अनुमान है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता अब किसी भी क्षण हो सकता है. फिर भी दोनों ने अपने हाथ खींच रखे हैं. इसके पीछे दो कारण नज़र आते हैं.
एक तरफ अमेरिका
चाहता है कि ईरान पर ज्यादा से ज्यादा दबाव बना ले, वहीं ईरान का नेतृत्व दो
हिस्सों में बँटा हुआ है. वहाँ का अनुदार तबका छूट देना नहीं चाहता.
अमेरिका इसे और
व्यापक आधार देना चाहता है, जिसमें इसराइल की समस्या का समाधान भी है. वह मुस्लिम
देशों से इसराइल को मान्यता दिलाना चाहता है, जो इस लड़ाई की बुनियाद में है.
बहरहाल दोनों
देशों की सहमतियों के बावज़ूद, समझौता अटका हुआ है. राष्ट्रपति
ट्रंप ने शुक्रवार को वाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अपने प्रमुख सलाहकारों के साथ
बैठक की, लेकिन उन्होंने अंतिम फैसला टाल दिया.
इस कक्ष का इस्तेमाल बड़े संकटों से निपटने की रणनीति
बनाने या चर्चा करने के लिए होता है. अभी स्पष्ट नहीं है कि समझौते की घोषणा कब
होगी, होगी भी या नहीं.
ईरान के मुख्य वार्ताकार, जनरल मोहम्मद बग़ेर ग़ालिबफ़ ने दिन में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, तेहरान को वाशिंगटन पर भरोसा नहीं है. उनके किसी कदम के बिना, हम पहला कदम नहीं उठाएँगे.




