इसराइल में बहुदलीय (multiparty) प्रणाली है। कोई भी एक दल अकेले बहुमत नहीं जीत पाता, इसलिए सरकार हमेशा कई दलों के गठबंधन (coalition) से बनती है। नेसेट (Knesset) में कुल 120 सीटें होती हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटें जरूरी होती हैं। चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व (proportional representation) प्रणाली से होते हैं, जिसमें 3.25% वोट थ्रेशहोल्ड पार करने वाले दलों/सूचियों को सीटें मिलती हैं।
अक्तूबर 2026 के चुनाव (26वीं नेसेट) के अंतिम परिणामों के अनुसार, लगभग 11-12 प्रमुख दल/सूचियाँ नेसेट में पहुँचीं। चुनाव में कुल 30+ सूचियाँ (lists) शामिल हुई थीं, लेकिन ज्यादातर प्राथमिक सीमा यानी थ्रेशहोल्ड पार नहीं कर पाईं।
2026 चुनाव के प्रमुख दल और सीटें (अंतिम गणना के अनुसार)
| दल/सूची | नेता/नेतृत्व | सीटें | प्रकार/विचारधारा |
|---|---|---|---|
| लिकुड (Likud) | बेंजामिन नेतन्याहू | 27 | दक्षिणपंथी, राष्ट्रवादी |
| याशर (Yashar) | गदी आइज़ेनकोट | 21 | मध्यपंथी, सुरक्षा-केंद्रित |
| बेयाहाद / B'Yachad (Together) | नफ्ताली बेनेट + यैर लैपिड | 12 | मध्य-दक्षिणपंथी गठबंधन |
| जॉइंट लिस्ट (Joint List) | यूसुफ जबरीन आदि | 11 | अरब दल (हादाश-ताअल आदि का गठबंधन) |
| द डेमोक्रेट्स (The Democrats) | यैर गोलान | 8 | वामपंथी/सामाजिक लोकतांत्रिक |
| रा'अम (Ra'am) | मनसौर अब्बास | 8 | अरब, इस्लामी-रूढ़िवादी |
| यिसराइल बेइतेनु (Yisrael Beiteinu) | अविग्दोर लिबरमैन | 7 | दक्षिणपंथी, धर्मनिरपेक्ष, रूसी-यहूदी हित |
| ओत्ज़मा येहुदित (Otzma Yehudit) | इतामार बेन-ग्वीर | 7 | अति-दक्षिणपंथी, काहानिस्ट |
| यूनाइटेड तोराह जूडाइज्म (UTJ) | याकोव आशेर | 7 | हरेदी (अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स) अशकेनाजी |
| शास (Shas) | अर्येह देरी | 6 | हरेदी, सेफार्डी/मिज़राही |
| रिलिजियस ज़ायोनिज़्म-ज़ेहुत (Religious Zionism-Zehut) | बेज़ालेल स्मोट्रिच आदि | 6 | धार्मिक ज़ायोनिस्ट, अति-दक्षिणपंथी |
कुल: नेतन्याहू गुट ~53 सीटें, विपक्षी गुट (आइज़ेनकोट आदि) ~48 सीटें, अरब दल ~19 सीटें। कोई भी गुट अकेले 61 तक नहीं पहुँचा, इसलिए गठबंधन वार्ता चल रही है।
मुख्य दल
- दक्षिणपंथी/राष्ट्रवादी — लिकुड, ओत्ज़मा येहुदित, रिलिजियस ज़ायोनिज़्म, यिसराइल बेइतेनु। सुरक्षा, बस्तियाँ और यहूदी चरित्र पर जोर।
- मध्यपंथी — याशर, बेयाहाद (बेनेट-लापिद गठबंधन)। सुरक्षा मजबूत रखने के साथ संस्थागत सहमति और कुछ सुधारों की बात।
- वामपंथी — द डेमोक्रेट्स (पहले लेबर/मेरेत्ज़ का मिश्रण)। सामाजिक लोकतंत्र और उदार ज़ायोनिज़्म।
- धार्मिक/हरेदी — शास (सेफार्दी) और UTJ (अशकेनाजी)। धार्मिक कानून, सैन्य सेवा छूट और सामाजिक रूढ़िवादिता।
- अरब दल — जॉइंट लिस्ट (ज्यादातर वाम/धर्मनिरपेक्ष) और रा'अम (इस्लामी)। अरब समुदाय के हित, फिलिस्तीनी मुद्दे।
गठबंधन की प्रकृति
- इसराइल में स्थायी गठबंधन आम हैं। चुनाव से पहले या बाद में दल सूचियाँ मिलाकर लड़ते हैं (जैसे बेयाहाद = बेनेट + येश अतीद)।
- सरकार बनाने के लिए अक्सर 4-8 दल साथ आते हैं। छोटे दल (6-8 सीटें) अक्सर “किंगमेकर” बन जाते हैं।
- अरब दलों के साथ गठबंधन ज्यादातर ज़ायोनिस्ट दल नहीं करते, हालांकि 2021 में एक बार रा'अम शामिल हुआ था।
- प्रणाली के कारण नेसेट अक्सर खंडित रहती है और सरकारें अस्थिर हो सकती हैं।
संक्षेप में, इसराइल में दर्जनों दल सक्रिय हैं, लेकिन नेसेट में आमतौर पर 10-12 ही पहुँचते हैं। वर्तमान में 2026 चुनाव के बाद गठबंधन बनाने की प्रक्रिया चल रही है, क्योंकि कोई भी पक्ष स्पष्ट बहुमत नहीं जीत पाया।
गठबंधन (Coalition) बनाने की विस्तृत प्रक्रिया
इसराइल एक संसदीय लोकतंत्र है। कोई भी दल अकेले 61 सीटें (बहुमत) नहीं जीत पाता, इसलिए सरकार हमेशा कई दलों के गठबंधन से बनती है। यह प्रक्रिया Basic Law: The Government में निर्धारित है। मुख्य भूमिका राष्ट्रपति (वर्तमान में आइजैक हर्ज़ोग) की होती है।
