प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर के आखिरी हफ्ते में प्रसारित अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा था कि 2026 का साल विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। कैसा होगा यह मील का पत्थर? पिछले साल से विश्व-व्यवस्था में बुनियादी बदलावों की शुरुआत हुई ही है। बदलाव इस साल भी जारी रहेंगे, पर भारत के लिए यह साल कैसा होगा? भारत माने यहाँ का जन-गण-मन। भारत के लोग और उनका मन। क्या विश्व की प्राचीनतम सभ्यता, आधुनिकतम सपनों के साथ भविष्य की उड़ान भरने को तैयार है?
ज्योतिषियों की भाषा में दुनिया इस वक्त एक महत्वपूर्ण
खगोलीय घटना के बीच से गुज़र रही है। वह है, नेपच्यून का मेष राशि में प्रवेश। नेपच्यून
ने 30 मार्च, 2025 को एक नए 14 वर्षीय अध्याय के साथ-साथ एक
नए राशिचक्र की शुरुआत कर दी है। 165 वर्षों के बाद उसने मेष राशि में प्रवेश किया
है, जो 2039 तक रहेगा। इससे व्यक्तिगत पहचान, नए आदर्शों और आध्यात्मिक खोजों का दौर शुरू हुआ है, जहाँ लोग अपने सपनों को साकार करने और साहसिक कदम उठाने के लिए प्रेरित
होंगे। यह ऐसा दौर है, जब साहस हमें पुकारता है। हमारी आकांक्षाएं, महत्वाकांक्षाएं, दृष्टियां, इच्छाएं
और रचनात्मकता भीतर से जागती है। फलित ज्योतिष का संदर्भ यहाँ केवल प्रतीक रूप में है, उसका व्यावहारिक अर्थ कुछ भी नहीं है।
हमारे सामूहिक संकल्प
साठ के दशक में हिंदी के लोकप्रिय व्यंग्य लेखक काका हाथरसी ने एक कविता लिखी थी, ‘जन-गण मन के देवता, अब तो आँखें खोल/ महँगाई से हो गया, जीवन डावाँडोल/ जीवन डावाँडोल, ख़बर लो शीघ्र कृपालू/ कलाकंद के भाव बिक रहे बैंगन-आलू।’ यह कविता हमें अपने आसपास से जोड़ती है और आप इसे हरेक दौर में पसंद कर सकते हैं। यह जनता के की मन की बात है। इसका मतलब यह भी नहीं कि हम निराशावादी हैं, बल्कि यह है कि समाधान चाहते हैं।
निजी तौर पर लोग नए साल पर कुछ संकल्प करते हैं।
हमारा सामूहिक संकल्प क्या है? हम अपनी रचनात्मकता के माध्यम से अपनी बिसराई पहचान
खोज रहे हैं। हमारी व्यक्तिगत प्रतिभा, सहज ज्ञान और कौशल पहले
से कहीं अधिक मुखर और प्रभावशाली हो रहे हैं। दुनिया के साथ भारत इस वक्त जबर्दस्त
‘अमृत-मंथन’ में जुटा है। यह अमृत-मंथन आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और सामाजिक हरेक
धरातल पर है।
सकारात्मक संभावनाएँ
नया साल 2026 तमाम नए सुधार, समय सीमा, नीति और कराधान व्यवस्था में बदलाव लेकर आया
है। जीडीपी की गणना के लिए आधार वर्ष में इस साल बदलाव होगा। आईआईपी से लेकर
कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मिकैनिज्म (सीबीएएम) लागू होगा। नई श्रम संहिता और कर
सुधार पूरी तरह से लागू होंगे। और अप्रेल में एक बड़ा काम जनगणना के रूप में शुरू
होगा।
2026 में भारत के लिए अनेक सकारात्मक संभावनाएँ
हैं। वैश्विक चुनौतियों के बीच आर्थिक संवृद्धि, तकनीकी
नवाचार, अंतरिक्ष कार्यक्रम और सामाजिक क्षेत्रों में हम लगातार बढ़ रहे हैं। रिजर्व
बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.3 प्रतिशत
माना है। एशियाई विकास बैंक ने इसे 7.2 प्रतिशत और आईसीआरए ने 7.4 प्रतिशत माना है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था 45.1 खरब डॉलर तक पहुँचकर जापान को पीछे छोड़ चौथा स्थान
हासिल कर लेगी। यह संवृद्धि विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था
और निर्यात पर केंद्रित नीतियों का परिणाम है। इस साल निर्यात में 15-20 प्रतिशत की वृद्धि
की संभावना है। इन बातों के बड़े व्यापक निहितार्थ हैं। क्या आप इनके मतलब जानते
हैं?
