वायरल युवा-आक्रोश से प्रेरित, कॉक्रोच जनता पार्टी का तेजी से उदय तीन बेहद अलग-अलग व्यक्तियों के कारण हुआ, जिनके कौशल, महत्त्वाकांक्षाओं और राजनीतिक इतिहास ने एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान को एक राष्ट्रीय विरोध में बदल दिया, जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा। आज यानी 2 अगस्त 2026 के द हिंदू में तीन व्यक्तियों के जीवन-वृत्त पर रोशनी डाली गई हैं। मैंने इसे हिंदी में अपने पाठकों के लिए तैयार किया है। इसमें कुछ जगहों पर ज़रूरत के हिसाब से अपनी टिप्पणी भी की है, जो इटैलिक्स में है। इसे लिखा है शोभना के. नायर और निखिल एम बाबू ने।
व्यंग्य से लेकर धरने तक,
यह छात्रों के उस विरोध आंदोलन की सबसे
लोकप्रिय और शायद सबसे आसान व्याख्या है, जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना
पड़ा। यह व्याख्या अपनी सरलता में सशक्त प्रतीत होती है। लेकिन यह अपूर्ण है।
अब तक तो सभी को पता ही
है कि कहानी क्या है। 15 मई, 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने
सक्रियता और सोशल मीडिया का सहारा लेने वाले बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉक्रोचों’
से की, जिससे व्यापक विरोध हुआ।
इस टिप्पणी को भुनाते हुए, बोस्टन में पढ़
रहे एक भारतीय छात्र अभिजीत
दीपके ने अपने जैसे ‘कॉक्रोचों’ के लिए एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन मंच शुरू किया
और इस अपमान को असंतुष्ट युवाओं के लिए एक एकजुटता के आह्वान में बदल दिया। पहले 24 घंटों के भीतर ही 50,000 लोगों ने इसमें पंजीकरण कराया। पाँच दिनों के भीतर यह
संख्या बढ़कर दस लाख से अधिक हो गई, जबकि इस आंदोलन के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2.2 करोड़ से अधिक फॉलोवर हो गए।
वायरल पोस्ट, फॉलोवरों की बढ़ती संख्या और रंगीन प्रतीकों के पीछे तीन शख्सियतें थीं: अभिजीत दीपके (30), आशुतोष रांका (30) और सौरभ दास (27), जिनकी प्रतिभाएँ एक-दूसरे की पूरक हैं। वे देश के अलग-अलग हिस्सों, अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमियों से आते हैं और उनके स्वभाव भी काफी भिन्न हैं।
