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Saturday, April 18, 2026

कौन रोक रहा है महिला आरक्षण

अंततः संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो पाया। सरकार भी जानती थी कि उसके साथ दो तिहाई सदस्य नहीं हैं। इसके लिए उसे सभी दलों से बातचीत पहले करनी चाहिए थी। यह फौरी तौर पर राजनीतिक तीर लगता है, जिसके निशाने पर कौन और क्या है, यह अब दिखाई पड़ेगा, पर जिस तरह से बिल के गिरते ही पोस्टर छपकर आ गए, उससे इतना समझ में आता है कि बीजेपी इसका राजनीतिक लाभ उठाने की तैयारी कर चुकी है। तीन दशक के शोर-शराबे के बावज़ूद इस अधिकार के लागू न हो पाने का मतलब क्या निकाला जाए? मुझे लगता है कि हमारी राजनीति नहीं चाहती कि यह जल्द से जल्द लागू हो। इसे वह ज्यादा से ज्यादा देर तक टालना चाहती है।

सच यह है कि देश की राजनीति चाहती, तो देवेगौड़ा का बिल ही पास हो जाता।  फिलहाल उसे रोकने वालों का कहना है कि परिसीमन देश को तोड़ देगा। वे कहते हैं कि 2023 के बिल को लागू कर दो। 2023 के बिल को लागू करने के लिए भी जनगणना और परिसीमन का इंतज़ार करना होगा। 2023 के महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, इसे परिसीमन के बगैर लागू नहीं किया जा सकता। यह कानून विशेष रूप से जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होने की शर्त से बंधा हुआ है। परिसीमन रुकेगा तो आरक्षण भी रुकेगा। 

बहरहाल सरकार ने उस बिल की अधिसूचना जारी कर दी है। यानी अब उसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी।  सरकार ने गुरुवार शाम को एक अधिसूचना जारी की जिसमें कहा गया कि महिलाओं को 33% आरक्षण प्रदान करने वाला 2023 का अधिनियम 16 ​​अप्रैल को "लागू" हो जाएगा। इस बात पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया कि संशोधित 2026 विधेयक पर लोकसभा में चल रही बहस के बीच 2023 के कानून के प्रावधानों को लागू करने की अधिसूचना क्यों जारी की गई। विपक्ष ने इसे 2023 के कानून को बचाने का एक "हताश प्रयास" बताया। ऐसा इसलिए, क्योंकि संशोधित 2026 विधेयक के सदन से पारित होने को लेकर संशय हैं। पूर्व अधिसूचना में कहा गया था, "यह उस तिथि से लागू होगा जो केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्धारित करे।"

जब 2023 का वह बिल पास हो रहा था, तब उसे लेकर जबर्दस्त सर्वानुमति थी। तब भी सवाल था कि इसे फौरन लागू करने से रोका किसने है? कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में कहा, जब सरकार नोटबंदी जैसा फैसला तुरत लागू करा सकती है, तब इतने महत्वपूर्ण विधेयक की याद साढ़े नौ साल बाद क्यों आई? बात तो बहुत मार्के की कही थी। पर जब दस साल तक कांग्रेस की सरकार थी, तब उन्हें किसने रोका था? देश की राजनीति ने रोका था,  उनके अपने सहयोगी दल ही इसके लिए तैयार नहीं थे।