आपकी भूमिका
नहीं जानते, तो जानना चाहिए और जानते हैं, तो
मानना चाहिए। बेशक हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हैं। लोकतंत्र की सबसे
बड़ी कसौटी है नागरिकों का संतोष। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की मानव-विकास
रिपोर्ट-2025 के अनुसार 2023 के डेटा के आधार पर भारत का
स्कोर 0.685 था, जो दक्षिण एशिया
क्षेत्र में भूटान (0.677), नेपाल (0.606) और पाकिस्तान (0.540) से बेहतर,
बांग्लादेश के (0.685) के बराबर और श्रीलंका (0.782) से कम है। भारत का रैंक 193
देशों में 130वाँ है।
इसका मतलब है कि हमें नागरिकों की शिक्षा और
स्वास्थ्य पर अभी और ध्यान देना होगा। राजनीतिक बहस जैसी भी हो, पर हमारी चुनाव-प्रक्रिया
का सम्मान है। जनवरी 2026 में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 39
देशों के नामांकन के बाद इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल
असिस्टेंस (आई-आईडीईए) की अध्यक्षता संभाली है। भारत को पहली बार इसकी अध्यक्षता का
मौका मिला है। 1995 में स्थापित, इंटरनेशनल आईडीईए, एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसमें 37 देशों की वर्तमान सदस्यता है।
…और आपके कदम
प्यू रिसर्च सेंटर के जुलाई 2025 के एक
सर्वेक्षण के अनुसार, 74 प्रतिशत भारतीय अपने देश की
लोकतांत्रिक प्रणाली से संतुष्ट हैं, जिससे भारत लोकतंत्र
संतुष्टि के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है, जो
स्वीडन (75 प्रतिशत) के ठीक पीछे है। ऐसा तब है, जब कई
विकसित देशों में लोकतंत्र से असंतोष बढ़ रहा है। यह सर्वेक्षण 23 देशों में किया
गया था और भारत उन कुछ देशों में से एक है जहाँ लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था दोनों से
काफी संतुष्टि पाई गई है।
कुछ साल पहले एक नारा चला था, ‘सौ में 90 बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान।’ इस नारे का
सबने आनंद लिया, पर किसी ने खुद को अपमानित महसूस नहीं किया। हमें लगता है कि
व्यवस्था को ठीक होने में समय लगेगा। फिर सौ में 90 बेईमान हैं भी नहीं। आप अपने
आसपास देखें, तो पाएँगे कि सौ में 90 ईमानदार हैं और ईमानदारी से व्यवस्था को कायम
करना चाहते हैं, पर वे सक्रिय नहीं हैं, खामोश हैं। जरूरत उनके सक्रिय होने की है।
सांस्कृतिक-भारत
पूरी उम्मीद है कि सांस्कृतिक दृष्टि से यह साल
उत्साह से भरा होगा। कश्मीर से कन्याकुमारी तक और अटक से कटक तक मनाए जाने वाले
पर्वों के साथ हमारी खास तरह की अद्भुत एकता काम करती है। वह नव संवत्सर, पोइला बैसाख, पोंगल, ओणम,
होली हो या दीपावली और छठ। इस एकता की झलक आपको ईद, मुहर्रम और क्रिसमस के मौके पर भी दिखाई पड़ेगी।
क्रिकेट और योग के बाद नृत्य और संगीत दुनिया के
दूसरे देशों में ‘सॉफ्ट पावर’ के रूप में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। 15 से 19 जनवरी तक जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल होगा।
17-18 को चेन्नई में 'लिट फॉर लाइफ।' इन सम्मेलनों में नया भारत विचार करता है। अरुणाचल के ज़िरो संगीत समारोह
(सितंबर) और नगालैंड के हॉर्नबिल फेस्टिवल (दिसंबर) आदिवासी परंपराओं को वैश्विक गीत-संगीत
के साथ जोड़ेंगे।
यह सांस्कृतिक-यात्रा 12 जनवरी को स्वामी
विवेकानंद जयंती और उसी दिन मनाए जाने वाले राष्ट्रीय युवा दिवस से शुरू हो जाएगी।
13 जनवरी को लोहड़ी, फिर मकर संक्रांति, पोंगल (14-17 जनवरी) असम में बीहू। 26
जनवरी को गणतंत्र दिवस की परेड में हम देश
की सांस्कृतिक-समृद्धि का प्रदर्शन देखेंगे। आप देखेंगे कि हमारी संस्कृति
निष्क्रिय नहीं, जीवंत प्रवहमान है।
विज्ञान और तकनीक
भारत ने 2025 के फ्रंटियर टेक्नोलॉजीस रेडीनेस
इंडेक्स में 36वाँ स्थान हासिल किया है, जबकि 2022 में यह
48वें स्थान पर था। अंकटाड का यह सूचकांक सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के
उपयोग, कौशल, अनुसंधान और विकास
(आरएंडडी) गतिविधि, औद्योगिक क्षमता और वित्त तक पहुँच के
संकेतकों को बताता है। यह प्रगति भारत की आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और नैनो
टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है। इस साल 19-20 फरवरी
को नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट होगा। यह वैश्विक सम्मेलन एआई को लोकतांत्रिक
बनाने और डिजिटल विभाजन को पाटने पर केंद्रित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फ्रांस में
एआई एक्शन समिट में घोषित यह आयोजन आर्थिक विकास, सामाजिक
कल्याण और सतत विकास के लिए एआई के उपयोग पर जोर देगा। इसी तरह भारत सरकार ने बायो
टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में युवाओं को प्रोत्साहन देने के लिए ‘डिजाइन फॉर
बायो-ई3 चैलेंज’ को
दो श्रेणियों में शुरू किया है। श्रेणी 1, कक्षा 6 से 12 तक
के स्कूली छात्रों के लिए और श्रेणी 2 सभी भारतीय नागरिकों के लिए। डिजाइन फॉर
बायो-ई3 चैलेंज साल भर चलने वाली चुनौती है जो 1 अक्तूबर, 2026
तक हर महीने की पहली तारीख को शुरू होगी।
Boxes
खेल का मैदान
यह साल खेल के मैदान में भारत के लिए रोमांचक
होगा। लॉस एंजेलस ओलंपिक 2028 की तैयारी का यह आधार वर्ष भी, जिसके क्वालिफिकेशन इस
साल शुरू होंगे। सरकार ने ‘मिशन लॉस एंजेलस 2028’ शुरू किया है। क्रिकेट में साल
की शुरुआत न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज से होगी, जिसमें
वनडे और टी-20 मुकाबले खेले जाएंगे। अंडर-19 वनडे विश्व कप की शुरुआत 15 जनवरी से
होगी और यह टूर्नामेंट 6 फरवरी तक खेला जाएगा। जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी
में यह टूर्नामेंट होगा। इस टूर्नामेंट में वैभव सूर्यवंशी और आयुष म्हात्रे जैसे
उभरते हुए युवा सितारों पर नजर रहेगी। फरवरी-मार्च में पुरुष टी-20 विश्व कप भारत
और श्रीलंका की मेजबानी में होगा। सितंबर-अक्तूबर में जापान में एशियन गेम्स होंगे।
वहाँ हमारी टीम हॉकी में गोल्ड हासिल कर पाई, तो 2028 के ओलिंपिक खेलों में सीधा
प्रवेश मिल जाएगा। उसके पहले 14 से 30 अगस्त तक बेल्जियम के वावरे और नीदरलैंड के
एम्स्टेलवीन में हॉकी की विश्वकप प्रतियोगिता भी है। एशियन गेम्स में एथलेटिक्स,
शूटिंग, बॉक्सिंग और कुश्ती में हमें पदक पाने की आशा है। इसी साल
जुलाई में ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स है, जिनमें भारत की मजबूत दावेदारी है।
अंतरिक्ष में भारत
इसरो नए साल का पहला प्रक्षेपण 10 जनवरी को
श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष पोर्ट से ईओएस-01 इमेजिंग उपग्रह और 18 छोटे उपग्रहों के
प्रक्षेपण के साथ करेगा। इसरो ने मार्च तक सात प्रक्षेपणों की योजना बनाई है। इस
दौरान गगनयान का पहले कक्षीय परीक्षण (जी-1) भी होगा। इस मिशन में व्योममित्र नामक
रोबोट (ह्यूमनॉयड) उड़ान के दौरान 2027 में प्रस्तावित समानव मिशन की प्रणालियों
की जाँच करेगा। इस साल टीडीएस-01 उपग्रह का लॉन्च भी होगा, जो इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन
सिस्टम की नई तकनीक का परीक्षण करेगा, जिसके सफल होने से भविष्य में उपग्रहों का
वजन काफी कम हो जाएगा। इस वर्ष निजी अंतरिक्ष कंपनियां-स्काईरूट एयरोस्पेस और
अग्निकुल कॉस्मॉस अपने स्वदेशी रॉकेटों विक्रम-1 और अग्निबाण के जरिए उपग्रह लॉन्च
करने की तैयारी में भी हैं। दिगंतरा नामक स्टार्टअप ने पिछले साल जनवरी में दुनिया
की पहली कॉमर्शियल टोही सैटेलाइट स्कॉट का प्रक्षेपण किया था, जो अंतरिक्ष से पाँच
सेंटीमीटर जितनी छोटी वस्तु का भी पता लगाने में समर्थ है। यह स्टार्टअप इस वर्ष
आठ स्कॉट उपग्रह लॉन्च करने की योजना बना रहा है। अंतरिक्ष में भारत के पहले सोलर
मिशन, आदित्य-एल1 के लिए भी 2026 के एक अभूतपूर्व साल होने
की उम्मीद है।

यह लेख मुझे एक दोस्त की तरह समझाता हुआ लगा, जो भविष्य की तस्वीर साफ़ दिखाना चाहता है। आप आँकड़ों, नीतियों और संस्कृति को जोड़कर भारत की पूरी कहानी सामने रखते हैं। मुझे अच्छा लगा कि आप सिर्फ सरकार की बात नहीं करते, बल्कि नागरिक की भूमिका पर भी सीधा सवाल रखते हैं। लोकतंत्र, शिक्षा और स्वास्थ्य पर आपका फोकस बहुत ज़रूरी है।
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