते हैं। इस वजह से उनपर आराम कम करने और ज्यादा से ज्यादा काम करने का दबाव होता है।

ओवरटाइम काम करना कुछ उद्योगों के लिए सामान्य हो सकता है, लेकिन विमानन बेहद सुरक्षा-केंद्रित कर्म है, जहाँ थकान साइलेंट किलर है। आपको इसके प्रभावों का पता तभी लगता है, जब हादसा हो जाता है। लागत के अलावा, इंडिगो के आक्रामक विस्तार के कारण, जिसमें नए अंतरराष्ट्रीय मार्गों को लॉन्च करना भी शामिल है, इसके प्रबंधन ने कुछ बातों की अनदेखी कर दी। व्यावहारिक रूप से इस एयरलाइंस का एकाधिकार है, और एकाधिकार के साथ उदासीनता भी आती है।

सवाल दर सवाल

इस संकट से जुड़े तमाम सवालों के जवाब अब खोजे जा रहे हैं। मसलन इंडिगो की उड़ानों के लिए पायलटों की तैनाती में 'योजना संबंधी कमियां' क्यों थीं? 2011 के उड़ान ड्यूटी समय सीमा नियमों को 2019 में क्यों संशोधित किया गया? एयर इंडिया, अकासा और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइनों को कोई समस्या क्यों नहीं हुई? कुछ सवालों के जवाब मिले हैं और कुछ के नहीं, पर इतना स्पष्ट लग रहा है कि विमान सेवाओं में सबसे आगे रहने की होड़ भी इसके पीछे है। बहरहाल इंडिगो के परिचालन में जैसा उलट-पुलट हुआ, वैसा पहले कभी नहीं हुआ था। इसकी वजह से देश में ही नहीं सारी दुनिया में भारत के नागरिक उड्डयन का मज़ाक बना और उसके प्रशासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।

1 नवंबर से लागू हुए नए ड्यूटी नियमों के पहले महीने में इस एयरलाइन को बहुत कम व्यवधान का सामना करना पड़ा, लेकिन दिसंबर की शुरुआत तक, इसका रोस्टर ध्वस्त होने लगा। इसमें तकनीकी खराबी, प्रतिकूल मौसम और प्रमुख हवाई अड्डों पर बढ़ती भीड़ जैसे कुछ बाहरी कारकों ने असर को और बढ़ा दिया। इंडिगो का संचालन कहीं अधिक हवाई अड्डों पर फैला हुआ है, इसलिए पायलटों की तैनाती का क्रम बहुत जटिल हो जाता है। एयरलाइंस को बड़ी संख्या में क्रू बेस बनाए रखने की आवश्यकता है। व्यवधानों को संभालने के लिए पर्याप्त स्टैंडबाय पायलटों की जरूरत है।

हुआ क्या था?

पहले यह समझना होगा कि हुआ क्या था? इस हादसे ने पायलटों और एयरलाइंस के बीच फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस (एफडीटीएल) को लेकर दशकों पुराने विवाद को फिर से हवा दे दी है, जो उनके आराम और ड्यूटी के घंटों को नियंत्रित करती है। यह ताजा विवाद अप्रैल 2019 से शुरू हुआ, जब डीजीसीए ने नए नियम लागू किए, जिन्होंने 2011 के नियमों में पायलटों के हित में बनाए गए कुछ प्रावधानों, विशेष रूप से रात्रि ड्यूटी से संबंधित प्रावधानों को उलट दिया।

2011 के नियम 22 मई, 2010 को मंगलौर में हुए विमान हादसे के बाद बनाए गए थे, जिसकी जाँच रिपोर्ट में 2 घंटे 5 मिनट की उड़ान में से 1 घंटे 40 मिनट तक कॉकपिट में खर्राटे और गहरी साँस लेने का जिक्र किया गया था। उसमें यह भी बताया गया था कि पायलट-इन-कमांड 'सर्केडियन लो विंडो' यानी सुबह दो बजे से छह बजे के बीच के उस समय में उड़ान भरने के कारण प्रभावित हुआ होगा, जब जागते रहने की क्षमता कम हो जाती है। यह उड़ान भारतीय समयानुसार सुबह 2:30 बजे दुबई से रवाना हुई थी।

ज़ैदी समिति

ये नियम 2011 में नसीम ज़ैदी समिति की एफडीटीएल संबंधी रिपोर्ट का परिणाम थे, जिसकी आवश्यकता तब पड़ी जब एयर इंडिया ने पहली बार 1 अगस्त, 2007 को मुंबई से न्यूयॉर्क के लिए बिना रुके उड़ानें शुरू कीं। रिपोर्ट में नासा के एक अध्ययन के साक्ष्यों का हवाला दिया गया था और थकान और रात्रि उड़ान के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों और नींद की कमी के कारण थकान पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तार से वर्णन किया गया था।

