पश्चिम एशिया में पहले से इस बात का इमकान था कि लड़ाई शुरू होने वाली है, पर आज कहना मुश्किल है कि वह कब और कैसे खत्म होगी. चौतरफा बयानबाज़ी से लगता है कि वह आसानी से तो खत्म नहीं होगी.
कुछ भरोसा ‘बैकरूम-विमर्श’ पर है, जो किसी न किसी स्तर पर चल रहा है. इसमें चीन ने पहल की है. चीनी
विदेशमंत्री वांग यी ने अपने 'ग्लोबल सिक्योरिटी इनीशिएटिव' के तहत मध्यस्थता की पेशकश की है.
'ग्लोबल सिक्योरिटी इनीशिएटिव' चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा अप्रैल 2022
में प्रस्तावित एक सुरक्षा अवधारणा है, जो ‘अविभाज्य सुरक्षा’ के सिद्धांत पर आधारित है. इसका उद्देश्य
पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका के नेतृत्व वाली
व्यवस्था की जवाबी वैश्विक सुरक्षा का ढाँचा तैयार करना है.
गहरी दरारें
इसके पहले भी
इस इलाके में 1991 और 2003 में लड़ाई हुई है, पर सही मानों में असली खाड़ी युद्ध इस बार ही हुआ है. फारस की खाड़ी से सटे सभी आठ देश, साथ ही आधा दर्जन से ज़्यादा दूसरे देश भी इसमें शामिल हैं.
लड़ाई रुकी भी, तो इस इलाके की शक्ल और भावनात्मक
रिश्ते पहले जैसे नहीं रहेंगे. अब्राहमिक धर्मों और समाज की ऐतिहासिक दरारें और
गहरी होंगी.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने शनिवार को कहा कि हम अब अपने पड़ोसी देशों को तब तक निशाना नहीं बनाएँगे, जब तक कि हमले उनके क्षेत्र से न किए जाएँ. बावज़ूद इसके हमले अभी ज़ारी हैं. शायद पेज़ेश्कियान की बात अपने देश में उतनी नहीं मानी जाती, जितनी हम समझते हैं.




