भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में हाल में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्वदेशी डिजाइन से निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने 6 अप्रैल को सफलतापूर्वक अपनी प्रथम ‘क्रिटिकैलिटी’ प्राप्त की, जो नाभिकीय चेन रिएक्शन की शुरुआत है। यह प्रोटोटाइप एफबीआर 500 मेगावॉट विद्युत (एमडब्लूई) रिएक्टर है, जिसे भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) ने तमिलनाडु के कल्पक्कम नाभिकीय परिसर में निर्मित किया है।
यह तकनीक नाभिकीय ऊर्जा में यूरेनियम पर
निर्भरता कम करेगी। इस उपलब्धि के साथ, भारत अपने तीन-चरणीय
परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश कर गया है, जिसकी परिकल्पना डॉ
होमी जहाँगीर भाभा ने की थी। वैश्विक स्तर पर भी यह महत्त्वपूर्ण परिघटना है। इसके
पूर्ण संचालन में आने के बाद, रूस के बाद भारत, फास्ट ब्रीडर
रिएक्टर का संचालन करने वाला, दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा।
ईरान-युद्ध के आर्थिक दुष्प्रभावों के साथ,
दुनिया भर के देश ऊर्जा सुरक्षा की तलाश में हैं। ज्यादातर देश कोयले
और पेट्रोलियम के रूप में फॉसिल फ्यूल के सहारे हैं, पर अब उनके खत्म होने का समय
है। वैसे भी उनके पर्यावरणीय दुष्प्रभाव को देखते हुए विकल्पों की तलाश चल रही है।
पनबिजली, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे विकल्पों की तुलना में नाभिकीय ऊर्जा सबसे
आगे है, क्योंकि बड़े स्तर पर वही जरूरत पूरी कर सकती है। उसके साथ भविष्य के
तकनीकी विकास भी जुड़े हैं, जो नए विकल्पों को खोलेंगे।
अमेरिका के वैज्ञानिकों ने हाल में संलयन (फ्यूज़न) ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त घोषणा की है। व्यावसायिक रूप से इस पद्धति से बिजली बनाने में अभी कई दशक लगेंगे, पर भविष्य में यह ऊर्जा का विश्वसनीय स्रोत साबित होगा। यह बिजली भी परमाणु के नाभिकीय में छिपे ऊर्जा स्रोत पर आधारित होगी, पर अभी प्रचलित विखंडन पर आधारित नाभिकीय ऊर्जा से एकदम अलग और सुरक्षित होगी।