2011 के नियमों में स्पष्ट रूप से पायलटों को लगातार रात की ड्यूटी पर लगाने पर रोक लगा दी गई थी और यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया था कि रात्रि लैंडिंग की अधिकतम सीमा दो घंटे है और अधिकतम ड्यूटी घंटे (जिसमें उड़ान ड्यूटी, उड़ान से पहले और बाद की ड्यूटी शामिल है) नौ घंटे से अधिक नहीं हो सकते।

नियम बदले

2019 के नियमों में इन्हें उलट दिया गया, जिसमें लगातार दो रातों तक ड्यूटी की अनुमति दी गई और रात्रि शिफ्ट के लिए अधिकतम उड़ान घंटों और ड्यूटी घंटों को परिभाषित करने के लिए अस्पष्ट भाषा का इस्तेमाल किया गया। पायलट संगठनों द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के बाद, डीजीसीए ने जनवरी 2024 में संशोधित नियम अधिसूचित किए।

इनका व्यापक रूप से स्वागत किया गया क्योंकि इसने साप्ताहिक विश्राम को 36 से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया और लैंडिंग को दो घंटे तक सीमित करके रात्रि उड़ान को प्रतिबंधित कर दिया, साथ ही अधिकतम उड़ान समय आठ घंटे और ड्यूटी का समय 10 घंटे तक सीमित कर दिया। एयरलाइंस द्वारा उड़ानें रद्द होने की चेतावनी और अधिक पायलटों की भर्ती की आवश्यकता के कारण इनका कार्यान्वयन रोक दिया गया। पायलट संगठन एक बार फिर दिल्ली उच्च न्यायालय में लौट आए, जिसने अप्रैल 2025 में ज्यादातर प्रावधानों के लिए 1 जुलाई से चरणबद्ध प्रवर्तन का आदेश दिया, जबकि रात्रि ड्यूटी से संबंधित प्रावधानों को 1 नवंबर से लागू किया जाना था।

2019 में आया यह उलटफेर एयरलाइंस द्वारा छोटी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में आई तेजी के अनुरूप था, जो दुबई, जेद्दाह, रियाद, अबू धाबी जैसे गंतव्यों को जोड़ रही थीं और विदेशों में होटलों में ठहरने की व्यवस्था के बजाय त्वरित बदलाव के माध्यम से चालक दल का अधिकतम उपयोग करना चाहती थीं।

एयर इंडिया, अकासा और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस को विमानों के ग्राउंड होने, डिलीवरी में देरी या विमानों की अनुपलब्धता के कारण अतिरिक्त पायलटों की वजह से उड़ानें रद्द होने की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। गुणवत्ता बढ़ाने और लागत कम रखने के लिए सख्त-नियंत्रणों के कारण इंडिगो में पायलटों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ता है। इस वजह से एयरलाइंस का मुनाफा बेहद कम रह जाता है। इंडिगो की बाजार में हिस्सेदारी महामारी से पहले के 47 प्रतिशत से बढ़कर अब 65 प्रतिशत हो गई है, लेकिन उसका कर्मचारियों पर खर्च 11 प्रतिशत से घटकर 8 प्रतिशत हो गया है।

पायलटों को आराम

नए नियमों में रात्रि संचालन से संबंधित अस्थायी छूट के बिना, जो 10 फरवरी तक लागू रहेगी। संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस (एफडीटीएल) नियमों में 'रात' की नई परिभाषा के अनुसार, आधी रात से सुबह 6 बजे के बीच इंडिगो की घरेलू उड़ानों का आगमन और प्रस्थान अन्य किसी भी एयरलाइन की तुलना में कहीं अधिक है।

जब डीजीसीए ने इस छह घंटे की अवधि में किसी पायलट द्वारा उड़ान भरने या उड़ान भरने की अधिकतम संख्या दो तक सीमित कर दी, तो इंडिगो पर इसका प्रभाव कहीं अधिक पड़ा। नए क्रू विश्राम एवं ड्यूटी मानदंडों के अनुसार इंडिगो के पास 2,422 कप्तान और 2,153 प्रथम अधिकारी होने चाहिए थे; जबकि एयरलाइन के पास 2,357 कप्तान और 2,194 प्रथम अधिकारी थे। इसके बावजूद, एयरलाइंस ने अपने घरेलू उड़ान कार्यक्रम का विस्तार किया, और विशेष रूप से रात्रि उड़ानों को बढ़ाया।

इंडिगो ने अन्य सभी एयरलाइनों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से और व्यापक रूप से अपनी सेवाएं विस्तारित कीं, लेकिन उसने अपने पायलटों की संख्या में आनुपातिक वृद्धि नहीं की। रात्रि ड्यूटी नियमों में बदलाव का मुख्य कारण पायलटों की थकान की चिंता थी, जो विमानन सुरक्षा के लिए एक प्रमुख जोखिम है। रात्रि उड़ान संबंधी नियमों में बदलाव का एक प्रमुख उद्देश्य सर्केडियन लो विंडो (रात 2 बजे से सुबह 6 बजे तक) के दौरान पायलटों के कार्यभार को कम करना है, जब मानव शरीर में चैतन्यता और संज्ञानात्मक कार्यों में गिरावट और थकान ज्यादा होती है। पायलट संघों की ओर से नाइट ड्यूटी नियमों में सुधार की मांग लंबे समय से चली आ रही थी।

