Saturday, September 19, 2026

ट्रंप-परिवार की कंपनी पाकिस्तान को बेचेगी ड्रोन

फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ वेलिकोविच।

डॉनल्ड ट्रंप के परिवार से जुड़ी अमेरिकी ड्रोन कंपनी पावरयूएस ने पाकिस्तानी सेना के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत वह ड्रोन और उनसे जुड़ी तकनीक पाकिस्तानी सेना को प्रदान करेगी। कंपनी के को-फाउंडर ब्रेट वेलिकोविच ने बुधवार 16 सितंबर को समाचार एजेंसी रॉयटर्स को यह जानकारी दी।

वेलिकोविच ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस बारे में विस्तार से जानकारी देने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने बताया कि यह डील 'अनमैन्ड एरियल सिस्टम' यानी बिना पायलट वाले हवाई सिस्टम की श्रेणी में आती है। वेलिकोविच ने कहा, ‘लक्ष्य है एक संयुक्त प्रौद्योगिकी संबंध स्थापित करना, जिसमें अमेरिका की सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी को पाकिस्तान की सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ा जाएगा।’

Friday, September 18, 2026

भारत-पाकिस्तान रिश्तों में कड़वाहट और बढ़ी


चीन-पाकिस्तान सीमा का तमाशा और पोतों का टकराव

भारत और पाकिस्तान के बीच दो दिन में लगातार दो ऐसी घटनाएँ हुई हैं, जिनसे रिश्तों में कड़वाहट बढ़ती हुई नज़र आ रही है। इसमें एक घटना में चीन की भूमिका भी है। इनमें पहली घटना है गत 15 सितंबर को उत्तरी अरब सागर में भारत और पाकिस्तान के युद्धपोतों का टकराव। और दूसरी घटना है उसके अगले ही दिन 16 सितंबर को पाकिस्तान और चीन के सीमा-आयोग को सक्रिय करने का फैसला।

गत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के हाशिए पर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संवाद से पर्यवेक्षकों नें अनुमान लगाया था कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया को गति मिलने वाली है। हालाँकि पर्यवेक्षकों ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को लेकर भी संदेह व्यक्त किया था।

भारत ने पाक-चीन सीमा-आयोग को खारिज करते हुए, उसे ‘नाटक’ करार दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में पाकिस्तान और चीन के बीच सीमा के अस्तित्व से स्पष्ट रूप से इनकार किया और कहा कि आयोग ‘बिना किसी कानूनी आधार के बना लिया गया है। भारत ने इस बात को दोहराया कि जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश भारत के ‘अविभाज्य’ अंग हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे। पाकिस्तान को अपने अवैध और जबरन कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र से संबंधित किसी भी समझौते में प्रवेश करने का कोई अधिकार नहीं है

लिंडसे ग्राहम बिल की भारत-अमेरिका रिश्तों पर छाया

गत 16 सितंबर को अमेरिकी संसद ने एक व्यापक विधेयक पारित किया जिसका उद्देश्य यूक्रेन के खिलाफ रूसी युद्ध को मदद देने वाली वित्तीय-व्यवस्था को तोड़ना है। एक साल से अधिक समय से चल रहे विरोध को पार करते हुए, संसद ने राष्ट्रपति ट्रंप को एक ऐसा विधेयक भेजा है, जिसके आधार पर वे मॉस्को पर कड़े नए प्रतिबंध लगा सकते हैं।

'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशा एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' अमेरिकी राष्ट्रपति को मॉस्को से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की अभूतपूर्व शक्तियाँ प्रदान करता है। वे चीन और भारत सहित उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं, जो रूसी तेल या गैस के शीर्ष पाँच खरीदारों में शामिल हैं, और तथाकथित 'अवैध जहाजों के बेड़े' के प्रमुख सूत्रधार हैं, जिनका उपयोग रूस के तेल निर्यात पर प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है।

भारत पर असर

हालाँकि विधेयक पारित हो जाने के बाद यह टैरिफ अपने आप नहीं लग जाएगा, बल्कि अब यह ट्रंप पर निर्भर करेगा कि वे किसपर, कितना और कब टैरिफ लगाएँगे। अलबत्ता भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है, भारत अपनी 1.4 अरब आबादी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।’ इसके साथ ही भारत ने अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर संभावित प्रभावों की चेतावनी भी दी। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में इस बात पर जोर दिया है कि इस मुद्दे पर हाल के महीनों में विभिन्न अमेरिकी वार्ताकारों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा की गई है।

Tuesday, September 15, 2026

पश्चिम और भारतीय नज़रिए में ब्रिक्स


ब्रिक्स समूह का दिल्ली शिखर-सम्मेलन जिस मापदंड पर सफल रहा है, वह है ‘नई दिल्ली घोषणा, जो सर्वानुमति से जारी हो गई. इससे संकेत मिलता है कि ब्रिक्स का काफी समय भू-राजनीति की विसंगतियों को दूर करने में लगा है.  

