वेनेजुएला में सैनिक हस्तक्षेप के बाद डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अपने देश के हित में हमें नेटो सहयोगी डेनमार्क से ग्रीनलैंड को भी हासिल करना होगा. उनके इस सुझाव या धमकी से यूरोपीय नेता नाराज़ और किंचित भयभीत भी हैं.
सवाल है कि वे इसे कैसे हासिल करेंगे? समझाकर, खरीद कर या फौजी कार्रवाई की धमकी देकर? यूरोप
के देशों को यूक्रेन की विश्वसनीय सुरक्षा के लिए अमेरिका की ज़रूरत है, पर
ग्रीनलैंड की संप्रभुता का उल्लंघन भी उन्हें स्वीकार नहीं.
इस पृष्ठभूमि में, यूरोपीय
नेताओं ने मंगलवार 6 जनवरी को पेरिस में वरिष्ठ अमेरिकी वार्ताकारों के साथ
मुलाकात की, जिसमें यूक्रेन में शांति समझौते से जुड़े मसलों पर विचार किया.
यूरोपीय चिंताएँ
इससे एक दिन पहले इन्हीं देशों में से कुछ ने एक
संयुक्त बयान जारी किया था, जिसमें डेनमार्क के साथ एकजुटता व्यक्त की गई थी.
हालाँकि उस बयान में वाशिंगटन की स्पष्ट आलोचना नहीं थी, पर
कुछ चिंताएँ प्रकट हो रही थीं.
यूरोप और अमेरिका की एकता के बाहरी दिखावे के बावजूद ऐसा लग रहा है कि साम्राज्यवादी युग में ट्रंप की अचानक वापसी को लेकर चिंताएँ हैं. वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानने वाले यूरोप के लोग अमेरिकी राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई से भयभीत हैं.