नए नियम

नए एफडीटीएल नियमों के अनुसार, रात्रि ड्यूटी को उस समय अवधि के रूप में परिभाषित किया गया है जो चालक दल के अभ्यस्त समय क्षेत्र में 0000 बजे से 0600 बजे के बीच के किसी भी हिस्से में आती है। पहले रात्रि ड्यूटी की परिभाषा आधी रात से सुबह 5 बजे तक थी। नए नियम कहते हैं कि रात्रि ड्यूटी में अधिकतम स्वीकृत लैंडिंग की संख्या दो है। पहले अधिकतम छह लैंडिंग की अनुमति थी।

अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक नेटवर्क के साथ, इंडिगो अपने 60 प्रतिशत से अधिक घरेलू मार्गों पर एकमात्र ऑपरेटर है। इंडिगो के नेटवर्क के आकार, विस्तार और व्यापकता के कारण एयरलाइन के लिए उड़ानों के लिए क्रू रोस्टर का प्रबंधन करना बहुत जटिल हो जाता है। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच उड़ान भरने वाले पायलटों के लिए लैंडिंग पर लगाई गई सीमा से इंडिगो को सबसे अधिक नुकसान हुआ, क्योंकि यह एयरलाइंस अन्य सभी एयरलाइनों की तुलना में रात के समय अधिक उड़ानें भरती है।

भारी अराजकता

इस सेवा की उड़ानें तो बुरी तरह से बाधित हुईं ही, साथ ही दूसरी एयरलाइंस के किरायों में भारी वृद्धि हो गई। विमान सेवा के क्रू सदस्य गलत स्टेशनों पर पहुँच गए, यात्रियों के बैग उड़ानें रद्द होने के बाद भी गंतव्य तक पहुँच गए, बिना ड्यूटी असाइनमेंट के पायलट, हवाई अड्डों पर इंतजार करते रहे। कॉल सेंटर ठप हो गए। बोर्डिंग गेट पर यात्रियों की नारेबाज़ी और तमाम टर्मिनलों पर विरोध-प्रदर्शनों ने इस हवाई सेवा को हास्यास्पद बना दिया।

स्थिति इतनी खराब हो गई कि एयरलाइंस ने बीमारी की छुट्टी पर गए पायलटों को भी वापस लौटने की गुहार लगाई। उनसे कहा गया कि अगर वे अपनी प्रिविलेज लीव रद्द कर दें तो उनके दैनिक भत्ते का डेढ़ गुना उन्हें दिया जाएगा। डीजीसीए ने एयरलाइंस के संचालन की निगरानी के लिए आठ उड़ान संचालन निरीक्षकों का पैनल गठित किया था, जिसे एयरलाइन के कामकाज में कुछ कमियां मिली हैं। ये कमियां ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर से जुड़ी है, जिससे दो दिन का ड्यूटी रोस्टर जारी किया जा रहा है। इसके कारण शीर्ष प्रबंधन में शामिल एक वरिष्ठ विदेशी अधिकारी (सीईओ नहीं) जाँच के दायरे में हैं और उनके खिलाफ नियामक कार्रवाई हो सकती है।

उधर संसद की परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय समिति ने इस अव्यवस्था के लिए एयरलाइंस और डीजीसीए को फटकार लगाई है। समिति ने कहा कि हवाई अड्डों पर व्यापक अराजकता के बाद भी इंडिगो और डीजीसीए ने असंतोषजनक प्रतिक्रिया दी, जिससे हालत बिगड़े। समिति ने सदस्यों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देने के लिए इंडिगो और विमानन नियामक को 15 दिन का समय दिया है।

10 फरवरी तक छूट

लाखों यात्रियों को प्रभावित करने वाली व्यापक उड़ान व्यवधानों को देखते हुए, डीजीसीए ने नए नियमों से 10 फरवरी तक की छूट भी दे दी। बहरहाल 9 दिसंबर तक रद्द हुई उड़ानों के कारण लगभग 12.5 लाख यात्री प्रभावित हुए, जिसके कारण एयरलाइंस ने 1,100 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया। इसके अलावा 3 से 5 दिसंबर तक गंभीर रूप से प्रभावित यात्रियों को 10,000 रुपये के वाउचर भी दिए गए।

बहरहाल अब इंडिगो एयरलाइंस के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर पीटर एल्बर्स ने कर्मचारियों से कहा है कि एयरलाइंस का 'सबसे बुरा समय बीत गया है।' एक वीडियो मैसेज में, एल्बर्स ने कहा कि इंडिगो ने गुरुवार, 17 दिसंबर को 2,200 फ्लाइट्स ऑपरेट कीं।

भारत वार्ता में प्रकाशित

 

 

 

 

 

 

 

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