सम्मेलन में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात की उपस्थिति के बावज़ूद पश्चिम एशिया की लड़ाई से संदर्भ में कोई अड़चन नहीं आई. यह डिप्लोमेटिक सफलता है, क्योंकि इसे लेकर कई तरह के अंदेशे थे.

अंतिम घोषणापत्र उस संतुलन को दर्शाता है, जिसमें पश्चिम एशिया में चल रहे युद्धों और तनावों को संबोधित किया गया है, लेकिन किसी एक देश को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं माना गया है.

सम्मेलन के समांतर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत-यात्रा और नरेंद्र मोदी के साथ उनकी वार्ता को भी इन उपलब्धियों में शामिल किया जाएगा, पर वह अपने आप में अलग और विषद विषय है.

भारत ने लगातार अपनी गैर-पश्चिमी पहचान पर बल दिया है. इसकी जटिलता को समझना आसान नहीं है. पश्चिम के राजनीतिक और मानवीय-मूल्यों को भारत भी स्वीकार करता है, लेकिन वह अमेरिका और यूरोप की भू-राजनीति का अनिवार्य हिस्साा बनने से इनकार करता है.  

Wednesday, September 9, 2026

राजनीति का नया फॉर्मूला ‘टार्गेट एम!’


भारतीय राजनीति में महिला मतदाता (साइलेंट वोटर) सबसे निर्णायक वोट बैंक बनकर उभरी हैं, जिसके कारण राजनीतिक दल उन्हें आकर्षित करने के लिए पारंपरिक उपहारों से लेकर बड़े पैमाने पर नकदी हस्तांतरण योजनाओं की घोषणाएँ कर रहे हैं। अतीत में मंगलसूत्र, कन्यादान, टीवी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी मुफ्त वस्तुएँ महिलाओं को लुभाने के चुनावी रणनीतियों का एक बड़ा हिस्सा रही हैं, जो समय के साथ आर्थिक और सामाजिक रूप से विकसित होती जा रही हैं। क्या यह प्रवृत्ति रेवड़ी संस्कृति को बढ़ा रही है, या यह सामाजिक-विकास में मददगार है? मोदी, मुसलमान, मंगलसूत्र (हिंदू वैवाहिक प्रतीक), और यहाँ तक ​​कि मटन और मछली भी चुनावी शब्दावली का हिस्सा बन चुके हैं। विरोधी दल अपनी दुर्दशा के लिए मीडिया, मार्केटिंग और मनी (तीन और 'एम') को कोस सकते हैं, वोटिंग मशीन को तो कोस ही रहे हं। सच्चाई यह है कि चुनावों में कम से कम एक 'एम' निर्णायक साबित हो रहा है। देश के चुनावी इतिहास में महिला वोट का महत्व बढ़ता जा रहा है।

हालाँकि कॉक्रोच आंदोलन के कारण देश का ध्यान जेन-ज़ी और युवा वर्ग की ओर गया है, पर चुनावी-राजनीति के विशेषज्ञ मानते हैं कि सभी दल महिला वोटरों को लुभाने से जुड़े कार्यक्रमों को वरीयता दे रहे हैं। उन्हें समझ में आ रहा है कि महिला वोटर एक ब्लॉक है, जेन-ज़ी के बारे में फिलहाल कहना मुश्किल है कि वह ब्लॉक के रूप में मतदान करेगा या नहीं। राजनीति-शास्त्रियों का कहना है कि जेन-ज़ी की भूमिका किसी के पक्ष में माहौल को बनाने या किसी के विरोध में माहौल बिगाड़ने में हो सकती है, पर जेन-ज़ी वोटर ब्लॉक नहीं है। इनमें से कुछ तो वोटर भी नहीं हैं।