चरण-दर-चरण प्रक्रिया
1. चुनाव परिणामों का आधिकारिक प्रकाशन
- चुनाव के बाद वोट गिने जाते हैं।
- आधिकारिक परिणाम आमतौर पर 7–8 दिनों के अंदर प्रकाशित होते हैं (2026 चुनाव में 4 नवंबर तक)।
- तब तक पुरानी सरकार “केयरटेकर” (caretaker) के रूप में काम करती रहती है।
2. राष्ट्रपति द्वारा परामर्श (Consultations)
- आधिकारिक परिणाम आने के 7 दिनों के अंदर राष्ट्रपति नेसेट में चुने गए हर दल/सूची के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात करते हैं।
- हर दल राष्ट्रपति को बताता है कि वे किसे प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन करते हैं।
- राष्ट्रपति इन सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए फैसला करते हैं कि किसे सरकार बनाने का पहला मौका दिया जाए।
- महत्वपूर्ण: सबसे बड़ी पार्टी के नेता को स्वतः मौका नहीं मिलता। राष्ट्रपति उस व्यक्ति को चुनते हैं जिसके पास सबसे ज्यादा संभावना हो कि वह 61 सीटों का समर्थन जुटा ले।
3. प्रथम मैंडेट (Mandate) देना
- राष्ट्रपति किसी एक MK (Member of Knesset) को “सरकार बनाने का काम” सौंपते हैं।
- यह व्यक्ति आमतौर पर किसी बड़े दल का नेता होता है।
- समय सीमा: 28 दिन।
- जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति अधिकतम 14 दिन का विस्तार दे सकते हैं (कुल अधिकतम 42 दिन)।
4. गठबंधन वार्ता (Coalition Negotiations) इस दौरान प्रमुख मुद्दे तय होते हैं:
- कौन-कौन से दल गठबंधन में शामिल होंगे
- मंत्रालयों का बंटवारा (कौन-सा मंत्रालय किस दल को मिलेगा)
- नीतिगत समझौते (security, धर्म, अर्थव्यवस्था, फिलिस्तीनी मुद्दा आदि)
- बजट और कानून बनाने संबंधी प्रतिबद्धताएँ
- विवाद सुलझाने का तरीका
गठबंधन समझौते (Coalition Agreements) लिखित रूप में होते हैं। छोटे दल अक्सर महत्वपूर्ण मंत्रालय या नीतिगत रियायतें मांगते हैं।
5. सरकार का गठन और विश्वास मत
- अगर वार्ता सफल होती है, तो नामित व्यक्ति राष्ट्रपति और नेसेट स्पीकर को सूचित करता है।
- नेसेट में विशेष सत्र बुलाया जाता है।
- नामित प्रधानमंत्री सरकार की संरचना, मंत्रियों और नीतिगत दिशा-निर्देश पेश करते हैं।
- नेसेट में विश्वास मत (Vote of Confidence) होता है।
- विश्वास मत में आमतौर पर बहुमत (जो वोट डालते हैं उनमें से ज्यादा) चाहिए। पूर्ण 61 सीटें जरूरी नहीं होतीं (हालांकि स्थिर सरकार के लिए 61 सीटें बेहतर मानी जाती हैं)।
6. अगर पहला प्रयास असफल हो जाए
- राष्ट्रपति के पास 3 दिन का समय होता है।
- वे या तो किसी दूसरे MK को 28 दिनों का मौका देते हैं (इस बार विस्तार नहीं मिलता), या स्पीकर को बता देते हैं कि संभावना नहीं दिख रही।
- दूसरा प्रयास भी असफल होने पर:
- 21 दिनों के अंदर कम से कम 61 MK लिखित अनुरोध कर सकते हैं कि किसी विशेष व्यक्ति को मौका दिया जाए।
- उस व्यक्ति को 14 दिन मिलते हैं।
7. अंतिम स्थिति
- अगर तीनों प्रयास असफल हो जाते हैं, तो नेसेट भंग हो जाती है और 90 दिनों के अंदर नए चुनाव होते हैं।
वर्तमान संदर्भ (अक्टूबर 2026 चुनाव)
- नेतन्याहू गुट के पास 53 सीटें और विपक्षी गुट के पास 48 सीटें हैं। अरब दलों के पास 19 सीटें हैं।
- कोई भी पक्ष अकेले बहुमत नहीं बना पाया है, इसलिए गठबंधन वार्ता लंबी और जटिल होने की उम्मीद है।
- राष्ट्रपति हर्ज़ोग जल्द ही परामर्श शुरू करेंगे।
महत्वपूर्ण बातें
- पूरी प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं।
- छोटे दल (6–8 सीट वाले) अक्सर “किंगमेकर” बन जाते हैं।
- अरब दलों के साथ गठबंधन ज्यादातर ज़ायोनिस्ट दल नहीं करते (हालाँकि 2021 में एक बार हुआ था)।
- गठबंधन समझौते बहुत विस्तृत होते हैं और सरकार की स्थिरता इन्हीं पर निर्भर करती है।
यह प्रक्रिया इसराइल की राजनीति को बहुत गतिशील और कभी-कभी अस्थिर बनाती है।

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