Monday, May 18, 2015

राज्यसभा भी हमारी व्यवस्था का जरूरी हिस्सा है

भारतीय संविधान में राज्यसभा की ख़ास जगह क्यों?

  • 17 मई 2015

अरुण जेटली

राज्यसभा में विपक्ष से हलकान मोदी सरकार के वित्तमंत्री अरुण जेटली ने एक साक्षात्कार में कहा कि जब एक चुने हुए सदन ने विधेयक पास कर दिए तो राज्यसभा क्यों अड़ंगे लगा रही है?
जेटली के स्वर से लगभग ऐसा लगता है कि राज्यसभा की हैसियत क्या है?
असल में भारत में दूसरे सदन की उपयोगिता को लेकर संविधान सभा में काफी बहस हुई थी.
आखिरकार दो सदन वाली विधायिका का फैसला इसलिए किया गया क्योंकि इतने बड़े और विविधता वाले देश के लिए संघीय प्रणाली में ऐसा सदन जरूरी था.
धारणा यह भी थी कि सीधे चुनाव के आधार पर बनी एकल सभा देश के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए नाकाफी होगी.

क्या राज्यसभा चुनी हुई नहीं?


राज्यसभा

ऐसा नहीं है. बस इसके चुनाव का तरीका लोकसभा से पूरी तरह अलग है.
इसका चुनाव राज्यों की विधान सभाओं के सदस्य करते हैं. चुनाव के अलावा राष्ट्रपति द्वारा सभा के लिए 12 सदस्यों के नामांकन की भी व्यवस्था की गई है.

Sunday, May 17, 2015

चीन के साथ संवाद

नरेन्द्र मोदी की चीन यात्रा का महत्वपूर्ण पहलू है कुछ कठोर बातें जो विनम्रता से कही गईं हैं। भारत और चीन के बीच कड़वाहट के दो-तीन प्रमुख कारण हैं। एक है सीमा-विवाद। दूसरा है पाकिस्तान के साथ उसके रिश्तों में भारत की अनदेखी। तीसरे दक्षिण चीन तथा हिन्द महासागर में दोनों देशों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा। चौथा मसला अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का है। भारत लगातार  आतंकवाद को लेकर पाकिस्तानी भूमिका की शिकायत करता रहा है। संयोग से पश्चिम चीन के शेनजियांग प्रांत में इस्लामी कट्टरतावाद सिर उठा रहा है। चीन को इस मामले में व्यवहारिक कदम उठाने होंगे। पाकिस्तानी प्रेरणा से अफगानिस्तान में भी चीन अपनी भूमिका देखने लगा है। यह भूमिका केवल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि अफगान सरकार और तालिबान के बीच मध्यस्थता से भी जुड़ी है।   

Saturday, May 16, 2015

रिटेल में विदेशी पूँजी यानी विसंगति राजनीति की

यूपीए सरकार ने 2012 में कई शर्तों के साथ बहु-ब्रांड खुदरा में 51 फीसदी एफडीआई को अनुमति दी थी। उस नीति के तहत विदेशी कंपनियों को अनुमति देने या नहीं देने का फैसला राज्यों पर छोड़ दिया गया था। राजनीतिक हल्कों में यह मामला पहेली ही बना रहा। चूंकि यूपीए सरकार की यह नीति थी, इसलिए भारतीय जनता पार्टी को इसका विरोध करना ही था। और अब जब एनडीए सरकार यूपीए सरकार की अनेक नीतियों को जारी रखने की कोशिश कर रही है तो उसके अपने अंतर्विरोध सामने आ रहे हैं। पिछले साल चुनाव के पहले और जीतने के बाद एनडीए ने रिटेल कारोबार में विदेशी पूँजी निवेश के मामले पर अपने विचार को कभी स्पष्ट नहीं किया।  

Thursday, May 14, 2015

चीनी जादूनगरी से क्या लाएंगे मोदी?

अपनी सरकार की पहली वर्षगाँठ के समांतर हो रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा के अनेक निहितार्थ हैं. सरकार महंगाई, किसानों की आत्महत्याओं और बेरोजगारी की वजह से दबाव में है वहीं वह विदेशी मोर्चे पर अपेक्षाकृत सफल है. चीन यात्रा को वह अपनी पहली वर्षगाँठ पर शोकेस करेगी. देश के आर्थिक रूपांतरण में भी यह यात्रा मील का पत्थर साबित हो सकती है. वैश्विक राजनीति तेजी से करवटें ले रही है. हमें एक तरफ पश्चिमी देशों के साथ अपने रिश्तों को परिभाषित करना है वहीं चीन और रूस की विकसित होती धुरी को भी ध्यान में रखना है.

Sunday, May 10, 2015

‘अन्याय’ हमारे भीतर है

सलमान खान मामले के बाद अपने संविधान की प्रस्तावना को एकबार फिर से पढ़ने की इच्छा है। इसके अनुसारः-
" हम भारत के लोग, ...समस्त नागरिकों को :
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए...इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"
   सलमान खान को सज़ा सुनाए जाने से पहले बड़ी संख्या में लोगों का कहना था हमें अपनी न्याय-व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। सज़ा घोषित होते ही उन्होंने कहा, हमारा विश्वास सही साबित हुआ। पर फौरन ज़मानत मिलते ही लोगों का विश्वास डोल गया। फेसबुक पर पनीले आदर्शों से प्रेरित लम्बी बातें फेंकने का सिलसिला शुरू हो गया। निष्कर्ष है कि गरीब के मुकाबले अमीर की जीत होती है। क्या इसे साबित करने की जरूरत है? न्याय-व्यवस्था से गहराई से वाकिफ सलमान के वकीलों ने अपनी योजना तैयार कर रखी थी। इस हुनर के कारण ही वे बड़े वकील हैं, जिसकी लम्बी फीस उन्हें मिलती है। व्यवस्था में जो उपचार सम्भव था, उन्होंने उसे हासिल किया। इसमें गलत क्या किया?